दैनिक समसामयिकी 16 January 2018(Tuesday)

1.रिश्ते में बदली दोस्ती : इस्रइल से साइबर सुरक्षा, पेट्रोलियम, मेडिकल, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी समेत हुए 9 समझौते
• भारत और इस्रइल ने 25 साल पुराने अपने राजनयिक संबंधों को दोनों देशों की जनता के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ाने के नए संकल्प के साथ परस्पर सहयोग के नौ करारों पर हस्ताक्षर किए। इनमें साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, हवाई यातायात से लेकर होम्योपैथिक उपचार और नवीकरणीय ऊर्जा के भंडारण के क्षेत्र में सहयोग के समझौते शामिल हैं।
• प्रमुख कैबिनेट सहयोगी थे मौजूद : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इस्रइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच यहां हैदराबाद हाउस में हुई द्विपक्षीय शिखर बैठक में ये फैसले लिये गए।
• बैठक में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश सचिव एस. जयशंकर, विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) विजय गोखले, भारत में इस्रइल के राजदूत डेनियल कारमेन उपस्थित थे।
• संबंधों को आगे बढ़ाने का हुआ फैसला : बैठक के बाद साझा संवाददाता सम्मेलन में मोदी ने हिब्रू भाषा में नेतन्याहू का स्वागत किया। उन्होंने कहा, मेरे प्रिय मित्र, आपका भारत में स्वागत है। आपकी यात्रा के साथ हमारे नववर्ष के कैलेंडर में विशेष पर्व शुरू हो गए है। मकर संक्रांति, पोंगल, बीहू आदि।
• दोनों देशों ने अपने संबंधों में प्रगति की समीक्षा की है और उन्हें आगे ले जाने वाले अवसरों के सहारे आगे बढ़ाने का निश्चय किया। उन्होंने कहा, हमने अपने पुराने फैसलों के क्रियान्वयन को लेकर उत्सुकता भी साझा की। इसके परिणाम जमीन पर दिखाई देने लगे हैं।इस्रइली लोगों के स्नेह ने किया अभिभूत : उन्होंने कहा कि आज की बातचीत में संबंधों को मजबूत बनाने और साझेदारी को व्यापक बनाने पर सहमति कायम हुई।
• मोदी ने कहा, गत वर्ष जुलाई में मैं सवा अरब भारतीयों की मित्रता के संदेश को लेकर इस्रइल की यादगार यात्रा पर गया था। बदले में मुझे मेरे मित्र बीबी (बेंजामिन नेतन्याहू) के नेतृत्व में इस्रइली लोगों के स्नेह एवं प्यार ने अभिभूत कर दिया।
• सहयोग के मौजूदा स्तंभों को करेंगे मजबूत : मोदी ने कहा कि हम हमारे लोगों के जीवन पर असर डालने वाले क्षेत्रों में सहयोग के मौजूदा स्तंभों -कृषि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा सुरक्षा को मजबूत करेंगे। हमने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को विस्तार देने के बारे में भी बात की है जो कृषि सहयोग के मुख्य कारक हैं। रक्षा क्षेत्र में हमने इस्रइली कंपनियों को भारतीय कंपनियों में विदेशी निवेश की नीति का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया है।
• वैचारिक-शैक्षिक आदान-प्रदान बढ़ाएंगे : मोदी ने दोनों देशों की प्रतिभाओं के बीच परस्पर वैचारिक एवं शैक्षणिक आदान प्रदान को बढ़ाने का संकल्प लेते हुए कहा कि हमने निर्णय लिया है कि हर साल दोनों देश विज्ञान की विभिन्न विधाओं में शिक्षा हासिल कर रहे सौ युवा विद्यार्थियों की एक दूसरे के यहां यात्राएं शुरू की जाएंगी।
• इस्रइलियों को उत्साहित किया : नेतन्याहू ने कहा कि मोदी की इस्रइल यात्रा ने सभी इस्रइलियों को उत्साहित किया। बहुत से इस्रइली भारतीय मूल के हैं। इसलिए यह एक ऐतिहासिक घटना थी। उन्होंने आतंकवाद को दोनों देशों के लिए समान पीड़ादायक बताते हुए कहा कि उन्हें मुंबई के भयावह हमलों की याद है।
• नेतन्याहू ने भी अपने भावपूर्ण वक्तव्य में मोदी को ‘‘क्रांतिकारी नेता’ बताया और कहा कि वह भारत में क्रांति लाए हैं और भविष्य का खाका भी तय कर रहे हैं।
• मोदी की इस्रइल यात्रा सचमुच क्रांतिकारी थी क्योंकि वह पहले भारतीय नेता हैं जिन्होंने इस्रइल की यात्रा की। भारतीय समाज के साथ 3000 साल पुराने संबंधों में यहूदी समुदाय ने कभी भी भेदभाव अनुभव नहीं किया जैसा अन्य देशों में होता है। यह भारत की महान सभ्यता, सहिष्णुता एवं लोकतंत्र का सदाशयता का परिणाम है।

