दैनिक समसामयिकी 30 December 2017

1.नागरिकता रजिस्टर जारी होने से पहले असम में तनाव, सेना से मांगी गई मदद
• असम में नागरिकों की सूची का पहला मसौदा आने की तारीख नजदीक आने के साथ सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत यह मसौदा 31 दिसंबर को प्रकाशित किया जाना है। इस मसौदे में जिनके नाम होंगे उन्हें भारत का नागरिक नहीं माना जाएगा। ऐसे लोगों की संख्या लाखों में हो सकती है।
• मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्यभर में 45,000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है और सेना से भी मदद मांगी गई है और उसे अलर्ट रहने को कहा गया है।
• एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि सेना के साथ काउंटर इंसर्जेसी ग्रिड, पुलिस, अर्धसैनिक बल और खुफिया एजेंसियां हालात की नियमित रूप से समीक्षा कर रही हैं।
• शांति बरकरार रखने के लिए जरूरी निर्देश दिए जा रहे हैं। खुफिया जानकारी के मुताबिक राज्य के कुछ जगहों पर तनाव की आशंका है, जहां कुछ संदिग्ध नागरिकों के नाम सूची से बाहर किए जा सकते हैं।
• केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा पिछले हफ्ते राज्य में थे और उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया था। असम देश का एकमात्र ऐसा राज्य है, जिसका राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) है। इसे पहली बार 1951 में तैयार किया गया था।
• सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद असम में अवैध तरीके से रहने वाले लोगों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने के उद्देश्य से राज्य में नागरिकता रजिस्टर बनाने की प्रक्रिया चल रही है
• नागरिकता रजिस्टर केलिए कट-आफ डेट 25 मार्च 1971 तय की गई है यानी जो लोग इस तारीख के पहले से असम में रह रहे हैं उन्हें भारतीय नागरिक माना जाएगा।
• इसके लिए उन्हें जरूरी दस्तावेजों के जरिये यह साबित करना होगा कि वे वैध तरीके से असम में रह रहे हैं।

2. बढ़ते राजकोषीय घाटे ने बढ़ाई सरकार की चिंता
• देश का राजकोषीय घाटा नवम्बर अंत में ही पूरे साल के लिए तय अनुमान से आगे निकल गया। माल एवं सेवाकर (जीएसटी) के तहत पिछले दो माह के दौरान कम राजस्व प्राप्ति और अधिक खर्च से राजकोषीय घाटे का आंकड़ा नवम्बर अंत में ही बजट में तय पूरे साल के अनुमान से आगे निकल कर 112 फीसद हो गया।
• महालेखा नियंत्रक (सीजीए) के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017-18 में अप्रैल से नवम्बर अवधि के दौरान राजकोषीय घाटा 6.12 लाख करोड़ रूपये पर पहुंच गया जबकि बजट में पूरे वर्ष के दौरान राजकोषीय घाटे के 5.46 लाख करोड़ रूपये रहने का लक्ष्य तय किया गया था।
• यह तय वार्षिक अनुमान का 112 फीसद तक पहुंच गया जबकि इससे पिछले वर्ष इसी अवधि में यह घाटा वार्षिक बजट अनुमान का 85.8 फीसद था।
• सरकार ने वर्ष 2017-18 के दौरान राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.2 फीसद पर लाने का लक्ष्य रखा है। इससे पिछले वर्ष सरकार राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.5 फीसद रखने में सफल रही थी।
• सीजीए के आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष की अप्रैल से नवंबर की आठ माह की अवधि में सरकार की कुल राजस्व प्राप्ति 8.04 लाख करोड़ रूपये रही है जो कि उसके वार्षिक बजट अनुमान 15.15 लाख करोड़ रूपये का 53.1 फीसद है।
• एक साल पहले यह अनुपात 57.8 फीसद रहा था। इस दौरान सरकार का कुल पूंजी व्यय वार्षिक व्यय अनुमान का 59.5 फीसद रहा जबकि पिछले वर्ष इसी अविध में यह 57.7 फीसद रहा था। सरकार ने 2017-18 में कुल 21,46,735 करोड़ रूपये रखा है जिसमें पूंजी व्यय 3,09,801 करोड़ रूपये रखा गया है।

