दैनिक समसामयिकी 03 January 2018

1.चंदे में राजनीतिक दलों को दिए जा सकेंगे चुनावी बांड
• केंद्र सरकार ने राजनीतिक दलों के लिए 1,000 रुपये, 10,000 रुपये, एक लाख रुपये, 10 लाख रुपये और एक करोड़ रुपये के मूल्य में चुनावी बांड जारी करने की घोषणा कर दी है। इसे राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया माना जा रहा है।
• सरकार ने वित्त वर्ष 2017-18 के बजट के दौरान अरुण जेटली के चुनावी बांड शुरू करने की घोषणा को अमली जामा पहनाया है। लोकसभा में इसकी जानकारी देते हुए वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि चुनावी बांड को अंतिम रूप दे दिया गया है और इस व्यवस्था के आरंभ होने से देश में राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे की पूरी प्रक्रि या में काफी हद तक पारदर्शिता आएगी।
• जेटली ने कहा कि राजनीतिक दलों को चंदे के लिए ब्याज मुक्त बांड भारतीय स्टेट बैंक से जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर महीने में खरीदे जा सकते हैं। चुनावी बांड 1,000 रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये के मूल्य में उपलब्ध होंगे।
• उन्होंने राजनीति दलों को चंदे के लिए चुनावी बांड की व्यवस्था को अंतिम रूप दिए जाने की जानकारी दी। जेटली ने सदन में कहा कि हमने आम बजट के दौरान चुनावी बांड शुरू करने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा कि राजनीति दलों को चंदा देने वाले लोग भारतीय स्टेट बैंक की कुछ तय शाखाओं से चुनावी बांड खरीद सकेंगे और इन चुनावी बांड की मियाद 15 दिनों की होगी।
• इस मियाद के भीतर पंजीकृत राजनीतिक दलों को चंदे के तौर पर बांड देने होंगे। चुनावी बांड पर देने वाले का नाम नहीं होगा, इसे केवल अधिकृत बैंक खाते के जरिए 15 दिन के भीतर भुनाया जा सकेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि ये चुनावी बांड उन्हीं पंजीकृत राजनीतिक दलों को दिए जा सकेंगे जिनको पिछले चुनाव में कम से कम एक फीसदी वोट मिला हो।
• राजनीतिक दल इन चुनावी बांड को भुना सकेंगे। वर्तमान समय में राजनीतिक दलों में ज्यादातर चंदा नकदी में मिलता है और इसमें पारदर्शिता ना के बराबर होती है, लेकिन चुनावी बांड की व्यवस्था से काफी हद तक पारदर्शिता आएगी।
• लोकसभा के लिए जब आम चुनाव होंगे तो उस वर्ष इन बांड के लिए 30 दिन की अतिरिक्त अवधि दी जाएगी। देश को कोई भी नागरिक या निगमित इकाई इन बांड को खरीद सकेगी।
• बांड का पात्र राजनीतिक पार्टी द्वारा अधिकृत बैंक के खाते के माध्यम से नगदीकरण किया जा सकेगा। ग्राहक को केवाईसी मापदंडों को विधिवत रूप से पूरा करने और बैंक खाते से भुगतान करने पर ही इलेक्टोरल बॉड को खरीदने की अनुमति होगी।