2. कारोबार की राह को आसान बनाएगा भारत
• भारत ने सोमवार को इस्रइली कंपनियों को यहां व्यापार करने के लिए उनकीं चिंताओं को दूर करने तथा उनके लिए चीजों को आसान बनाने का आश्वासन दिया।औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग के सचिव रमेश अभिषेक ने कहा कि प्रक्रियाओं, आयात शुल्क, कर तथा लाइसेंस को लेकर कुछ मुद्दे हैं जिससे इस्रइली कंपनियां परेशान हो रही हैं।
• सीआईआई द्वारा आयोजित भारत-इस्रइल व्यापार नवप्रवर्तन मंच की बैठक में उन्होंने कहा, ‘‘मैं इसाइली कंपनियों के यहां व्यापार करने को लेकर आपको सभी समस्याओं के समाधान तथा चीजों को आसान और बेहतर बनाने का आश्वासन देता हूं।’सचिव ने कहा कि मुद्दों को संबंधित मंत्रालयों और विभागों के समक्ष रखा गया है।
• उन्होंने कहा, ‘‘हम पिछले कुछ महीनों में कुछ चीजें कर पाने में सफल रहे हैं और कई पर प्रगति हो रही हैं।’ इस्रइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भारत यात्रा पर आए हुए हैं। उनकी अगुवाई में इस्रइल का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल यहां आया हुआ है जिसमें 102 इस्रइली कंपनियों के 130 उद्योगपति एवं शीर्ष कार्यकारी शामिल हैं।
• भारत में अप्रैल 2000 से सितम्बर 2017 के दौरान 13 करोड़ डालर एफडीआई आया। इस्रइल के अर्थव्यवस्था मंत्रालय के व्यापार आयुक्त ओहाद कोहेन ने उम्मीद जताई कि पीएम की यात्रा से दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते का रास्ता आसान होगा।

3. सीजेआइ ने बनाई संविधान पीठ, चारों वरिष्ठ जज शामिल नहीं
• प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) जस्टिस दीपक मिश्र और चार वरिष्ठ न्यायाधीशों के बीच हालिया तनाव के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय संविधान पीठ के गठन की घोषणा कर दी। खास बात यह है कि इसमें चारों वरिष्ठ न्यायाधीशों (जस्टिस जे. चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एमबी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ) में से किसी को भी शामिल नहीं किया गया है।
• आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ में सीजेआइ जस्टिस दीपक मिश्र, जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस एएम खानविल्कर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण शामिल हैं। यह पीठ 17 जनवरी से महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई करेगी। बताते चलें कि इन्हीं जजों की संविधान पीठ आधार कानून की संवैधानिकता पर सुनवाई के लिए पहले ही गठित हो चुकी थी। इसी पीठ ने 15 दिसंबर को आधार मामले में अंतरिम राहत पर आदेश पारित किया था।
• उसी तारीख को सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश भी पारित किया था कि 17 जनवरी से आधार मामले को नियमित सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।
• नए घटनाक्रम में खास बात यह है कि बाकी सात अन्य महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई भी यही पीठ करेगी। उनमें वयस्कों के बीच आपसी सहमति से समलैंगिक संबंध बनाने को अपराध मानने के 2013 के फैसले पर पुनर्विचार और केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष आयु की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध का मामला शामिल है।
• साथ ही पीठ पारसी महिला के अन्य धर्म के पुरुष से शादी करने बाद धार्मिक पहचान खोने अथवा नहीं खोने के मसले पर भी विचार करेगी। एक अन्य मसला विवाहेतर संबंधों में सिर्फ पुरुषों को ही सजा के प्रावधान का है। साथ ही पीठ को उन याचिकाओं पर भी सुनवाई करनी है जिसमें सवाल उठाया गया है कि आपराधिक मामलों का सामना कर रहे सांसद या विधायक कब अयोग्य माने जाएंगे।

