हड़प्पाकालीन कब्रों की खुदाई – हरियाणा के राखीगढ़ी में मिला युवा जोड़े कंकाल

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पुणे की डेक्कन कॉलेज डीम्ड विश्वविद्यालय के पुरातत्वविदों को खुदाई के दौरान एक युवा जोड़े का कंकाल मिला है। खुदाई के दौरान दोनों एक ही कब्र में मिले जिसमे पुरुष कंकाल का चेहरा महिला की तरफ था। यह कंकाल हिरयाणा के राखीगढ़ी में हड़प्पाकालीन सभ्यता का बताया जा रहा है। यह पहली बार है जब हड़प्पा सभ्यता की खुदाई के दौरान किसी युगल की कब्र मिली है। हरियाणा का राखीगढ़ी दिल्ली से 150 किलोमीटर उत्तरपश्चिम में स्थित है।

पुरातत्वविदों ने बताया खुदाई के दौरान मिले साक्ष्यों से पता चलता है कि जोड़े को एक ही समय में दफनाया गया है। क्योंकि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है कि पहले किसी एक को फिर दूसरे को दफनाया गया हो।

युवा जोड़े का कंकाल मिलना पुरातत्वविदों की रूचि को बढ़ा रहा है। पुणे मानद विश्वविद्यालय ने इस खोज की पूरी जानकारी अंतर्राष्ट्रीय जर्नल एसीबी जर्नल ऑफ एनाटोमी एंड सेल बायोलोजी में प्रकाशित किया है। इस रिपोर्ट में यह भी लिखा गया है कि कंकाल का मुंह, हाथ और पैर सभी एक समान एक समय के हैं। इससे पता चल रहा है कि दोनों को जवानी के समय एक साथ दफनाया गया होगा। पुरातत्वविदों ने राखीगढ़ी में करीब 62 कब्रों की खुदाई की है।

खुदाई और विश्लेषण यूनिवर्सिटी के पुरातत्व विभाग और इंस्टिट्यूट ऑफ फरेंसिक साइंस, सोल नैशनल यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिसिन द्वारा किया गया। इस पूरी खुदाई की जानकारी देने वाले वसंत शिंदे ने बताया कि भारतीय पुरातत्वविदों ने मिलकर युगलों के दफनाने पर चर्चा की। इससे पूर्व लोथल में खोजे गए एक हड़प्पा युगल कब्र को माना गया था कि वह विधवा थी और उसे अपने पति की मौत के बाद दफनाया गया था।

ऐतिहासिक उथल-पुथल की साक्षी राखीगढ़ी

ऐतिहासिक भारतीय नगर राखीगढ़ी में कब्र से मिले प्राचीन डीएनए के अध्ययन ने कुछ ऐसे सबूतों का खुलासा किया है जो हिंदुत्व राष्ट्रवादियों को असहज कर देंगे.

“पेट्रस बोन” मानव खोपड़ी का एक अपरिष्कृत लेकिन उपयोगी हिस्सा है—मूल रूप से यह आपके आंतरिक कान की रक्षा करता है. लेकिन यह बस इतनी ही रखवाली नहीं करता. हाल के वर्षों में, प्राचीन कंकाल से डीएनए निकालने में जुटे आनुवंशिकी वैज्ञानिकों ने पाया है कि पेट्रस हड्डी के एक खास हिस्से (कर्णावर्त को सुरक्षा देने वाला हिस्सा) का घनत्व बहुत अधिक होता है और उससे किसी अन्य ऊतक के मुकाबले कई बार 100 गुना अधिक डीएनए निकाले जा सकते हैं.

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