समसामयिकी 09 May 2018

1.सीजेआई महाभियोग मामला : कांग्रेस हटी पीछे
• कांग्रेस ने सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू द्वारा खारिज किए जाने के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपने दो सांसदों की ओर से दायर याचिका वापस ले ली है।
• न्यायमूर्ति एके सीकरी की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सांसदों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल को नायडू के आदेश पर चुनौती देने वाले मुख्य मुद्दे पर बहस करने के लिए कहा, जिसके बाद सिब्बल ने याचिका वापस ले ली। पीठ ने सिब्बल की उस याचिका को मंजूरी नहीं दी, जिसमें उन्होंने पीठ गठित करने के लिए दिए गए प्रशासनिक आदेश की प्रति देने का अनुरोध किया था।
• राज्यसभा के सांसद प्रताप सिंह बाजवा और अमी याज्ञनिक ने प्रधान न्यायाधीश मिश्रा को हटाने के महाभियोग प्रस्ताव को नायडू द्वारा खारिज किए जाने के निर्णय के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था। न्यायमूर्ति सीकरी ने सिब्बल से पूछा, ‘‘आप किस उद्देश्य के लिए (पांच सदस्यीय पीठ गठित करने के प्रशासनिक आदेश) को चुनौती देना चाहते हैं।’ जिसके बाद सिब्बल ने कहा, ‘‘आपको अवश्य बताना चाहिए कि किसने यह आदेश पारित किया है। मेरे पास इस संबंध में प्रति होनी चाहिए, ताकि मैं इसे चुनौती दे सकूं।’
• सिब्बल ने कहा कि मामले को सिर्फ न्यायिक आदेश के जरिए ही संविधान पीठ के पास भेजा जा सकता है और उन्होंने आश्र्चय जताया कि यह किसी प्रशासनिक आदेश के जरिए कैसे किया जा सकता है। इस पर न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल ने पूछा कि क्या पत्र प्रक्रिया के जरिए मामले को किसी पांच सदस्यीय पीठ के पास सीधे भेजने पर कोई प्रतिबंध है?
• न्यायमूर्ति एसए बोबड़े, न्यायमूर्ति एनवी रमण, न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की पीठ ने सिब्बल को याद दिलाया कि मामले की सुनवाई के प्रारंभ में उन्होंने कहा था कि उनका कोई निजी एजेंडा नहीं है और वह न्यायालय की गरिमा बरकरार रखने के लिए ऐसा कर रहे हैं।
• सिब्बल ने हस्तक्षेप किया, ‘‘अगर आप मुझे (पांच सदस्यीय पीठ गठित करने के) उस (प्रशासनिक) आदेश की प्रति दे देंगे, तो क्या न्यायालय की गरिमा गिर जाएगी। यह राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कोई गोपनीय दस्तावेज नहीं है।’ वहीं, राज्यसभा के सभापति की ओर से पेश महान्यायवादी केके वेणुगोपाल ने कहा कि प्रधान न्यायाधीश के पास प्रशासनिक स्तर पर मामले को किसी भी पीठ को आवंटित करने के संबंध में विवेकाधीन शक्तियां होती हैं।
• देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग मामले में कांग्रेस सांसदों की याचिका वापस लिए जाने के चंद घंटे बाद जाने-माने वकील प्रशांत भूषण ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत संविधान पीठ के गठन से संबंधित शासकीय आदेश की जानकारी मांगी है।
• भूषण ने उच्चतम न्यायालय के केंद्रीय जन सम्पर्क अधिकारी एवं अतिरिक्त रजिस्ट्रार अजय अग्रवाल से आरटीआई के तहत संबंधित जानकारी मांगी है। उन्होंने आरटीआई आवेदन में पूछा है कि क्या ‘‘प्रताप सिंह बाजवा एवं अन्य बनाम राज्यसभा सभापति एवं अन्य’ से संबंधित रिट याचिका प्रशासकीय आदेश के तहत संविधान पीठ के समक्ष आठ मई को सूचीबद्ध की गयी थी।

