बौद्ध साहित्य की सूची ( Ancient History Short Notes)

त्रिपिटक ( विनयपिटक,अभिधम्मपिटक,सुत्तपिटक) त्रिपिटक बौद्ध धर्म के भगवान बुद्ध के उपदेश तीन साहित्य खंडों में संकलित हैं। इन्हें ‘त्रिपिटक’ कहते हैं। ये तीन  हैं- विनयपिटक  (विनयपिटक में पांच ग्रंथ सम्मिलित…

बक्सर के युद्ध का राजनीतिक और सैन्य महत्त्व

प्लासी का युद्ध 1757 में सिराजुद्दौला और क्लाइव के बीच हुआ था। इस युद्ध में क्लाइव की जीत हुई और मीर जाफर को बंगाल की गद्दी पर बिठाया गया। प्लासी…

होयसल वंश – One Liner

विष्णुवर्धन > वीर बल्लाल > वीर बल्लाल तृतीय > नरसिंह होयसल वंश का प्रारम्भ सन 1111 ई. के आसपास मैसूर के प्रदेश में हुआ। उसने अपना नाम विष्णुवर्धन रख लिया…

2 प्रश्न कम से कम : वैदिक काल ( 1500 – 600 BC) के प्रश्न PCS SSSC UPSSSC Bank,

Q) वैदिक काल क्या है ? ANS) इसमे वेदो की रचना हुई इसलिए इसे वैदिक काल कहते है Q) वैदिक काल का प्रमुख देवता कौन था ? ANS) इन्द्र Q)…

अरविडु वंश

अरविडु वंश अथवा ‘कर्णाट राजवंश’ (1570-1650 ई.) की स्थापना 1570 ई. के लगभग तिरुमल ने सदाशिव राय को अपदस्थ कर पेनुगोण्डा में की थी। यह वंश दक्षिण भारत के विजयनगर…

तुलुव वंश

तुलुव वंश (1505-1570 ई.) की स्थापना नरसा नायक के पुत्र ‘वीर नरसिंह’ ने की थी। इतिहास में इसे ‘द्वितीय बलापहार’ की संज्ञा दी गई है।1505 में नरसिंह ने सालुव वंश…

सालुव वंश

सालुव वंश का संस्थापक ‘सालुव नरसिंह’ था। 1485 ई. में संगम वंश के विरुपाक्ष द्वितीय की हत्या उसी के पुत्र ने कर दी थी, और इस समय विजयनगर साम्राज्य में…

विरुपाक्ष द्वितीय (1465-1485 ई.)

विरुपाक्ष द्वितीय (1465-1485 ई.) संगम वंश का अन्तिम शासक था।मल्लिकार्जुन के उत्तराधिकारी विरुपाक्ष द्वितीय के शासन काल में विजयनगर से गोवा, कोंकण एवं उत्तरी कर्नाटक के कुछ भाग अलग हो…

देवराय द्वितीय

देवराय प्रथम के बाद उसका पुत्र ‘रामचन्द्र’ 1422 ई. में सिंहासन पर बैठा, परन्तु कुछ महीने बाद ही उसकी मृत्यु हो गई।रामचन्द्र के बाद उसका भाई ‘वीरविजय’ गद्दी पर बैठा,…

देवराय प्रथम (1406-1422 ई.)

देवराय प्रथम (1406-1422 ई.) हरिहर द्वितीय के बाद विजयनगर साम्राज्य का वास्तविक उत्तराधिकारी था।उसे अपने शासन काल में बहमनी सुल्तान फ़िरोजशाह के आक्रमण का सामना करना पड़ा। देवराय को अपने…

बुक्का द्वितीय (1404-1406 ई.)

बुक्का द्वितीय (1404-1406 ई.), बुक्का प्रथम का पौत्र था। विजयनगर साम्राज्य के राज सिंहासन पर बैठाये जाने के समय उसके भाई विरुपाक्ष प्रथम ने उसका विरोध किया था। बुक्का द्वितीय…

विरुपाक्ष प्रथम (1404 ई.)

विरुपाक्ष प्रथम (1404 ई.) विजयनगर साम्राज्य के हरिहर द्वितीय का पुत्र था।1404 ई. में पिता की मृत्यु के बाद विरुपाक्ष प्रथम ने सिंहासन पर अधिकार कर लिया।राजगद्दी पर अधिकार करने…

हरिहर द्वितीय

हरिहर द्वितीय (1377-1404 ई.) बुक्का प्रथम का पुत्र तथा उत्तराधिकारी था। वह विजयनगर साम्राज्य का दूसरा राजा था। हरिहर द्वितीय सिंहासन पर ‘महाराजाधिराज’ की उपाधि ग्रहण करके बैठा था। उसने…

बुक्का प्रथम

हरिहर प्रथम का उत्तराधिकारी उसका भाई बुक्का प्रथम (1356-1377 ई.) सिंहासन पर बैठा। उसने मदुरा को अपने साम्राज्य में शामिल किया।सर्वप्रथम बुक्का ने ही बहमनी वंश और विजयनगर साम्राज्य के…

हरिहर प्रथम

हरिहर प्रथम (1336-1355 ई.) संगम का पुत्र था। उसने अपने चार भाइयों की सहायता से, जिनमें बुक्कराय प्रथम मुख्य था, 1336 ई. में तुंगभद्रा नदी के दक्षिणी तट पर विजयनगर…

आधुनिक भारत का इतिहास- महत्वपूर्ण

● वांडीवाश के युद्ध में अंग्रेजों का नेतृत्व किसने किया— सर आयर कूट ने ● चंद्रनगर की बस्ती फ्रांसीसियों को किसने भेंट की— शाइस्ता खाँ ● मुगल बादशाह ने किसे…

पुराऐतिहासिक संस्कृतियां

अभिलेखः अभिलेख सर्वाधिक महत्वपूर्ण साक्ष्य माने जाते हैं। सम्राट अशोक के अभिलेख सर्वाधिक प्राचीन माने जाते हैं। अशोक के अधिकांश अभिलेख ब्राह्मी लिपि में, पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान से प्राप्त अभिलेख…