दैनिक समसामयिकी 22 December 2017

1.यरुशलम पर भारत ने अमेरिका के खिलाफ डाला वोट

• संयुक्त राष्ट्र महासभा ने गुरुवार को एक प्रस्ताव पारित कर अमेरिका से यरुशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने के फैसले को वापस लेने को कहा है। तुर्की और यमन की ओर से पेश इस प्रस्ताव का भारत समेत 128 देशों ने समर्थन किया। जबकि अमेरिका समेत सिर्फ नौ देशों ने ही प्रस्ताव के विरोध में वोट दिया। 35 देशों ने प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लिया।
• अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी थी कि जो भी देश प्रस्ताव के पक्ष में वोट देंगे, उन्हें अमेरिका की तरफ से दी जाने वाली आर्थिक मदद में कटौती की जाएगी। लेकिन, उनकी धमकी का कोई खास असर नहीं पड़ा और सिर्फ नौ देशों ने ही प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया।
• इन देशों में अमेरिका के अलावा ग्वाटेमाला, होंडुरास, इजरायल, मार्शल आइलैंड्स, माइक्रोनेशिया, पलाउ, टोगो और नोरू शामिल हैं।
• न्यूयॉर्क स्थित महासभा की बैठक में भारत ने हालांकि इस मसले पर कुछ नहीं कहा था। लेकिन ट्रंप द्वारा यरुशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने के बाद भारत ने कहा था कि फलस्तीन पर उसकी स्थिति पहले की तरह और स्वतंत्र है।
• संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक से इतर गुट निरपेक्ष देशों की मंत्रिस्तरीय बैठक में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा था कि इजरायल-यरुशलम शांति का मार्ग आपसी मान्यता और सुरक्षा प्रबंधों पर आधारित इजरायल और फलस्तीन के बीच जल्द से जल्द बातचीत से ही निकल सकता है।
• प्रस्ताव में सभी देशों से यरुशलम पर सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का पालन करने की मांग की गई है। उनसे अनुरोध किया गया है कि वे इन प्रस्तावों के खिलाफ किसी भी कदम को मान्यता न दें। उधर, संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत निकी हेली ने महासभा के प्रस्ताव की आलोचना की है।
• हेली ने कहा कि अमेरिका इस दिन को याद रखेगा जब एक संप्रभु देश के तौर पर अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने की वजह से संयुक्त राष्ट्र महासभा में उस पर हमला हुआ। उन्होंने कहा कि अमेरिका यरुशलम में अपना दूतावास खोलेगा। बता दें कि सोमवार को अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ऐसे ही एक प्रस्ताव को वीटो किया था।
• अमेरिका को छोड़कर सुरक्षा परिषद के बाकी सभी 14 सदस्य प्रस्ताव के पक्ष में थे। अमेरिका द्वारा प्रस्ताव को वीटो किए जाने के बाद उसे महासभा में भेजा गया था।

2. जजों के वेतन में वृद्धि का विधेयक लोकसभा में पेश
• लोकसभा में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट और 24 हाई कोर्ट के जजों के वेतन में वृद्धि संबंधी विधेयक पेश किया गया। इससे जजों के वेतन में करीब दोगुनी बढ़ोतरी होगी। 1कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट जज (वेतन एवं सेवा शर्ते) संशोधन विधेयक 2017 सदन में पेश किया। वह थोड़े विलंब से सदन पहुंचे थे, जिसके लिए लोकसभा अध्यक्ष ने टोका भी।
• विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद जजों का वेतन सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के वेतन के बराबर हो जाएगा। जजों का बढ़ा हुआ वेतन एक जनवरी 2016 से लागू होगा। इसके अलावा मकान किराया भत्ता एक जुलाई और व्यय संबंधी भत्ता 22 सितंबर 2017 से लागू होगा।
• सेवानिवृत्त जजों को भी वेतनवृद्धि का लाभ मिलेगा। गौरतलब है कि 2016 में देश के तत्कालीन चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों का वेतन बढ़ाने के लिए सरकार को पत्र लिखा था। सुप्रीम कोर्ट में जजों के 31 स्वीकृत पद हैं, जबकि मौजूदा समय में वहां 25 जज हैं। इसी तरह हाई कोर्ट में जजों के स्वीकृत पद 1,079 हैं, लेकिन अभी 682 जज ही काम देख रहे हैं।