2. सेवाओं की महंगाई मापने के लिए शुरू होगा सूचकांक
• सरकार अब सेवा क्षेत्र के लिए भी महंगाई सूचकांक शुरू करने जा रही है। इसमें शुरू में दूरसंचार, रेलवे सहित 10 प्रमुख सेवाओं को शामिल किया जाएगा। अगले महीने से प्रायोगिक तौर पर इसकी शुरुआत हो जाएगी। एक सरकारी अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
• सरकार की इस पहल से सेवाओं की महंगाई को भी आंका जा सकेगा। दूरसंचार, रेलवे के अलावा इसमें बंदरगाह, डाक सेवाएं, बीमा, बैंकिंग, परिवहन और हवाई यात्रा जैसी सेवाओं को भी शामिल किया जाएगा। अधिकारी ने कहा, ‘‘प्राड्यूशर्स प्राइस इंडेक्स (पीपीआई) को अगले महीने जारी किया जाएगा।’
• देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सेवा क्षेत्र का योगदान करीब 60 फीसद तक पहुंच चुका है इस लिहाज से नया सूचकांक काफी अहम होगा। वर्तमान में वस्तुओं के दाम की घटबढ़ को आंकने के लिए दो मूख्य सूचकांक का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) प्रमुख हैं।
• डब्ल्यूपीआई में थोक बाजार में वस्तुओं के दाम के उतार-चढ़ाव को आंका जाता है जबकि सीपीआई खुदरा बाजार के स्तर पर महंगाई को आंकता है। सीपीआई में कुछ सेवाओं को भी शामिल किया गया है।
• पीपीआई में सेवाओं पर आने वाली लागत ही परिलक्षित होगी। इसमें किसी तरह के कर को शामिल नहीं किया जायेगा। इसमें किसी उत्पादक के लिहाज से उसके सामान और सेवाओं के मूल्य में आने वाले बदलाव को आंका जाएगा।

3. देश के चुनावी इतिहास में पहली बार ई-नामांकन
• देश के चुनावी इतिहास में पहली बार पश्चिम बंगाल के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ई-नामांकन पर मंगलवार को कलकत्ता हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति विश्वनाथ समाद्दार व अरिंदम मुखर्जी की खंडपीठ ने माकपा की ओर से ई-नामांकन मंजूर करने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य चुनाव आयोग को आदेश दिया कि 23 अप्रैल को माकपा की ओर से दोपहर तीन बजे तक ई-मेल से जितने भी नामांकन दाखिल हुए हैं उन्हें स्वीकृति दें।
• साथ ही आयोग से कहा कि कितने लोगों ने ई-मेल से नामांकन दाखिल किए हैं उनकी सूची भी जारी करें। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद 14 मई को होने वाले मतदान को लेकर एक बार फिर संशय के बादल छा गए हैं। ज्ञात हो, हाई कोर्ट की एकल पीठ ने पिछले सप्ताह ¨हसा की वजह से नौ प्रत्याशियों द्वारा वाट्सएप पर भेजे गए नामांकन की स्वीकृति का निर्देश दिया था। इसके बाद माकपा ने ईमेल से भेजे गए नामांकन को भी स्वीकार करने की मांग करते हुए अपील दायर की थी।
• ई-नामांकन की सुविधा होती तो खून नहीं बहता: हाई कोर्ट खंडपीठ ने मंगलवार को चुनाव आयोग को एक बार फिर कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि आयोग ई-नामांकन स्वीकार करने को लेकर उदासीन था। यदि ई-नामांकन की सुविधा दी जाती तो नामांकन प्रक्रिया के दौरान खून नहीं बहता। नामांकन की संख्या में भी वृद्धि होती। मतदाताओं को पसंदीदा उम्मीदवारों को चुनने का मौका मिलता, लेकिन आयोग की उदासीनता की वजह से ऐसा संभव नहीं हुआ।
• बाद में खंडपीठ ने निर्देश दिया कि 23 अप्रैल को दोपहर बाद तीन बजे तक जितने लोगों ने ई-मेल से नामांकन दाखिल किया है उनके चुनाव लड़ने की व्यवस्था की जाए।