3. लैंगिक न्याय में चुनौतियों का सामना कर रहा भारत
• संयुक्त राष्ट्र की एक शीर्ष महिला अधिकारी ने कहा है कि भारत लैंगिक न्याय में बहुत बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है।
• अधिकारी ने साथ ही कहा कि सरकार ने अपनी नीतियों और कार्यक्र मों में महिलाओं के मुद्दे को प्राथमिकता दी है लेकिन इसे और ज्यादा गति देने की जरूरत है।
• संयुक्त राष्ट्र की सहायक महासचिव एवं यूएन वूमेन की उप कार्यकारी निदेशक लक्ष्मी पुरी ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों के गठन और पुलिस को लैंगिक समानता के प्रति जवाबदेह प्रशिक्षण दिए जाने की जरूरत का आह्वान किया।
• उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी नीतियों और कार्यक्र मों में महिलाओं के मुद्दे को अहमियत दी है ।
• कहा, मोदी हर कार्यक्रम, हर मिशन में इसे (लैंगिक समानता और लैंगिक मुद्दे) प्राथिमकता दी है। उन्होंने लैंगिक समानता को उसके बीच रखा है। जनधन योजना महिलाओं के लिए बड़ी जीत है। स्वच्छ भारत अभियान में वह लैंगिक संबंधी मुद्दों को और रेखांकित कर रहे हैं।
• इसी तरह स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया है। पुरी ने कहा, निश्चित तौर पर हम इन कुछ पहलों के संबंध में और गति देखना चाहेंगे ।
• मार्च से अगस्त 2013 तक यूएन वूमेन की कार्यवाहक प्रमुख के तौर पर काम करने वाली पुरी ने उल्लेख किया कि महिला समानता और लैंगिक समानता के क्षेत्र में भारत द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियां बहुत बहुत बड़ी हैं।

4. जॉर्ज विया लाइबेरिया के राष्ट्रपति निर्वाचित
• पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी जॉर्ज विया लाइबेरिया के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को हुए चुनाव के सभी वोटों की गिनती के बाद विया अपने प्रतिद्वंदी जोसेफ बोआकाई से 60 फीसद से ज्यादा मतों से आगे रहे। जैसे ही विया की जीत की खबर सामने आई, उनके समर्थकों ने राजधानी मोनरोविया में जश्न मनाना शुरू कर दिया।
• विया, एलेन जॉनसन सरलीफ की जगह लेंगे। परिणाम की घोषणा होने के बाद विया ने ट्वीट किया, मेरे साथी लाइबेरिया के नागरिकों, मैं समूचे देश की भावना को गहराई से महसूस कर रहा हूं। उन्होंने कहा, आज मुझे जो जिम्मेदारी मिली है, मैं उसका महत्व समझता हूं।
• विया अफ्रीका के एकमात्र ऐसे फुटबॉलर हैं जो फीफा र्वल्ड प्लेयर ऑफ द ईयर और प्रतिष्ठित बैलन डीऑर पुरस्कार के विजेता हैं। साल 2002 में फुटबॉल से संन्यास लेने के बाद विया ने राजनीति में प्रवेश किया।
• फिलहाल वह लाइबेरियाई संसद में सीनेटर हैं। सरलीफ ने बर्बर गृह युद्ध के खत्म होने के बाद 2005 के राष्ट्रपति चुनाव में विया को मात दी थी और एक साल बाद पद ग्रहण किया था।