2. विनिर्माण क्षेत्र ने भरी उड़ान मजबूत प्रदर्शन
• सालभर परेशानियों के दौर से जूझने वाले भारत के विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र के लिए 2017 का अंतिम महीना शानदार वृद्धि लाने वाला रहा। दिसम्बर में परिचालन स्थितियां बेहतर रहने से यह पांच महीने के उच्च स्तर पर रहा। इसकी अहम वजह कंपनियों के नए आर्डर में वृद्धि होना है।
• यह बात निक्की इंडिया के कंपनियों के परचेजिंग मैनेजरों के बीच कराए जाने वाले एक सर्वेक्षण (पीएमआई इंडेक्स) में सामने आई है। दिसम्बर में विनिर्माण पीएमआई इंडेक्स बढ़कर 54.7 रहा है जो नवम्बर में 52.6 था। इसमें उपभोक्ता, मध्यस्थ और निवेश तीनों श्रेणियों में वृद्धि दर्ज की गई है। यह लगातार पांचवां महीना है जब सूचकांक का स्तर 50 से ऊपर रहा है।
• पीएमआई का 50 से ऊपर विनिर्माण क्षेत्र में विस्तार को जबकि 50 से नीचे रहना संकुचन को दर्शाता है। आईएचएस मार्किट की अर्थशास्त्री और इस रपट की लेखिका आशना डोढिया ने कहा, कारोबार के बेहतर मजबूत प्रदर्शन की दो प्रमुख वजह दिसम्बर 2012 के बाद से अब तक उत्पादन में सबसे तेज विस्तार होना और अक्टूबर 2016 के बाद नए आर्डरों का सबसे ज्यादा बढ़ना है।
• आशना ने कहा कि विनिर्माण की स्थिति बेहतर होने का अहम कारण घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग का बढ़ना है। यह सिलसिला आगे भी जारी रहने की उम्मीद है।

3. इंटरकनेक्टिविटी पर नए नियम जारी
• दूरसंचार नियामक ट्राई ने नेटवर्क कनेक्टिविटी संबंधी नियमों को कड़ा करते हुए दूरसंचार कंपनियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया है कि वे बिना किसी भेदभाव के तीस दिन में इंटरकनेक्शन समझौते करें। किसी तरह के उल्लंघन पर हर सेवा क्षेत्र के हिसाब से एक लाख रपए तक का दैनिक जुर्माना तय किया है।
• देश भर में कुल 22 सेवा क्षेत्र हैं। इंटरकनेक्टिविटी से आशय एक कंपनी के नेटवर्क का काल दूसरे कंपनी के नेटवर्क से जुड़ने से है।
• ट्राई ने मंगलवार को दूरसंचार इंटरकनेक्शन विनियमन-2018 जारी किए। इसमें नेटवर्क कनेक्टिविटी समझौते के विविध नियमों को शामिल किया गया है।
• इसमें पाइंट आफ इंटरकनेक्ट की वृद्धि, प्रारंभिक स्तर पर इस तरह की कनेक्टिविटी के प्रावधान, लागू शुल्क, इंटरकनेक्ट वाले पाइंट को हटाना और इंटरकनेक्शन मुद्दों पर वित्तीय हतोत्साहन इत्यादि के नियम को शामिल किया गया है।
• नियम न मानने वाली कंपनियों पर लगेगा एक लाख तक का दंड

4. चीन का हाइपरसोनिक मिसाइल भारत, अमेरिका, जापान के लिए खतरा
• एक अखबार में आयी रिपोर्ट के अनुसार चीन के नए हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइलों से न केवल अमेरिका को चुनौती मिलेगी बल्कि वह जापान और भारत में सैन्य लक्ष्यों को ज्यादा सटीकता से भेदने में भी सक्षम होंगे।
• हांगकांग के अखबार ‘‘साउथ चाइना पोस्ट’ ने टोक्यो की पत्रिका द डिप्लोमैट में आई खबर के बाद यह रिपोर्ट दी। खबर में कहा गया कि चीन ने पिछले साल के आखिर में नये हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन या एचजीवी के दो परीक्षण किए। एचजीवी को डीएफ-17 के नाम से जाना जाता है।
• पत्रिका ने अमेरिकी खुफिया सूत्रों के हवाले से पिछले महीने खबर दी थी कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के रॉकेट फोर्स ने एक नवंबर को पहला और उसके दो हफ्ते बाद दूसरा परीक्षण किया।
• अमेरिका खुफिया सूत्रों के अनुसार दोनों परीक्षण सफल रहे और डीएफ-17 करीब 2020 तक काम करना शुरू कर सकता है। परीक्षणों के बारे में पूछे जाने पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने यह कहते हुए प्रतिक्रि या देने से मना कर दिया कि इस सूचना के लिए रक्षा मंत्रालय से संपर्क करना चाहिए।
• एचजीवी मानवरहित, रॉकेट से प्रक्षेपित होने वाला यान है जो बेहद तेज रफ्तार के साथ पृथ्वी के वातावरण से निकल जाता है।

5. दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता संशोधन बिल : राज्यसभा ने भी किया पारित
• वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को कहा कि कंपनियों को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रि या एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है तथा इसे सुगम बनाने के लिए कानून में समय समय पर बदलाव किए जाते रहे हैं। दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक 2017 पर राज्यसभा में हुई र्चचा का जवाब देते हुए जेटली ने कहा कि प्रक्रि या को सुगम बनाने के लिए कानून में समय समय पर बदलाव किए जाते रहे हैं और आगे भी किए जा सकते हैं।
• उन्होंने बताया कि मूल कानून बनने के बाद से 500 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। जेटली के जवाब के बाद उच्च सदन ने इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है। इससे पहले जेटली ने कहा कि मझोले एवं लघु उद्योगों से जुड़े मामलों के निस्तारण के लिए सुझाव देने के बारे में सरकार ने एक समिति गठित की है।
• समिति से तीन माह के भीतर अपनी सिफारिशें सौंपने को कहा गया है। विधेयक पर र्चचा में भाग लेते हुए कांग्रेस के जयराम रमेश ने एमएसएमई क्षेत्र की समस्याओं को उठाते हुए कहा था कि सरकार को इस क्षेत्र के लिए अलग से प्रावधान निर्धारित करने चाहिए।
• यह विधेयक इस बारे में नवंबर में लागू किए गए अध्यादेश का स्थान लेगा, जिसमें दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) में संशोधन करने की मांग की गई है।
• जेटली ने कहा कि अध्यादेश लाना इसलिए जरूरी था, क्योंकि इस संबंध में काफी मामले लंबित थे और इस बारे में समयसीमा तय कर दी गई थी। अगर हम और इंतजार करते तो मामले और बढ़ते जाते । इस विधेयक के माध्यम से खामियों को दूर करने पर बल दिया गया है ताकि जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वाले बकाएदार खुद की परिसंपत्तियों की बोली नहीं लगा सकें।
• प्रस्तावित परिवर्तनों से तनावग्रस्त परिसंपत्तियों के लिए खरीदारों का चयन करने की प्रक्रि या को सरल बनाने में मदद मिलेगी ।
• कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि नीलामी में भाग लेने वाले लोगों के बारे में जो शर्तें लगायी गयी हैं, उन पर विचार करना चाहिए। उन्होंने उदाहरण दिया कि सेबी द्वारा कारोबार से जिन लोगों पर निषेध लगाया गया है, उन्हें भी इस विधेयक में अपात्र माना गया है। उन्होंने कहा कि सेबी प्राय: ऐसे निषेध छह माह या एक साल के लिए लगाती है। ऐसे में उस व्यक्ति को सदा के लिए अपात्र बना देना कितना उचित होगा।

