दैनिक समसामयिकी 19 March 2018(Monday)

1.व्यापार युद्ध में भारत की स्थिति मजबूत नहीं
• अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते विवाद के कारण नियंतण्र व्यापार युद्ध की संभावना प्रबल होती जा रही है। लेकिन इस युद्ध में भारत की स्थिति मजबूत नहीं होगी क्योंकि यहां आयातित अधिकतर वस्तुएं जरूरतों को पूरा करने वाली हैं।
• उद्योग संगठन एसोचैम के मुताबिक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा स्टील और अल्युमिनियम पर आयात शुल्क लगाने और अन्य उत्पादों पर भी आयात शुल्क लगाने की चेतावनी देने का चीन, यूरोप और जापान ने कड़ा विरोध किया है।
• जहां तक इस विवाद में भारत की स्थिति की बात है तो हम चाहें भी तो बिना तकलीफ में आए इसका विरोध नहीं कर सकते क्योंकि यहां आयातित वस्तुएं जीवन के लिए जरूरी हैं।
• भारत का आयात निर्यात से कहीं अधिक है लेकिन इसके बावजूद वह नियंतण्र व्यापार युद्ध में मजबूत स्थिति में नहीं है। आयात अधिक होने के बावजूद हम इसकी धमकी नहीं दे सकते हैं और इसका प्रभाव हमारे निर्यात पर पड़ेगा।
• देश का वार्षिक व्यापार घाटा लगभग 150 अरब डालर का है । चालू वित्त वर्ष में आयातित वस्तुओं का बिल 450 अरब डालर के पार जा सकता है जबकि निर्यात लगभग 300 अरब डालर का है।

2. भारत दुनिया में हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार
• भारत दुनिया में हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार है। पिछले पांच साल के दौरान हथियारों की नियंतण्र खरीद में भारत का हिस्सा 12 फीसद है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) ने इन आंकड़ों के साथ कहा है कि भारत हथियारों की अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए उत्पादन करने में खुद सक्षम नहीं है।
• इस सप्ताह जारी सिपरी की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का आयात 2008-12 की पांच साल की अवधि की तुलना में पिछले पांच साल 2013-17 के दौरान 24 फीसद बढ़ा है। सिपरी के वरिष्ठ शोधकर्ता सिमोन वीजीमैन ने लिखा है, ‘‘एक तरफ पाकिस्तान और दूसरी तरफ चीन के साथ तनावों में रहने के कारण भारत में प्रमुख हथियारों की मांग बढ़ गई है, जिसका वह खुद उत्पादन करने में सक्षम नहीं है।’
• उन्होंने कहा कि इसके उलट चीन हथियारों की अपनी की जरूरतों को पूरा करने में खुद सक्षम है। सिपरी के आंकड़ों के मुताबिक भारत का कुल रुझान-संकेतक मूल्य (टीआईवी) 2008-12 के दौरान 14,608 था जो 2013-17 में बढ़कर 18,048 हो गया। भारत द्वारा हथियार खरीद हालांकि कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के अंतिम तीन साल की तुलना में भाजपा सरकार के पिछले तीन साल के दौरान कम हुई है।
• मनमोहन सिंह जब 2011-13 के दौरान प्रधानमंत्री थे, तब भारत ने 13,319 टीआईवी मूल्य के हथियारों का आयात किया था, लेकिन 2015-17 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंतर्गत केवल 9,499 टीआईवी मूल्य के हथियार खरीदे गए। 2014 के दौरान जब दोनों नेता सत्ता में थे, उस वक्त 3,227 टीआईवी मूल्य के हथियार खरीदे गए थे।
• भारत की परस्पर तुलना में पाकिस्तान का हथियार आयात पिछले पांच साल के दौरान लगातार घटा है। पिछले पांच साल की तुलना में पाकिस्तान का अमेरिका से आयात लगातार कम हुआ है जबकि चीन से उसकी आपूत्तर्ि में वृद्धि हुई है।
• रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘भारत के साथ जारी तनाव और चल रहे आंतरिक संघर्ष के बावजूद पाकिस्तान का हथियार आयात 2008-12 के मुकाबले 2013-17 में 36 फीसद घटा है। 2013-17 में नियंतण्र हथियार आयात में पाकिस्तान का हिस्सा 2.8 फीसद है।’
• अध्ययन में कहा गया है कि अमेरिका से पाकिस्तान का हथियार आयात 2008-12 के मुकाबले हाल के पांच वर्षो में 76 फीसद घटा है। सिपरी ने कहा, पाकिस्तान का 2013-17 में हथियारों का मुख्य स्रेत चीन रहा। साथ ही बांग्लादेश में भी चीन के हथियारों का आयात बड़े पैमाने पर हुआ। अमेरिका से भारत का आयात 2008-12 के दौरान 2.7 फीसद था, जो बढ़कर हाल के पांच वर्षो में 15 फीसद हो गया।
• आयात में 557 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई। भारत ने अमेरिका से आयात में उज्बेकिस्तान, ब्रिटेन और इस्रइल को पीछे कर दिया है।