4. समर्थन मूल्य पर उपज खरीद की गारंटी देगी सरकार

• विकास की दौड़ में पिछड़ गए कृषि क्षेत्र को रफ्तार देने के लिए सरकार ने कमर कसना शुरू कर दिया है। इसके लिए आगामी वित्त वर्ष 2018-19 के आम बजट में विशेष प्रावधान किए जाने की संभावना है। इस दिशा में कृषि मंत्रलय में तेजी से काम चल रहा है।
• किसानों की सबसे बड़ी चुनौती उसकी उपज की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद को लेकर सरकार गंभीर है, जिसके लिए आगामी आम बजट में कुछ कारगर पहल होने की संभावना है। इसके तहत गेहूं व चावल को छोड़कर बाकी अन्य फसलों की खरीद की गारंटी देने की योजना है।
• आम बजट में फसलों की खरीद को लेकर कई प्रावधान किए जाने की संभावना है। योजना के तहत राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को गेहूं व चावल की छोड़कर सभी फसलों की न्यूनतम गारंटी देनी होगी। इस बावत आम बजट में प्रावधान किए जाने की संभावना है।
• दरअसल, सरकार दो दर्जन से अधिक फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित करती है। लेकिन गेहूं व चावल को छोड़ बाकी फसलों की खरीद आमतौर पर नहीं होती है। कुछ राज्यों में चुनिंदा फसलों की छिटपुट खरीद कर ली जाती है। हालांकि गेहूं व चावल की खरीद की शत प्रतिशत गारंटी नहीं होती है।
• गेहूं व चावल की सरकारी खरीद पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश में ज्यादा की जाती है। बाकी राज्यों में थोड़ी बहुत खरीद होती है। इनके अलावा ढेर सारी फसलें होती हैं, जो किसानों की आमदनी को प्रभावित करती हैं। इसे लेकर किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं।
• कई फसलों की एमएसपी घोषित भी किया जाता है, लेकिन उनकी खरीद नहीं होती है। इससे किसानों को घाटा उठाना पड़ता है। किसानों की यह मांग लंबे समय से होती आ रही है कि उनकी उपज की खरीद की गारंटी होनी चाहिए।
• कृषि मंत्रलय ने आम बजट के लिए इस आशय का एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें जिंस बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद किसानों को नुकसान से बचाने की रणनीति तैयार की गई है। इसके मुताबिक राज्यों को इन फसलों के मूल्य कम होने की दशा में उपज की खरीद का पूरा हक होगा, जिसके लिए केंद्र भरपाई की गारंटी देगा। किसानों को बाजार मूल्य में उतार-चढ़ाव के जोखिम से बचाने की रणनीति तैयार की गई है।
• योजना का उद्देश्य खरीद लागत, भंडारण, विक्रय लागत, पूंजी पर ब्याज और अन्य आकस्मिक खर्च को कवर करते हुए खरीद और विक्रय मूल्य के अंतर में अगर घाटा हुआ तो केंद्र सरकार भरपाई करेगी। यह विशेष प्रावधान मध्य प्रदेश सरकार की शुरू की गई भावांतर योजना से मिलती-जुलती होगी।
• घाटे के इस अंतर का 40 से 50 फीसद केंद्र सरकार देगी, जबकि बाकी राज्य सरकारों को वहन करना होगा। खरीदी जाने वाली जिंसों की बिक्री का पूरा दायित्व राज्य सरकारों का होगा।

5. विनिवेश से सरकार ने जुटाई रिकॉर्ड धनराशि
• चालू वित्त वर्ष में विनिवेश से रिकॉर्ड धनराशि प्राप्त करने के बाद सरकार अगले वित्त वर्ष में इससे भी बड़ा लक्ष्य रख सकती है। माना जा रहा है कि वित्त मंत्री आम बजट 2018-19 में विनिवेश के जरिये लगभग एक लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रख सकते हैं।
• सूत्रों के मुताबिक आम बजट में विनिवेश का लक्ष्य बढ़ना तय माना जा रहा है। इसकी वजह दरअसल यह है कि चालू वित्त वर्ष में जिस तरह केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों में हिस्सेदारी बेचकर सरकार ने जो धनराशि जुटाई है उससे यह स्पष्ट है कि अगले साल भी खजाना भरने के लिए यह बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
• इसके अलावा जीएसटी के क्रियान्वयन के बाद राजस्व संग्रह में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है इसलिए विनिवेश से ही खजाने को भरा जा सकता है।
• उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2017-18 में सरकार ने विनिवेश से 72,500 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था जिसमें से 11 जनवरी 2018 तक 54,337 करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं। यह पहली बार है जब सरकार ने विनिवेश के जरिये इतनी बड़ी रकम जुटाई है। यह एक रिकॉर्ड है।
• खास बात यह है कि सरकार ने सार्वजनिक उपक्रमों में रणनीतिक हिस्सेदारी बेचकर भी अच्छी खासी रकम जुटाई है। साथ बीमा कंपनियों को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराकर भी धनराशि प्राप्त की गयी है। 1सूत्रों ने कहा कि वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ बजट पूर्व चर्चा के दौरान अर्थशास्त्रियों ने भी आम बजट 2018-19 में विनिवेश से धनराशि जुटाने का लक्ष्य बढ़ाने का सुझाव दिया है।
• ऐसे में इस बात के पूरे आसार हैं कि विनिवेश का लक्ष्य अच्छा-खासा बढ़ाया जाएगा।1उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार ने विनिवेश प्रक्रिया को तेज करते हुए नीति आयोग को उन सार्वजनिक उपक्रमों की पहचान करने का जिम्मा सौंपा था जिनका विनिवेश किया जाना है। साथ ही सार्वजनिक उपक्रमों में रणनीतिक तौर पर हिस्सेदारी बेचने के लिए भी नीति आयोग ने सूची तैयार की थी।

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