5. पोंजी स्कीम की तरह है बिटकॉइन, न लगाएं पैसा

• बिटकॉइन जैसी वर्चुअल करेंसी न तो कोई सिक्का है और न ही कोई मुद्रा। यह बिल्कुल पोंजी स्कीम की तरह है। सरकार या भारतीय रिजर्व बैंक ने किसी भी वचरुअल करेंसी को मान्यता नहीं दी है इसलिए इनमें पैसा न लगाएं। आप जिस वचरुअल करेंसी में पैसा लगा रहे हैं उसका इस्तेमाल आतंकी फंडिंग, तस्करी और मनी लांडिंग जैसे गैर-कानूनी कामों के लिए हो सकता है।
• सरकार ने बिटकॉइन जैसी वचरुअल करेंसी में निवेश करने वाले लोगों को आगाह किया है। वित्त मंत्रलय ने शुक्रवार को इस संबंध में एक वक्तव्य जारी कर कहा कि वचरुअल करेंसी वैध नहीं है। देश में सरकार या किसी भी नियामक ने किसी भी एजेंसी को वचरुअल करेंसी के लिए लाइसेंस नहीं दिया है।
• जो लोग इसका लेनदेन कर रहे हैं, उन्हें इसके जोखिम के बारे में सजग रहना चाहिए।
• वित्त मंत्रलय का यह वक्तव्य ऐसे समय आया है जब रिजर्व बैंक पहले ही तीन बार निवेशकों को वचरुअल करेंसी के बारे में आगाह कर चुका है। मंत्रलय ने कहा कि हाल के समय में भारत समेत पूरी दुनिया में बिटकॉइन जैसी वचरुअल करेंसी की कीमत में रिकॉर्ड तेजी आई है।
• वचरुअल करेंसी में न तो कोई मूल्य निहित है और न ही इसके लिए किसी भी तरह की भौतिक परिसंपत्ति रखी जाती है। इस तरह बिटकॉइन की कीमतें पूरी तरह से कयासबाजी पर आधारित होती हैं।
• जिस तरह पोंजी स्कीम में निवेश का जोखिम होता है वैसे ही बिटकॉइन में भी निवेश जोखिमभरा है। इसलिए निवेशकों को पोंजी जैसी योजनाओं में फंसने से सचेत रहना चाहिए।

6. रूस और तुर्की ने लगाई एस-400 सौदे पर मुहर
• तुर्की और रूस ने अत्याधुनिक एंटी मिसाइल सिस्टम एस-400 के सौदे को अंतिम रूप दे दिया है। इस प्रकार से एक साल से दोनों देशों के बीच चल रही इस प्रणाली की खरीद की वार्ता पूरी हो गई है। एस-400 को अमेरिका की थाड एंटी मिसाइल सिस्टम की टक्कर का हथियार माना जाता है।
• खास बात यह है कि तुर्की अमेरिका की अगुआई वाले नाटो का सदस्य होने के बावजूद यह अत्याधुनिक सिस्टम खरीदेगा और रूस भी उस पर भरोसा करके इसे बेचेगा।
• दोनों देशों के बीच चार सिस्टम की बिक्री के लिए कुल 2.5 अरब डॉलर (करीब 16 हजार करोड़ रुपये) का सौदा हुआ है। यूरोप समेत उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के देश पहले ही इस सौदे पर अपनी आशंका जाहिर कर चुके हैं। नाटो ने साफ कहा है कि वह अपने हथियारों की तैनाती में एस-400 को स्थान नहीं देगा।
• तुर्की ने भी कह दिया है कि वह नाटो के हथियारों की तैनाती से अलग अपने देश में इस अत्याधुनिक मिसाइल सिस्टम को तैनात करेगा। रूसी कोंग्लोमीरेट रोस्टेक के प्रमुख सर्गेई चेमेजोव के मुताबिक मार्च 2020 में एस-400 की पहली बैटरी तुर्की को मिल जाएगी। उसके बाद कुछ-कुछ महीनों के अंतर पर बाकी तीन बैटरी तुर्की को मिलेंगी।
• सौदे के मुताबिक 45 प्रतिशत रकम तुर्की नकद रूप में रूस को देगा जबकि बाकी की 55 प्रतिशत रकम उसे रूस से कर्ज के रूप में मिलेगी। इस कर्ज का भुगतान कुछ वर्षो में करना होगा। सीरिया युद्ध के दौरान रूस का लड़ाकू विमान मार गिराने के बाद तुर्की और रूस के संबंध बेहद खराब हो गए थे।
• इसके बाद तुर्की के राष्ट्रपति तैयप एदरेगन ने मॉस्को जाकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की और घटना के लिए खेद जताया। इसके बाद दोनों देशों के संबंध फिर पटरी पर आए।

