इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड योजना

भारतीय राजनीति में कालेधन पर रोक, भ्रष्‍टाचार पर लगाम लगाने एवं चुनावी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने इलेक्‍टोरल बांड स्‍कीम की अधिसूचना जारी की है। भारत पहला देश होगा जो चुनावी फंडिंग पारदर्शी बनाने के लिए इस तरह का बॉन्‍ड जारी करने जा रहा है।अब इलेक्टोरल बांड के जारी होने के साथ, चंदा देने वाले दाता, विशिष्ट स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के शाखाओं से इलेक्टोरल बॉन्ड खरीद सकते हैं, और राजनीतिक दल उसे प्राप्त करने के बाद एक नामित बैंक खाते के माध्यम से इस बांड को नकदी में बदल सकते हैं।

योजना से जुड़े प्रमुख तथ्य:

  • वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आम बजट 2017-18 के भाषण में इलेक्टोरल बॉन्‍ड लाने की घोषणा की थी।
  • पिछले लोकसभा चुनाव या विधानसभा चुनाव में 1% से अधिक वोट पाने वाले पंजीकृत राजनीतिक दल ही इलेक्टोरल बॉन्‍ड से फंडिंग ले सकेंगे।
  • भारतीय स्टेट बैंक की चुनिंदा शाखाओं से ये बांड खरीदे जा सकते हैं।
  • इलेक्टोरल बॉन्ड एक प्रोमिसरी नोट (पी नोट्स) और एक ब्याज-मुक्त बैंकिंग उपकरण की प्रकृति में वाहक साधन होगा।
  • कोई भी भारतीय नागरिक या भारत में स्थापित संस्था इसे खरीदने के हकदार होगा।
  • बांड 1 हजार, 10 हजार, 1 लाख, 10 लाख और एक करोड़ रुपये कीमत के होंगे।
  • इलेक्टोरल बॉण्ड के खरीददार को सभी केवाईसी नियमों को पूरा करना होगा।
  • इलेक्टोरल बॉन्ड पर लेनदार या खरीददार का नाम नहीं होगा।
  • इलेक्टोरल बॉन्ड सिर्फ 15 दिन के लिए वैध होगा, जिसके दौरान इसे राजनीतिक दलों को दान करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • केवल वे राजनीतिक दल इलेक्टोरल बॉन्ड प्राप्त करने के पात्र होंगे जो आरपीए अधिनियम (Representation of the Peoples Act), 1951 की धारा 29-ए के तहत पंजीकृत हैं, और पिछले आम चुनाव या विधान सभा के मतदान में कम से कम 1% वोटों को हासिल कर पाए हों।
  • इलेक्टोरल बॉण्ड योजना जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर के महीनों में 10 दिनों की अवधि के लिए खरीदने के लिए उपलब्ध होगी।
  • बांड का कागजी स्वरूप खास सुरक्षा चिह्न के साथ जारी होगा, ताकि उसका कोई दुरुपयोग नहीं कर सके। बांड पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा।

क्‍या है इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड ?

केन्द्र सरकार द्वारा बजट में दी गई जानकारी से पता चलता है कि प्रस्तावित इलेक्टोरल बॉन्ड का इस्तेमाल देश में पॉलिटिकल फंडिग के लिए किया जाएगा। दाता इस बांड को डिजीटल या चेक के माध्यम से भुगतान करके खरीद सकता है फिर, जो राजनीतिक दल जिसके लिए दाता ने दान किया है, इन बांडों को अपने बैंक खातों के माध्यम से नकद में वापस ले सकते हैं।

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