परमवीर चक्र संक्षिप्त में Param veer Chakra

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परमवीर चक्र के  बारे में संक्षिप्त जानकारी।

परमवीर चक्र भारत का सर्वोच्च सैन्य सम्मान है। यह सेना के जवानों को उनकी बहादुरी के लिए दिया जाता है। इस सम्मान की शुरुआत 26 जनवरी 1950 में हुई थी। अब तक 21 सैनिकों को इससे सम्मानित किया गया है।
– सबसे ज्यादा सेना के 20 और एयरफ़ोर्स के एक जवान को ये अवॉर्ड मिला है।
– अभी तक नेवी के किसी जवान को यह अवॉर्ड नहीं मिला है।
– परमवीर चक्र पाने वाले सैनिकों या उनके परिजनों को 10 हजार रुपए महीने का अलाउंस भी दिया जाता है।
– परमवीर चक्र को सावित्री बाई खालोनकर ने डिजाइन किया था। उनकी मां हंगरी की, जबकि पिता रशियन थे।
– उनकी शादी मेजर जनरल विक्रम खालोनकर से हुई थी।
-सोमनाथ शर्मा को मरणोपरांत पहला परमवीर चक्र का सम्मान मिला।
पदक का प्रावधान
स्वतंत्र भारत में पराक्रमी वीरों को युद्ध भूमि में दिखाये गये शौर्य के लिए अनेक प्रतीक सम्मान पुरस्कारों का चलन शुरू हुआ। 15 अगस्त 1947 से वर्ष 1950 तक भारत अपना संविधान रचने में व्यस्त रहा। 26 जनवरी 1950 को जो विधान लागू हुआ, उसे 1947 से प्रभावी माना गया। वह इसलिए जिससे 1947-48 में हुए भारत-पाक युद्ध के वीरों को, जिन्होंने जम्मू- कश्मीर के मोर्चों पर अपना शौर्य दिखाया, उन्हें भी पुरस्कारों से सम्मानित किया जा सके। इस क्रम में युद्धभूमि में सैनिकों द्वारा दिखाए गये पराक्रम के लिए 1950 में तीन पुरस्कारों का प्रावधान किया गया, जो श्रेष्ठता के क्रम से इस प्रकार हैं-

परमवीर चक्र
महावीर चक्र
वीर चक्र
वर्ष 1952 में अशोक चक्र का प्रावधान किया गया।
शाब्दिक अर्थ

‘परमवीर चक्र’ का शाब्दिक अर्थ है “वीरता का चक्र”। संस्कृति के शब्द “परम”, “वीर” एवं “चक्र” से मिलकर यह शब्द बना है।यदि कोई परमवीर चक्र विजेता दोबारा शौर्य का परिचय देता है और उसे परमवीर चक्र के लिए चुना जाता है तो इस स्थिति में उसका पहला चक्र निरस्त करके उसे रिबैंड (Riband) दिया जाता है। ‘परमवीर चक्र’ को अमेरिका के ‘सम्मान पदक’ तथा ‘यूनाइटेड किंगडम’ के ‘विक्टोरिया क्रॉस’ के बराबर का दर्जा हासिल है। यह पुरस्कार वीर सैनिक को स्वयं या मरणोपरांत दिये जाने की स्थिति में, उसके प्रतिनिधि को सम्मानपूर्वक दिया जाता है। इस पुरस्कार को देश के तत्कालीन राष्ट्रपति विशिष्ट समारोह में अपने हाथों से प्रदान करते हैं। 1947 से लेकर आजतक यह पुरस्कार, चार बड़े युद्ध लड़े जाने के बाद भी केवल 21 सैनिकों को ही दिया गया है, जिनमें से 14 सैनिकों को यह पुरस्कार मरणोपरांत दिया गया है।

परमवीर चक्र का स्वरूप
भारतीय सेना के रणबांकुरों को असाधारण वीरता दर्शाने पर दिए जाने वाले सर्वोच्च पदक परमवीर चक्र का डिज़ाइन विदेशी मूल की एक महिला ने किया था और 1950 से अब तक इसके आरंभिक स्वरूप में किसी तरह का कोई परिवर्तन नहीं किया गया है

परमवीर चक्र विजेताओं के नाम

मेजर सोमनाथ शर्मा ,1947
लांस नायक करम सिंह , 1948
सेकेंड लेफ़्टीनेंट राम राघोबा राणे ,1948
नायक यदुनाथ सिंह,1948
कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह,1948
कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया,1961

मेजर धनसिंह थापा,1962
सूबेदार जोगिंदर सिंह,1962
मेजर शैतान सिंह,1962
हवलदार अब्दुल हामिद, 1965
कर्नल आर्देशिर तारापोर,1965
लांस नायक अलबर्ट एक्का,1971
फ्लाईंग आफिसर निर्मलजीत सिंह सेखो,1971

लेफ्टिनेंट अरुण क्षेत्रपाल पूना हार्स,1971
मेजर होशियार सिंह,1971
नायब सूबेदार बन्ना सिंह,1987,
मेजर रामास्वामी परमेश्वर, 1987,
लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे,1999
ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव,1999
राइफलमैन संजय कुमार , 1999
कैप्टन विक्रम बत्रा,1999

अभी मात्र दो परमवीर चक्र विजेता जीवित है जिनमे योगेंद्र सिंह यादव और संजय कुमार जी है ।

जय हिंद ।