4. एशिया-प्रशांत पॉवर इंडेक्स में भारत चौथा सबसे शक्तिशाली देश
• एशिया-प्रशांत पॉवर इंडेक्स में भारत चौथा सबसे शक्तिशाली देश माना गया है। लोवी इंस्टीट्यूट ने इस क्षेत्र में मौजूद 25 देशों की क्षमता का आकलन किया था। आस्ट्रेलियन थिंक टैंक की रिपोर्ट में अमेरिका नंबर एक पर काबिज है तो चीन दूसरे नंबर पर जगह बनाए है।
• थिंक टैंक ने आठ बिंदुओं पर 25 देशों की क्षमता का आकलन किया था। इनमें आर्थिक संसाधन, सैन्य क्षमता, भविष्य के कदम, राजनयिक प्रभाव, आर्थिक सहयोग, रक्षा नेटवर्क, सांस्कृतिक प्रभाव व लचीलापन को पैमाना बनाया गया था। ओवर आल रैंकिंग में भारत चौथे नंबर पर है। हालांकि विभिन्न मामलों में उसकी क्षमता को अलग-अलग तरह से आंका गया है।
• आर्थिक संसाधन, सैन्य क्षमता, राजनयिक प्रभाव के मामले में भारत चौथे नंबर पर है तो लचीलेपन में उसकी रैंक पांचवी है। सांस्कृतिक प्रभाव व भविष्य के मामले में वह तीसरे नंबर पर है। आर्थिक संबंध में उसकी क्षमता संदेह के घेरे में है और थिंक टैंक ने उसे सातवें व डिफेंस नेटवर्क के मामले में उसे दसवें नंबर पर रखा गया है।
• 2016 से 2030 तक भारत की वृद्धि दर 169 फीसद रहने का अनुमान जताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक उसके पास 16 करोड़ 90 लाख कामगारों की फौज होगी। सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि आर्थिक संसाधनों के उपयोग के मामले में भारत को कमजोर माना जा रहा है। एक्ट ईस्ट पॉलिसी का बहुत ज्यादा असर नहीं दिख रहा। भारत ने एक्ट ईस्ट पॉलिसी को अपनी कूटनीति में खासा महत्व प्रदान किया है।
• उधर, अमेरिका ने नंबर दो पर काबिज चीन से दस अंकों की बढ़त हासिल कर रखी है। आठ में से पांच मोर्चे पर उसने नंबर एक की हैसियत बनाकर रखी है। सैन्य तालमेल के मामले में अमेरिका को एशिया में नंबर एक माना जा रहा है। डिफेंस नेटवर्क में भी वह चीन से 65 अंकों की बढ़त बनाए हुए है। अलबत्ता, आर्थिक साङोदारी के मोर्चे पर अमेरिका चीन से 30 अंकों से पिछड़ गया। वन बेल्ट वन रोड परियोजना से चीन ने यहां अमेरिका को काफी पीछे छोड़ दिया।
• खास बात है कि चार में से विश्व की तीन सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्थाएं एशिया में मौजूद हैं। थिंक टैंक का मानना है कि 2030 तक विश्व की दो तिहाई आबादी एशिया से होगी और भविष्य का कोई बड़ा युद्ध इस बात पर निर्भर करेगा कि एशिया की बड़ी ताकतों का उस विवाद पर क्या रुख रहता है। यही सबसे महत्वपूर्ण बात है।
• रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका के घटते राजनयिक प्रभाव के पीछे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गलत विदेश नीति व फैसले हैं। रिपोर्ट ने रूस, आस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, मलेशिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड, न्यूजीलैंड, वियतनाम, पाकिस्तान, ताइवान, फिलीपींस और उत्तर कोरिया को मध्यम दर्जे की शक्ति माना है।