3. केंद्र ने लौटाया झारखंड का भूमि अर्जन संशोधन विधेयक
• केंद्र सरकार ने झारखंड विधानसभा से पारित कराकर भेजे गए भूमि अर्जन एवं पुनर्वास संशोधन विधेयक-2017 को वापस कर दिया है। राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने इस बाबत केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए दस्तावेज गुरुवार को सार्वजनिक किए।
• उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्रलय ने संशोधन विधेयक पर पुनर्विचार की गुजारिश राज्य सरकार से की है। इससे पूर्व छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम और संताल परगना काश्तकारी अधिनियम में फेरबदल की राज्य सरकार की सिफारिश को भी गवर्नर ने पुनर्विचार के लिए वापस कर दिया था।
• अपने आवास पर मीडिया से रूबरू हेमंत सोरेन ने कहा कि यह झारखंड के लोगों की जीत है। सरकार बड़े घरानों को जमीन सौंपना चाहती है। सीएनटी-एसपीटी कानून में परिवर्तन का भी प्रयास हुआ था। राज्यपाल ने उसे वापस कर झारखंड को लोगों का सम्मान हासिल किया। इस प्रयास में असफल रहने के बाद मुख्यमंत्री ने रैयतों की जमीन हड़पने का दूसरा तरीका निकला।
• भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को संशोधित करने का प्रस्ताव बहुमत से पारित कराया गया। बकौल हेमंत सोरेन, केंद्र सरकार ने स्पष्ट कहा है कि सरकार के संशोधन को सहमति देने से कृषि योग्य भूमि में कमी आएगी। यह राष्ट्रीय कृषि नीति और राष्ट्रीय पुनर्वास नीति के भी खिलाफ है।

4. 40 निष्क्रिय रिजर्व फंड में पड़े हैं 703 करोड़ रुपये
• आम तौर पर सरकारी विभाग विकास के लिए पैसे की कमी का रोना रोते हैं लेकिन जब कई साल से उनके पास धनराशि पड़ी हो और उसका कोई इस्तेमाल नहीं हुआ तो नौकरशाही की मंशा पर सवाल उठना लाजिमी है। सरकार के 40 रिजर्व फंडों और डिपॉजिट में भारी भरकम 703.68 करोड़ रुपये पड़े हैं। ये फंड आठ साल से लेकर 28 साल तक समय से निष्क्रिय पड़े हैं। यह अहम खुलासा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने एक ऑडिट रिपोर्ट में किया है।
• वित्त वर्ष 2016-17 के लिए केंद्र सरकार के वित्तीय खातों का परीक्षण करने के बाद तैयार की गई इस ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि पब्लिक अकाउंट में 40 ऐसे रिजर्व फंड और डिपॉजिट हैं जो निष्क्रिय हैं। इनमें 703.68 करोड़ रुपये आठ से 28 साल से पड़े हैं। इसका अब तक कोई इस्तेमाल नहीं हुआ है।
• कैग के मुताबिक अधिकांश फंड में कुछ न कुछ धनराशि पड़ी है। इससे कोई उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है, इसलिए इन फंड्स की समीक्षा कर इन्हें बंद कर धनराशि को भारत की संचित निधि में स्थानांतरित करने की जरूरत है। ये फंड गृह मंत्रलय व कृषि और किसान कल्याण मंत्रलय जैसे केंद्रीय मंत्रलयों से संबंधित हैं।
• दरअसल जब सरकार को किसी विशेष उद्देश्य के लिए धनराशि आवंटित करनी होती है तो वह भारत की संचित निधि से राशि निकालकर उसका एक फंड बना देती है। वह रकम पब्लिक अकाउंट में जमा रहती है, ताकि जब भी उसमें से धनराशि खर्च करने की आवश्यकता हो, उसे खर्च किया जा सके।
• कैग के मुताबिक निष्क्रिय पड़े फंड में सबसे ज्यादा राशि 261 करोड़ रुपये जनरल इंश्योरेंस फंड में जमा है। इसी तरह निर्यात व्यापार जमा राशि के रूप में 15.25 करोड़ रुपये जमा हैं।