3. चीन में ली केकियांग दोबारा पीएम निर्वाचित
• चीन की संसद ने रविवार को प्रधानमंत्री ली केकियांग को एक बार फिर देश का प्रधानमंत्री चुना। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बाद ली दूसरे सर्वोच्च नेता हैं। शी जिनपिंग ने ही ली केकियांग को इस पद के लिए दोबारा नामांकित किया था। ली केकियांग 2013 में देश के प्रधानमंत्री बने थे।
• वह चीन की कैबिनेट की स्टेट काउंसिल के प्रमुख हैं। नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की वार्षिक बैठक के दौरान सरकार में बड़े फेरबदल का ऐलान किया गया। ली के अलावा कांग्रेस ने शू किलियांग और झांग यूशिया को केंद्रीय सैन्य आयोग का उपाध्यक्ष चुना है।
• भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए नवगठित सरकारी संस्था राष्ट्रीय पर्यवेक्षण आयोग के प्रमुख के तौर पर यांग शियाडू को नियुक्त किया गया।
• इस संस्था का गठन कम्युनिस्ट पार्टी की सेंट्रल कमिशन फॉर डिस्पिलिन इंस्पेक्शन और सरकार की विभिन्न भ्रष्टाचार रोधी इकाइयों के विलय से किया गया है।

4. पारगमन प्रोटोकॉल पर भारत, बांग्लादेश के बीच बैठक होगी
• पूर्वोत्तर राज्यों के साथ राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (एनडब्ल्यू-1) को जोड़ने के प्रयास के तहत भारत और बांग्लादेश के बीच अगले महीने अंतर्देशीय जल पारगमन एवं व्यापार प्रोटोकॉल (पीआईडब्ल्यूटीटी) को लेकर प्रस्तावित एक उच्चस्तरीय बैठक होने की संभावना है।
• दोनों देशों ने पड़ोसी देशों के बीच अंतर्देशीय जल पारगमन प्रोटोकॉल मार्ग में सुधार करने के लिए एक प्रक्रिया शुरू की है, ताकि पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़ने के लिए भारत गंगा नदी पर (वाराणसी से हल्दिया) राष्ट्रीय जलमार्ग-1 से जुड़ सके।
• दोनों देश अंतर्देशीय जल पारगमन एवं व्यापार प्रोटोकॉल के विस्तार पर सहमत हो गए हैं, जिस पर 1972 में हस्ताक्षर हुआ था और पीआईडब्ल्यूटीटी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के प्रभावी होते ही इस मार्ग का इस्तेमाल करने वाले व्यापार में वृद्धि देखने को मिलेगा।
• भारत अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) के उपाध्यक्ष प्रवीर पांडे ने कहा, ‘‘अगले महीने एक बैठक होने की संभावना है। इसमें कोई बाधा नहीं है। मानक संचालन प्रक्रिया तय होनी है और बैठक इसे पूरा करने की कोशिश करेगा।’ इस मार्ग के खुलने से हल्दिया से बांग्लादेश के लिए व्यापार करना आसान हो जाएगा।
• आईडब्ल्यूएआई के अधिकारियों के मुताबिक, प्रोटोकॉल मार्ग में ढाका की ओर से कोई समस्या नहीं है, बल्कि समस्या ब्रहमपुत्र नदी के हिस्से में है और इसके नौपरिवहन में सुधार के लिए निकर्षण (ड्रेजिंग) की आवश्यकता होगी।