7. भ्रष्टाचार का पता लगाने को वैज्ञानिकों ने विकसित किया नया तंत्रिका मॉडल
• वैज्ञानिकों ने एक ऐसा न्यूरल (तंत्रिका) नेटवर्क विकसित करने में सफलता हासिल कर ली है, जिसकी मदद से आर्थिक और राजनीतिक कारकों के आधार पर सार्वजनिक भ्रष्टाचार की भविष्यवाणी की जा सकेगी।
• रूस की नेशनल रिसर्च यूनिवर्सिटी और स्पेन की यूनिवर्सिटी ऑफ वैलडोलिड के शोधकर्ताओं ने इस मॉडल के लिए सेल्फ आर्गेनाइजिंग मैप्स (एसओएमएस) नाम के एक न्यूरल नेटवर्क एप्रोच का प्रयोग किया है।
• इसके जरिए अलग-अलग समय में भ्रष्टाचार के मामलों का अध्ययन कर उसके आधार पर भ्रष्टाचार की भविष्यवाणी की जा सकती है।
• मस्तिष्क के कार्यो की करता है नकल : शोधकर्ताओं के मुताबिक, एसओएसएस वास्तव में एक तरह का आर्टिफीशियल न्यूरल नेटवर्क (कृत्रिम तंत्रिका तंत्र) है, जो मस्तिष्क के कार्यो की नकल करता है। एसओएमएस में विस्तृत डाटा से ऐसे पैटर्न्सक विकसित करने की क्षमता है, जिसके जरिए अंतर्निहित संबंधों को आसानी से समझा जा सकता है।
• इसके जरिए सरल ज्यामितीय संबंधों में उच्च आयामी डाटा के बीच गैर रैखिक संबंधों को परिवर्तित किया जा सकता है। यानी यह मानव मस्तिष्क की प्रणाली पर कार्य करता है।
• एसओएमएस का यह गुण उसे उपयोगी टूल बनाता है ताकि पैटर्न्सी और प्राप्त दृश्यों में संबंध को देखकर डाटा तैयार किया जा सके।
• ऐसे काम करता है मॉडल:- सोशल इंडीकेटर्स नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने दिखाया है कि किस प्रकार से आर्थिक कारकों के आधार पर भ्रष्टाचार की भविष्यवाणी की जा सकती है।
• शोधकर्ताओं के मुताबिक, अचल संपत्ति का कराधान, आर्थिक विकास, घर की कीमतों में वृद्धि और गैर वित्तीय कंपनियों व जमा संस्थानों की बढ़ती संख्या सार्वजनिक भ्रष्टाचार को प्रेरित करती है।
• वहीं, शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि कुछ सत्ताधारी पार्टियों के लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण सार्वजनिक भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है।
• इसके अलावा हर क्षेत्र की विशेषताएं भिन्न-भिन्न होती हैं। जब एक निश्चित काल जैसे कि तीन वर्ष तक उपरोक्त चीजों का अध्ययन किया जाए और उसका डाटा इस मॉडल में दर्ज किया जाए तो यह प्रणाली उपरोक्त मुख्य बिंदुओं में अपने अनुसार समय के अनुरूप परिवर्तन करके बता सकती है कि क्या कोई भ्रष्टाचार हुआ है या नहीं या होने की आशंका है या नहीं।
• यह मॉडल कई दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण है। पहला, यह पुराने अध्ययनों के आधार पर भ्रष्टाचार की भविष्यवाणी कर सकता है। दूसरा, चूंकि यह डाटा वितरण के बारे में कोई धारणा नहीं बनाता है इसलिए इस न्यूरल नेटवर्क का प्रयोग एक विशेष रूप से उपयुक्त विधि के रूप में कर सकते हैं।