5. नजदीकी के लिए वादों पर अमल का पैगाम लेकर नेपाल पहुंचेंगे मोदी:-
• मोदी 11 मई, 2018 को दो दिवसीय यात्र पर जनकपुर होते हुए काठमांडू पहुंचेंगे और विदेश मंत्रलय की तैयारियों को देखते हुए कहा जा सकता है कि उनकी यात्रा का उद्देश्य भारत-नेपाल के रिश्तों को पूरी तरह सामान्य बनाना है।
• मोदी की नेपाल यात्रा की तैयारियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि हम यह बताना चाहते हैं कि नेपाल के साथ रिश्तों को मजबूत करने को लेकर हम कितने गंभीर हैं। रक्सौल-काठमांडू रेल लाइन पर सर्वे करने के लिए हमने भारतीय कंपनी का चयन कर लिया है।
• नेपाल सरकार को उनकी कंपनी के बारे में फैसला करना है। भारत की मंशा है कि अगले नौ महीनों के भीतर इस रेल लाइन के निर्माण से जुड़े सर्वे (क्षेत्र, लागत आदि) भी पूरी हो जाएं और इसकी फंडिंग आदि की भी व्यवस्था हो जाए। अप्रैल, 2018 में नेपाली पीएम के सामने जलमार्ग संबंधी वादे के बारे में प्रगति यह हुई है कि बिहार के बालूघाट को दोनों देशों के बीच एंट्री प्वाइंट के तौर पर चिन्हित कर लिया गया है।
• इस बारे में आगे किस तरह से बढ़ा जाएगा, इसका भी अध्ययन हो रहा है। इसके लिए दोनों देशों के बीच मौजूदा आवागमन संबंधी समझौते में संशोधन करना होगा।
• नेपाल को कृषि क्षेत्र में भी मदद का आश्वासन : मोदी ने नेपाल को कृषि क्षेत्र में भी मदद करने का आश्वासन दिया था और इस बारे में भी कृषि मंत्रलय ने एक एजेंडा तैयार कर लिया है।
• भारत नेपाल को आर्गेनिक फार्मिग के केंद्र के तौर पर विकसित करने का प्रस्ताव भेज भी चुका है। सूत्रों का कहना है भारत की मदद से नेपाल में तैयार की जाने वाली परियोजनाओं को लेकर पिछले एक महीने के दौरान हुई प्रगति अविश्वसनीय है।
• भारत-नेपाल में पावर एक्सचेंज : ओली की यात्र के दौरान नेपाल की तरफ से प्रस्ताव आया था कि वह भारत के साथ मिलकर पावर-एक्सचेंज बनाना चाहता है और भारत ने इसके लिए संभावित विकल्प भी सुझा दिए हैं। भारत ने कहा है कि बटवाल-गोरखपुर के बीच बिछाई जाने वाली नई ग्रिड लाइन के साथ यह व्यवस्था की जा सकती है।
• इसका फायदा यह होगा कि मानसून में जब नेपाल में ज्यादा बिजली बनेगी तो उसकी आपूर्ति भारत को होगी और शेष महीनों में वह बिजली भारत से खरीद सकेगा। इसके लिए कोई वित्तीय लेन-देन नहीं होगा। पिछले ढाई वर्षो में भारत ने नेपाल के साथ तीन बिजली लाइन बिछाने की परियोजनाओं को स्वीकृति दी है।

6. कावेरी मामले में अदालत की अवमानना कर रही है सरकार: सुप्रीम कोर्ट
• सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि केंद्र सरकार कावेरी जल बंटवारे के मुद्दे पर उसके निर्देशों की साफ तौर पर अवमानना कर रही है। केंद्र सरकार ने अभी तक उसके निर्देशों के मुताबिक तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और पुडुचेरी के बीच जल बंटवारे की योजना तैयार नहीं की है।
• प्रधान न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्र, जस्टिस एएम खानविल्कर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने केंद्रीय जल संसाधन मंत्रलय के सचिव को निर्देश दिया कि चारों राज्यों में पानी के बंटवारे से संबंधित उसके फैसले को लागू करने के लिए वह 14 मई को कावेरी प्रबंधन योजना के मसौदे के साथ व्यक्तिगत रूप से पेश हों।
• शीर्ष अदालत ने फरवरी में केंद्र सरकार को यह योजना तैयार करने का निर्देश दिया था ताकि दशकों पुराने कावेरी जल विवाद पर उसके फैसले को लागू किया जा सके। पीठ ने साफ शब्दों में कहा कि जब इस मुद्दे पर फैसला सुनाया जा चुका है तो उसे लागू होना ही चाहिए। वे इस घटनाक्रम से कतई खुश नहीं हैं।
• अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि कर्नाटक विधानसभा चुनावों की वजह से केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक नहीं हो पाई है इसीलिए केंद्र सरकार समय की मांग कर रही है। इस पर तमिलनाडु की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर नफाडे ने कहा, ‘अवमानना का यह बिल्कुल सही मामला है। किसी न किसी को तो जेल भेजा ही जाना चाहिए।’
• मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (सीडब्लूडीटी) के 2007 के फैसले में संशोधन करते हुए साफ कर दिया था कि वह किसी भी आधार पर अब और समय नहीं बढ़ाएगा।
• शीर्ष अदालत ने 16 फरवरी को कर्नाटक के लिए कावेरी जल का हिस्सा 14.75 टीएमसी फीट बढ़ा दिया था जबकि तमिलनाडु के हिस्से में कमी कर दी थी। हालांकि, इसकी क्षतिपूर्ति करते हुए तमिलनाडु को नदी घाटी से 10 टीएमसी फीट भूजल निकालने की अनुमति प्रदान कर दी थी।

Source of the News (With Regards):- compile by Dr Sanjan,Dainik Jagran(Rashtriya Sanskaran),Dainik Bhaskar(Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara(Rashtriya Sanskaran) Hindustan dainik(Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times(Hindi& English)

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