6. एनएमसी बिल संसद की स्थायी समिति के हवाले
• लोकसभा ने विवादास्पद विधेयक नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) को आवश्यक संशोधनों के लिए स्थायी समिति को भेज दिया है। साथ ही समिति को अपनी रिपोर्ट बजट सत्र से पहले सौंपने को कहा है। इस बिल से नाराज इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (एमसीआइ) ने 12 घंटों के लिए बुलाई हड़ताल आठ घंटे के बाद ही वापस ले ली।
• आइएमए का आरोप है कि नए बिल से चिकित्सकीय शिक्षा उलट-पुलट हो जाएगी। साथ ही उसे अपने स्थान पर एक नई संस्था के गठन पर भी सख्त ऐतराज है। नए विधेयक के चलते देश के डॉक्टरों की सर्वोच्च संस्था एमसीआइ ने मंगलवार को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया था।
• इस हड़ताल को विपक्षी दलों ने भी समर्थन दिया। विपक्ष और डॉक्टरों के विरोध के बाद विधेयक को समिति के पास भेजा गया है।
• लोकसभा में संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि इस विवाद का पटाक्षेप करते हुए कहा कि विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ राजग समेत विभिन्न दल चाहते हैं कि एनएमसी विधेयक को स्थायी समिति को भेजा जाए। इसलिए सरकार ने भी इस पर सहमति जता दी है। हालांकि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्र महाजन से अपील की कि समिति अपनी रिपोर्ट बजट सत्र से पहले ही सौंप दे।
• बजट सत्र जनवरी के आखिरी में शुरू होने की उम्मीद है और सरकार चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट और एक अन्य स्थायी समिति की रिपोर्ट के आधार पर इस कानून को जल्द से जल्द लाया जाए। इसके बाद, महाजन ने एक संक्षिप्त बयान जारी करते हुए स्थायी समिति की रिपोर्ट को संसद के पटल पर बजट सत्र शुरू होने से पहले पेश करने को कहा।
• उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने इस विधेयक को संसद में विगत शुक्रवार को पेश किया था। तब भी कांग्रेस ने इसका कड़ा विरोध करते हुए इसे स्थायी समिति के पास भेजे जाने की मांग की थी।
• क्या है एनएमसी बिल : बता दें कि नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) में आइएमए की जगह एक नई इकाई के गठन का प्रस्ताव किया गया है। इसमें कुछ चुनिंदा लोग इकाई के सदस्यों का चयन करेंगे।
• इसके साथ ही होमियोपैथी और आयुर्वेद के डॉक्टरों को छह माह के ‘ब्रिज कोर्स’ के बाद एलोपैथी की प्रैक्टिस की इजाजत दी गई है।
• इस विधेयक का कड़ा विरोध करने वाली देश में डॉक्टरों के सर्वोच्च संगठन आइएमए का कहना है कि विधेयक डॉक्टरों के काम करने की प्रक्रिया को प्रभावित करेगा और उन्हें पूरी तरह से नौकरशाहों और गैर-मेडिकल प्रशासकों के लिए जवाबदेह बना देगा।

7. इजरायल ने यरुशलम पर बनाया विशेष कानून
• इजरायल की संसद ने यरुशलम पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए एक विशेष कानून पास किया है। इसके मुताबिक इजरायल की सरकार को यरुशलम के किसी भी हिस्से पर अपना दावा छोड़ने के लिए अब संसद में सामान्य बहुमत की जगह दो तिहाई सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी।
• इजरायल की संसद में 120 सदस्य हैं। इस कानून के पास होने के बाद अब 80 सदस्यों के समर्थन के बाद ही कोई सरकार यरुशलम या उसके किसी हिस्से पर अपना दावा छोड़ पाएगी।1इजरायल के इस कदम को शांति प्रयासों के लिए झटका माना जा रहा है।
• इस कानून को हालांकि साधारण बहुमत से पलटा जा सकता है। इसलिए इजरायल का यह कदम प्रतीकात्मक ज्यादा है। पिछले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यरुशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता दी थी। तभी से इजरायल और फलस्तीन के बीच तनाव अपने चरम पर है। ऐसे में इजरायल का यह कदम स्थिति को विस्फोटक बना सकता है।
• वैसे अमेरिका के मित्र देशों समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने ट्रंप के इस प्रस्ताव का विरोध किया था। फलस्तीन यरुशलम को अपनी भावी राजधानी के तौर पर देखता है। इजरायल ने 1967 में पूर्वी यरुशलम पर हमला कर उसे अपने कब्जे में ले लिया था।