5. भारत और चीन से “आपसी लाभकारी रिश्ते रखेगा नेपाल
• नेपाल की वाम गठबंधन सरकार भारत और चीन दोनों ही पड़ोसी देशों के साथ ‘आपसी फायदे’ वाले संबंध रखेगी, ताकि वह एशिया के इन दोनों देशों से आर्थिक लाभ उठा सके।
• शुक्रवार को नेपाल के नए विदेश मंत्री बने प्रदीप ज्ञवाली ने रविवार को यह बात कही। ज्ञवाली ने कहा कि उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस साल नेपाल की यात्रा करेंगे। इसलिए सरकार ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
• उन्होंने कहा, ‘बदले संदर्भ में हम दोनों देशों के साथ परस्पर लाभकारी संबंध रखना चाहते हैं। नेपाल को दोनों देशों से सहयोग की जरूरत है।’ उन्होंने कहा कि चीन के राष्ट्रपति 2016 में ही नेपाल की यात्रा करने वाले थे, लेकिन नेपाल में संभवत: जल्दी-जल्दी सरकारें बदलने की वजह से यह नहीं हो सका।
• प्रधानमंत्री केपी ओली की विदेश यात्रा के लिए भी नेपाल सरकार आवश्यक तैयारी कर रही है। हालांकि अभी यह निश्चित नहीं हुआ है कि ओली किस देश के साथ अपनी विदेश यात्रा की शुरुआत करेंगे।

6. एनआईएचएचएएनएस के सर्वेक्षण से हुआ खुलासा : उच्च जोखिम में पाए गए वयस्क
• देश में 0.9 प्रतिशत वयस्कों में आत्महत्या की कोशिश वाली मनोवृत्ति हावी है। इतने लोग आत्महत्या की उच्च जोखिम वाली श्रेणी में भी आते हैं। इनमें अशिक्षित के अलावा पढ़े लिखे वयस्क भी शामिल है। गैर शिक्षित वयस्कों को प्रौढ़ शिक्षा के जरिए तो शिक्षित वयस्कों को काउंसिलिंग के माध्यम से अवसाद के गिरफ्त में निकालने के लिए केंद्रीय स्वास्य मंत्रालय गंभीरता से काम कर रहा है।
• नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेस (एनआईएचएचएएनएस) के सर्वेक्षण के जरिये यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में वयस्कों में सामान्य मानिसक विकार, गंभीर मानसिक विकार, शराब और अन्य नशीले पदार्थों का उपयोग से संबंधित विकारों (तंबाकू के उपयोग के विकार को छोड़कर) का 12 राज्यों में प्रसार लगभग है 10.6 प्रतिशत पाया गया है। सर्वेक्षण से एक और खुलासा हुआ है।
• पता चला है कि 40 में से एक व्यक्ति जहां पुराने अवसाद से पीड़ित है। वहीं 20 में से एक व्यक्ति पिछले और वर्तमान अवसाद से प्रभावित है।निमहंस के राष्ट्रीय मानसिक स्वास्य सर्वेक्षण कार्यक्रम के दौरान स्वास्य राज्य मंत्री अनूप्रिया पटेल ने सर्वेक्षण के परिणाम को साझा करते हुए गहरी चिंता जताई है।
• ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी महानगरीय क्षेत्रों में मानिसक विकृति का प्रसार अधिक है। मनोवैज्ञानिक विकार के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। वहीं गैर-संचारी विकार और मानिसक विकार के बीच निकटवर्ती संबंधों का भी खुलासा हुआ है। प्रमुख अवसादग्रस्त विकारों से प्रभावित होकर आधे से अधिक आबादी दैनिक गतिविधियों को अंजाम देने में कठिनाई महसूस करती है।
• स्थिति में होगा सुधार : स्वास्य सचिव प्रीति सुदन ने कहा, केंद्र सरकार ने मानिसक स्वास्य सेवाएं प्रदान करने के लिए देश के 517 जिलों में राष्ट्रीय मानिसक स्वास्य कार्यक्रम (एनएमएचपी) के तहत जिला मानिसक स्वास्य कार्यक्रम (डीएचएमपी) चलाया जा रहा है। इसके तहत ऐसे राज्यों को शामिल किया गया है जहां पर अशिक्षित युवाओं की संख्या ज्यादा है।
• वयस्कों के लिए प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम के तहत स्वरोजगार और जीवन खुशहाल रखने संबंधी टिप्स दे रहे हैं। इनमें उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिसा, मध्यप्रदेश, झारखंड, पंजाब, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर के कुछ जिलों को शामिल किया गया है।