5. 2जी मामले में राजा, कनीमोरी समेत सभी बरी
• नौ साल पहले 2जी मामला देश के सबसे बड़े घोटाले के रूप में सामने आया था। गुरुवार को सीबीआइ की विशेष अदालत ने उसे एक झटके में आरोपियों को बरी कर खारिज कर दिया। जांच एजेंसियों की मंशा पर सवाल खड़ा करते हुए न्यायमूर्ति ओपी सैनी ने पूर्व संचार मंत्री ए राजा और द्रमुक नेता कनीमोरी समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
• यह फैसला तब आया है जब चार्जशीट दाखिल होने तक जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट भी कर रहा था। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने स्पेक्ट्रम आवंटन में भ्रष्टाचार के आरोपों को देखते हुए टेलीकॉम कंपनियों के 122 लाइसेंस भी रद कर दिए थे। इसलिए सीबीआइ और ईडी अब इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करने की बात कर रही हैं।
• जांच एजेंसियों के मुताबिक, अदालत को साक्ष्य पूरे दिए गए थे लेकिन उन पर गौर ही नहीं किया गया।
• न्यायाधीश ओपी सैनी ने कहा, ‘मैं सुबूतों के लिए सात वर्षो तक इंतजार करता रहा, लेकिन एक भी नहीं मिला। इसलिए मुङो यह कहने में कोई ङिाझक नहीं है कि अभियोजन पक्ष आरोपियों पर लगाए गए सभी आरोपों को साबित करने में बुरी तरह से विफल रहा है। लिहाजा सभी आरोपियों को बरी किया जाता है।’
• न्यायाधीश सैनी 14 मार्च, 2011 से इस मामले की सुनवाई कर रहे थे। इस तरह भ्रष्टाचार के सीबीआइ के दो और मनी लांडिंग के ईडी के एक मामले से सभी आरोपी मुक्त हो गए।
• हाल के वर्षो का यह सबसे बड़ा फैसला इसलिए माना जा रहा है, क्योंकि मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार के जाने में एक बड़ा कारण इस घोटाले को भी माना जाता रहा है।
• तत्कालीन कैग विनोद राय ने सरकारी खजाने को एक लाख 76 हजार करोड़ के नुकसान का अनुमान लगाया था।
• 135 लोग थे आरोपी : पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा, द्रमुक नेता करुणानिधि की पुत्री और सांसद कनीमोरी के अलावा तत्कालीन सूचना सचिव सिद्धार्थ बेहुरा, राजा के पूर्व निजी सचिव आरके चंदौलिया, स्वैन टेलीकॉम के प्रमोटर शाहिद उस्मान बलवा, विनोद गोयनका, यूनिटेक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संजय चंद्रा, रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप के शीर्ष कार्यकारी गौतम दोशी, सुरेंद्र पिपारा और हरि नायर समेत इस मामले में 35 आरोपी थे।
• एस्सार समूह के प्रमोटर रविकांत रुइया व अंशुमान रुइया, लूप टेलीकॉम के प्रोमोटर आइपी खेतान व किरण खेतान, एस्सार समूह के निदेशक विकास सर्राफ के अलावा लूप टेलीकॉम, लूप मोबाइल (इंडिया) लिमिटेड और एस्सार टेलीहोल्डिंग लिमिटेड भी इस मामले में आरोपी बनाए गए थे।

6. 2030 तक 7000 अरब डालर की होगी इकोनामी
• प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएमईएसी) के अध्यक्ष विवेक देबराय ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था 2030 तक 6500 से 7,000 अरब डालर की हो जाने का अनुमान है। वहीं 2035-40 तक यह 10,000 अरब डालर की हो जाएगी।
• उन्होंने कहा कि लेकिन प्रति व्यक्ति आय काफी कम ही रहेगी।देबराय ने यहां स्काच शिखर सम्मेलन में कहा कि वर्ष 2030 तक देश की राष्ट्रीय आय 6,500 से 7,000 अरब डालर होगी। अगर विनिमय दर वही रहती है जो आज है तो देश की अर्थव्यवस्था 2035-40 तक 10,000 अरब डालर की हो जाएगी।
• नीति आयोग के सदस्य ने यह भी कहा, अगर विनिमय दर बढ़ती है तो देश की अर्थव्यवस्था 2035 से पहले ही 10,000 अरब डालर की हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ने के साथ भारत उल्लेखनीय रूप से एक अलग देश होगा और वैश्विक मंच पर इसकी भूमिका बढ़ेगी।
• देबराय ने यह भी कहा कि लोग सरकारी नौकरी नहीं तलाश रहे, बल्कि अब ज्यादा से ज्यादा लोग दूसरे को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं।
• जमीन से जुड़े मुद्दे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक जटिल मुद्दा है और भारत में इसका अकुशल तरीके से उपयोग हुआ है।देबराय ने कहा, हमारे पास जमीन के स्वामित्व के संदर्भ में स्पष्ट प्रणाली नहीं है।