8. ट्रंप के ट्वीट के बाद रुकी 1617 करोड़ की मदद
• अमेरिका ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ट्वीट के तत्काल बाद पाकिस्तान के खिलाफ एक और कार्रवाई करते हुए 25.50 करोड़ डॉलर (1617 करोड़ रुपये) की सैन्य सहायता रोक दी है।
• ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि पाकिस्तान ने 15 साल में 33 अरब डॉलर (करीब दो लाख दस हजार करोड़ रुपये) की सहायता लेने के बावजूद आतंकियों को सुरक्षित पनाह देकर हमें धोखा दिया है। अमेरिकी कार्रवाई से पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है।
• पाक सरकार ने इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी राजदूत को तलब कर ट्रंप की टिप्पणी पर विरोध जताया। जबकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाकन अब्बासी ने कैबिनेट और राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक बुलाई है। इसमें अमेरिका के आरोपों का जवाब देने पर चर्चा की जाएगी।
• अखबार द एक्सप्रेस टिब्यून के मुताबिक, पाकिस्तान की विदेश सचिव तहमीना जंजुआ ने सोमवार रात अमेरिकी राजदूत डेविड हेल से ट्रंप की टिप्पणी पर जवाब तलब किया।
• इस बीच रेडियो पाकिस्तान के मुताबिक, अब्बासी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में अन्य मामलों के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर चर्चा की जाएगी।
• हालांकि सरकारी सूत्रों ने बताया कि बैठक में ट्रंप का बयान चर्चा का मुख्य विषय होगा। कैबिनेट की बैठक के बाद अब्बासी बुधवार को एनएससी की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में अमेरिका के आरोपों के जवाब को अंतिम रूप दिया जाएगा। वैसे पाकिस्तानी रक्षा मंत्रलय ने ट्रंप के बयान पर कहा कि अमेरिका के आतंक के खिलाफ जंग में शामिल होने के बदले में हमें सिर्फ अपशब्द और अविश्वास ही मिला है।
• छोड़ने के मूड नहीं है ट्रंप प्रशासन : पाकिस्तान को 25.5 करोड़ डॉलर (करीब 1617 करोड़ रुपये) की सैन्य सहायता को लेकर ह्वाइट हाउस ने बताया कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई पर जवाब देने तक यह रोक रहेगी। एक अधिकारी ने कहा कि अमेरिका आतंकवादियों के खिलाफ पाकिस्तान की निर्णायक कार्रवाई देखना चाहता है।

9. अनवर जलालपुरी
• मशहूर शायर अनवर जलालपुरी का मंगलवार सुबह निधन हो गया, वह करीब 70 वर्ष के थे।मुशायरों की जान माने जाने वाले जलालपुरी ने ‘‘राहरौ से रहनुमा तक’,‘‘उर्दू शायरी में गीतांजलि’ तथा भगवद्गीता का उर्दू अनुवाद ‘‘उर्दू शायरी में गीता’ पुस्तकें लिखीं।
• उन्होंने ‘‘अकबर द ग्रेट’ धारावाहिक के संवाद भी लिखे थे। वह अंग्रेजी के प्रोफेसर थे। अंग्रेजी के अलावा उन्होंने उर्दू में भी एमए किया था।

10. स्पंदन ललित कला सम्मान
• साहित्य एवं कलाओं को समर्पित संस्था स्पंदन ने जाने-माने साहित्यकार यतीन्द्र मिश्र को स्पंदन ललित कला सम्मान के लिए चुना है।
• मिश्र को यह सम्मान प्रख्यात पाश्र्व गायिका और लता मंगेशकर पर आधारित किताब ‘लता : सुर-गाथा’ के लिए दिया जा रहा है।
• उल्लेखनीय है कि भोपाल की संस्था स्पंदन देश भर से वरिष्ठ एवं समकालीन रचनाकारों व कलाकारों की कृतियों का सम्मान करती है।

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