7. बरगी में भी ब्रहमोस मिसाइल बनाने की तैयारी, बड़ा सामरिक केंद्र होगा जबलपुर
• ब्रहमोस मिसाइल का निर्माण मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले की बरगी तहसील में भी करने की तैयारी है। ब्रहमोस प्रबंधन के आला तकनीकी दल और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने मार्च महीने में बरगी के ग्राम तिनसा तिनसी के पास भूमि का सर्वे किया है।
• सूत्रों के मुताबिक प्रशासनिक अमले ने प्रोजेक्ट के लिए 100 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की है। आने वाले समय में यह क्षेत्र ब्रहमोस मिसाइल का निर्माण करने वाला बड़ा सामरिक केंद्र बन जाएगा। 1सूत्रों के मुताबिक 100 हेक्टेयर इलाके में ब्रहमोस मिसाइल निर्माण की आधुनिक फैक्टरी के अलावा लगभग 20 हजार से ज्यादा कर्मचारी-अधिकारियों की तैनाती होगी।
• इनमें रिसर्च करने वालों से लेकर निर्माण से जुड़े श्रमिक, अधिकारी, इंजीनियर्स व मैदानी अमला शामिल होगा। सूत्रों का कहना है कि दिल्ली से ब्रहमोस प्रबंधन ने शासन को प्रोजेक्ट में मदद करने के लिए अलग से प्रशासनिक अफसरों को तैनात करने पत्र लिखा है, क्योंकि प्रोजेक्ट से जुड़े निर्माण कार्यो में कई साल तक अफसरों की मदद ली जाएगी।
• बिजली, पानी, सड़क निर्माण से जुड़े कार्य सीधे तौर पर आर्मी के कोर एरिया में ही पूरे किए जाएंगे। इसके भीतर जाने की अनुमति किसी को नहीं मिलेगी।4डुमना एयरपोर्ट का विस्तार किया जा रहा है, जिससे साल 2020 तक बड़े यात्री व मालवाहक विमानों की आवाजाही होने लगेगी। एयरपोर्ट के रनवे का उपयोग आर्मी कर सकेगी।
• जबलपुर में सीओडी यानी सेंट्रल ऑर्डनेंस डिपो में भंडारण की सुविधा भी है, जिससे देश के किसी भी कोने में मिसाइल को भेजा जा सकता है। सीओडी के अलावा बोफोर्स निर्माण केंद्र, आर्मी के वाहनों सहित सैन्य शक्ति से जुड़े विभिन्न तरह के विस्फोटकों का निर्माण आयुध निर्माणियों में किया जा रहा है।

8. बड़ी हों या छोटी घूमती हैं सभी गैलेक्सियां
• सभी गैलेक्सियां घूमती हैं। चाहे उनका आकार जितना भी बड़ा क्यों न हो। अरबों वर्षो में अपना एक चक्कर जरूर पूरा करती हैं। एक अध्ययन के बाद खगोलविद इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं।
• हम सब जानते हैं कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमते हुए एक दिन में एक चक्कर पूरा करती है। इससे दिन और रात होते हैं। वहीं, सूर्य की परिक्रमा करते हुए अपना चक्कर एक वर्ष में पूरा करती है। यही इस अध्ययन का आधार है। इसमें बताया गया है कि गैलेक्सी तभी बनी रह सकती है, जब उसके सभी तारे उससे जुड़े रहें। यह तभी संभव है जब वे घूम रही हो।
• ऑस्ट्रेलिया में इंटरनेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोनॉमी रिसर्च (आइसीआरएआर) के गेरहार्ट मेउरेर के मुताबिक, यह स्विस घड़ी की तरह निश्चित नहीं है। लेकिन एक चीज तय है कि गैलेक्सी चाहे बहुत बड़ी हो या बहुत छोटी, वह डिस्क के सबसे बाहरी किराने पर तभी टिकी रह सकती है, जब वो घूम रही हो।
• हालांकि यह भी संभव है कि उसे पूरा चक्कर लगाने में अरबों साल लग जाएं। गणित के सरल नियमों के जरिए समझा जा सकता है कि समान आकार की गैलेक्सियों का औसत आंतरिक घनत्व भी समान होता है।
• मेउरेर के मुताबिक, गैलेक्सियों में इस तरह की नियमितता की खोज से हमें उस मैकेनिक्स को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल सकती है जो उन्हें घुमाते हैं। आप एक अधिक घनत्व वाली गैलेक्सी को उतनी तेजी से घूमते हुए नहीं देख सकते, जितनी तेजी से उसी आकार की लेकिन कम घनत्व वाली गैलेक्सी घूमती है।
• इससे पहले भी शोधकर्ताओं को ऐसे सुबूत मिल चुके हैं, जो बताते हैं कि गैलेक्सियों के किराने पर पुराने तारे मौजूद हैं। ये तभी गैलेक्सी में रह सकते हैं, जब ये घूम रहे हों।

Source of the News (With Regards):- compile by Dr Sanjan,Dainik Jagran(Rashtriya Sanskaran),Dainik Bhaskar(Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara(Rashtriya Sanskaran) Hindustan dainik(Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times(Hindi& English)

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