7. 2025 तक गुरुत्वीय तरंगें मापने वाला यंत्र ‘लिगो’ बना लेगा भारत
• भारत 2025 तक गुरुत्वाकर्षण तरंगों को मापने वाला लिगो (लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रेविएशनल वेव आब्जर्वेटरी डिटेक्टर) यंत्र बना लेगा। अभी तक यह सुविधा केवल अमेरिका के पास मौजूद है। वहां इसकी दो प्रयोगशालाएं काम कर रही हैं। यंत्र को बनाने के बाद भारत अमेरिका के बाद इस उपलब्धि को पाने वाला विश्व का दूसरा देश बन जाएगा।
• भारत में यंत्र की स्थापना के लिए जगह का चयन कर लिया गया है, लेकिन नाम अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। लिगो यंत्र ने पहली बार गुरुत्वीय तरंगों को खोजा था। 2016 में एक सुरंग में प्रयोग करके इसका पता लगाया था। 2017 का नोबल पुरस्कार इसी शोध के लिए दिया गया है।
• आइंस्टीन ने 100 साल पहले बताया था इन तरंगों के बारे में : नोबल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने तकरीबन 100 साल पहले पहली बार इन तरंगों के बारे में बताया था। उसके बाद ही इस दिशा में शोध कार्य शुरू हो सके।
• अमेरिका ने दो लिगो यंत्रों को लंबे शोध के बाद तैयार किया था। इन्हें स्थापित भी कर लिया गया है। अमेरिकी वैज्ञानिकों का मानना है कि तीसरे यंत्र को पृथ्वी में किसी और जगह पर लगाया जाए तो बेहतरीन परिणाम हासिल होंगे।
• ऐसे की जा रही तैयारी : पुणो स्थित इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रो फिजिक्स (आइयूसीएए) के निदेशक सोमेक रॉय चौधरी का कहना है कि लिगो यंत्र तैयार होने के बाद उनकी संस्था इसके संचालन व निगरानी का काम करेगी। इसके लिए भारी तादाद में युवाओं की जरूरत होगी।
• उनका कहना है कि इंदौर का राजा रमन्ना सेंटर व अहमदाबाद का प्लाज्मा रिसर्च सेंटर यंत्र के कल पुर्जो को तैयार कर रहा है। इसमें इस्तेमाल होने वाला दर्पण व अन्य जरूरी चीजें अमेरिका से आएंगी।

8. वरिष्ठ साहित्यकार रमेश कुंतल मेघ को साहित्य अकादमी सम्मान
• साहित्य अकादमी पुरस्कार-2017 की घोषणा कर दी गई है। हंिदूी में यह सम्मान प्रसिद्ध लेखक रमेश कुंतल मेघ को उनकी कृति विश्वमिथकसरित्सागर के लिए दिया जाएगा। इस पुस्तक को साहित्यिक समीक्षा के वर्ग में चुना गया है।
• उर्दू में यह पुरस्कार बेग एहसास को उनके कहानी संग्रह दखमा व अंग्रेजी में ममंग दई को उनकी कृति द ब्लैक हिल के लिए दिया जाएगा।
• साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार प्रतिभा अग्रवाल को दिया जाएगा।
• साहित्य अकादमी पुरस्कार के रूप में एक उत्कीर्ण ताम्रफलक, शॉल और एक लाख रुपये की राशि प्रदान की जाती है। पुरस्कारों की अनुशंसा 24 भारतीय भाषाओं की निर्णायक समितियों द्वारा की गई है और साहित्य अकादमी के अध्यक्ष प्रो. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी की अध्यक्षता में हुई अकादमी के कार्यकारी मंडल की बैठक में गुरुवार को इसे अनुमोदित किया गया।
• इन्हे मिला पुरस्कार : जिन पांच कवियों को उनके कविता संग्रह के लिए पुरस्कृत किया जाएगा उनमें उदय नारायण सिंह (मैथिली), श्रीकांत देशमुख (मराठी), भुजंग टुडु (संताली), स्व. इंकलाब (तमिल) और देवीप्रिया (तेलुगु) शामिल हैं। वहीं, उपन्यास के लिए जयंत माधव बरा (असमिया), आफसार आमेद (बांग्ला), रीता बर (बोडो), ममंग दई (अंग्रेजी) केपी रामनुन्नी (मलयालम), निरंजन मिश्र (संस्कृत) और नछत्तर (पंजाबी) को पुरस्कृत किया जाएगा।
• इसके अलावा कहानी संग्रह के लिए शिव मेहता (डोगरी), औतार कृष्ण रहबर (कश्मीरी), गजानन जोग (कोंकणी), गायत्री सराफ (उड़िया) और बेग एहसास (उर्दू) को पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। उर्मि घनश्याम देसाई (गुजराती), रमेश कुंतल मेघ (हिंदी), टीपी अशोक (कन्नड़), वीणा हांगखिम (नेपाली) और नीरज दइया (राजस्थानी) को समालोचना के लिए पुरस्कृत किया जाएगा।
• राजेन तोइजांबा (मणिपुरी) को उनके नाटक और जगदीश लछाणी (सिंधी) को उनके निबंध के लिए पुरस्कृत किया जाएगा।
• इन पुस्तकों को संबंधित भाषा के त्रिसदस्यीय निर्णायक मंडल ने निर्धारित चयन-प्रक्रिया का पालन करते हुए पुरस्कार के लिए चुना है। कार्यकारी मंडल ने निर्णायकों के बहुमत अथवा सर्वसम्मति के आधार पर चयनित पुस्तकों के लिए घोषणा की हैं

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