विजय नगर साम्राज्य

विजय नगर साम्राज्य

विंध्याचल के दक्षिण का भारत 200 वर्षों से अधिक समय तक विजयनगर और बहमनी राज्यों के प्रभुत्व में रहा। उन्होंने न केवल क़ानून और व्यवस्था बनाये रखी, बल्कि व्यापार तथा हस्तशिल्प का विकास भी किया। कला और साहित्य को प्रोत्साहन दिया तथा अपनी राजधानियों को सुन्दर बनायां उत्तर भारत में जबकि विघटनकारी शक्तियाँ धीरे-धीरे विजयी… read more »

विरुपाक्ष द्वितीय (1465-1485 ई.)

विरुपाक्ष द्वितीय (1465-1485 ई.) संगम वंश का अन्तिम शासक था।मल्लिकार्जुन के उत्तराधिकारी विरुपाक्ष द्वितीय के शासन काल में विजयनगर से गोवा, कोंकण एवं उत्तरी कर्नाटक के कुछ भाग अलग हो गये।ऐसी स्थिति में जबकि, विजयनगर राज्य टूटने की स्थिति में आ गया था, चन्द्रगिरी में गवर्नर पद पर नियुक्त सालुव नरसिंह ने विजयनगर राज्य की… read more »

देवराय द्वितीय

देवराय प्रथम के बाद उसका पुत्र ‘रामचन्द्र’ 1422 ई. में सिंहासन पर बैठा, परन्तु कुछ महीने बाद ही उसकी मृत्यु हो गई।रामचन्द्र के बाद उसका भाई ‘वीरविजय’ गद्दी पर बैठा, लेकिन उसका शासन काल अल्पकालीन रहा।अगला शासक वीरविजय का पुत्र देवराय द्वितीय (1422-1446 ई.) हुआ।देवराय द्वितीय संगम वंश के महान् शासकों में था, उसे ‘इमादि… read more »

देवराय प्रथम (1406-1422 ई.)

देवराय प्रथम (1406-1422 ई.) हरिहर द्वितीय के बाद विजयनगर साम्राज्य का वास्तविक उत्तराधिकारी था।उसे अपने शासन काल में बहमनी सुल्तान फ़िरोजशाह के आक्रमण का सामना करना पड़ा। देवराय को अपने समय में आंतरिक विद्रोहों का भी सामना करना पड़ा था, परन्तु अन्ततः वह इन्हें दबाने में सफल हुआ।फ़िरोज शाह बहमनी से पराजित होने के कारण… read more »

बुक्का द्वितीय (1404-1406 ई.)

बुक्का द्वितीय (1404-1406 ई.), बुक्का प्रथम का पौत्र था। विजयनगर साम्राज्य के राज सिंहासन पर बैठाये जाने के समय उसके भाई विरुपाक्ष प्रथम ने उसका विरोध किया था। बुक्का द्वितीय केवल दो वर्ष तक ही शासन कर सका।

विरुपाक्ष प्रथम (1404 ई.)

विरुपाक्ष प्रथम (1404 ई.) विजयनगर साम्राज्य के हरिहर द्वितीय का पुत्र था।1404 ई. में पिता की मृत्यु के बाद विरुपाक्ष प्रथम ने सिंहासन पर अधिकार कर लिया।राजगद्दी पर अधिकार करने के बाद शीघ्र ही विरुपाक्ष प्रथम अपने ही भाई बुक्का द्वितीय के द्वारा अपदस्थ कर दिया गया। इस प्रकार उसका शासन बहुत ही अल्प कालीन… read more »

हरिहर द्वितीय

हरिहर द्वितीय (1377-1404 ई.) बुक्का प्रथम का पुत्र तथा उत्तराधिकारी था। वह विजयनगर साम्राज्य का दूसरा राजा था। हरिहर द्वितीय सिंहासन पर ‘महाराजाधिराज’ की उपाधि ग्रहण करके बैठा था। उसने साम्राज्य की सीमा दक्षिण में त्रिचनापल्ली तक पहुँचा दी थी। हरिहर द्वितीय ने कनारा, मैसूर, त्रिचनापल्ली, कांची आदि प्रदेशों पर विजय प्राप्त की।बहमनी सुल्तानों के… read more »

बुक्का प्रथम

हरिहर प्रथम का उत्तराधिकारी उसका भाई बुक्का प्रथम (1356-1377 ई.) सिंहासन पर बैठा। उसने मदुरा को अपने साम्राज्य में शामिल किया।सर्वप्रथम बुक्का ने ही बहमनी वंश और विजयनगर साम्राज्य के मध्य बने विवाद के कारण कृष्णा नदी को दोनों साम्राज्य की सीमा माना।बुक्का ने ‘वेदमार्ग प्रतिष्ठापक’ की उपाधि ग्रहण की।उसने वेद और अन्य धार्मिक ग्रन्थों… read more »

हरिहर प्रथम

हरिहर प्रथम (1336-1355 ई.) संगम का पुत्र था। उसने अपने चार भाइयों की सहायता से, जिनमें बुक्कराय प्रथम मुख्य था, 1336 ई. में तुंगभद्रा नदी के दक्षिणी तट पर विजयनगर साम्राज्य की स्थापना की।विजयनगर साम्राज्य की स्थापना में हरिहर प्रथम को दो ब्राह्मण आचार्यों, माधव विद्याराय और उसके ख्यातिप्राप्त भाई वेदों के भाष्यकार ‘सायण’ से… read more »

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