8. मेडिकल रिसर्च के लिए आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ी उम्मीद
• फेसबुक के संस्थापक सदस्यों में से एक डस्टिन मॉस्कोवित्ज और उनकी पत्नी कैरी टूना ने फिलैंथ्रॉपी को एक नया आयाम दिया है। उनकी पहल पर शुरू हुआ संस्थान ओपन फिलैंथ्रॉपी प्रॉजेक्ट (ओपीपी) ऐसी सीमावर्ती मेडिकल रिसर्च परियोजनाओं को आर्थिक सहायता दे रहा है, जो न तो सरकारी नजरिये में फिट बैठती हैं, न कॉर्पोरेट विजन में, और न ही बिल गेट्स जैसे बड़े उद्यमियों की सोच में। जैसे, मलेरिया से निपटने के स्थायी उपाय के रूप में मच्छरों का जेनेटिक ढांचा बदलने का प्रस्ताव कन्विंसिंग होने के बावजूद न जाने कब से फंडिंग के अभाव में पेंडिंग पड़ा है। अभी हाल में ओपीपी की मदद से इस पर जारी काम को खुले परीक्षण के दायरे में ले जाने की बात चल रही है।
• ओपीपी ने अपनी प्राथमिकता के जो दायरे चिह्नित किए हैं, वे काफी दिलचस्प हैं और भारत जैसे विकासशील देशों के लिए भी उनके बड़े मायने हैं। मसलन, मलेरिया के अलावा टीबी से जुड़ी रिसर्च ओपीपी के अजेंडा में काफी ऊपर है।
• उनका सबसे दिलचस्प अजेंडा है पालतू जानवरों को, खासकर पालतू कुत्तों को होने वाले कैंसर का इलाज, जिसमें उभरते वैज्ञानिक काफी एक्सपेरिमेंटल हो सकते हैं, हालांकि इतने भी नहीं कि प्रयोग के दौरान उन्हंा गिनीपिग समझ कर मार ही डालें। सीमावर्ती दायरे में आने वाली ये एक्सपेरिमेंटल पद्धतियां बाद में इंसानों पर भी आजमाई जा सकती हैं, क्योंकि जरूरी लगाव के साथ उनका परीक्षण पालतू जानवरों पर पहले ही किया जा चुका होगा।
• इंसानों को लेकर ओपीपी की चिंता के दो और दायरे असाध्य दर्द (क्रोनिक पेन) और मोटापा (ओबीसिटी) हैं, जिन पर होने वाली रिसर्च आज भी बड़े पैमाने की पूंजी के अभाव में किसी मुकाम तक नहीं पहुंच पा रही है। डस्टिन मॉस्कोवित्ज और कैरी टूना 14 अरब डॉलर संपत्ति के मालिक हैं, लिहाजा उनके पास शोध के लिए धन की कोई समस्या नहीं है। सिलिकन वैली से जुड़े कुछ और बड़े उद्यमियों का वित्तीय समर्थन ओपन फिलैंथ्रॉपी प्रॉजेक्ट को मिला हुआ है।
• वैज्ञानिक शोध को मदद पहुंचाने वाली अन्य संस्थाओं के विपरीत ओपीपी का जोर श्योर शॉट कामयाबी पर नहीं है, लेकिन प्रस्तावित शोध से दूर-दराज तक जुड़ी संभावनाओं का आकलन ये लोग बड़ी निर्ममता से करते हैं।

9. आनंद बने विश्व चैंपियन
• विश्व चैंपियन मैग्नस कार्लसन को हराने के बाद विश्वनाथन आनंद ने शानदार लय बरकरार रखते हुए रियाद में विश्व रैपिड शतरंज चैंपियनशिप खिताब जीत लिया। आनंद 48 साल की उम्र में इस खिताब को जीतने वाले सबसे उम्र दराज खिलाड़ी बने।
• इससे पहले पिछले साल यू्क्रेन के वासिले इवानचुक ने 47 वर्ष की उम्र में इसे अपने नाम किया था। आनंद ने दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी कार्लसन को नौवें दौर में हराकर 2013 विश्व चैंपियनशिप में मिली हार का बदला चुकता कर लिया।
• उन्होंने 2013 में यह खिताब कार्लसन से हारकर गंवाया था जबकि 2003 में उन्होंने फाइनल में ब्लादीमिर क्रैमनिक को हराकर खिताब जीता था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *