दैनिक समसामयिकी 21 December 2017

1.यरुसलम पर यूएन का आपात विशेष सत्र आज
• यरुशलम के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) महासभा का गुरुवार को आपात विशेष सत्र बुलाया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यरुशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता देने के फैसले के विरोध में अरब और मुस्लिम देशों ने आपात सत्र की मांग की थी। इससे पहले सोमवार को अमेरिका ने अपने फैसले के विरोध में यूएन सुरक्षा परिषद में लाए गए प्रस्ताव को वीटो कर दिया था। परिषद के शेष 14 सदस्य देशों ने मिस्र के प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया था।
• यूएन में फलस्तीन के राजदूत रियाद मंसूर ने बताया कि महासभा ट्रंप की घोषणा वापस लेने की मांग वाले प्रस्ताव पर मतदान करेगी। उन्होंने महासभा में प्रस्ताव को भारी समर्थन मिलने की उम्मीद जताई। महासभा से प्रस्ताव को मंजूरी मिलना बाध्यकारी नहीं है लेकिन इसका राजनीतिक वजन होगा।
• अमेरिकी चेतावनी, विरोध में वोट देने वालों पर नजर: संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत निक्की हेली ने चेतावनी दी है कि अमेरिका ट्रंप के फैसले की निंदा करने वाले प्रस्ताव के समर्थन में मतदान करने वाले देशों के नाम याद रखेगा। उन्होंने इस बारे में दर्जनों सदस्य देशों को पत्र लिखा है।
• उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रपति (ट्रंप) इस मतदान को देखेंगे। उन्होंने मुझसे यह रिपोर्ट देने को कहा है कि किसने हमारे खिलाफ मतदान किया। हम एक-एक वोट पर नजर रखेंगे।’
• 1950 के प्रावधान के तहत सुरक्षा परिषद में विफल होने पर किसी मामले में महासभा का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है। अब तक ऐसे 10 सत्र हुए हैं। पिछला सत्र 2009 में पूर्वी यरुशलम और फलस्तीनी क्षेत्रों के कब्जे के मुद्दे पर हुआ था।

2. नए उपभोक्ता संरक्षण विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी : भ्रामक विज्ञापन पर बैन होंगे सेलिब्रिटी, लगेगा जुर्माना
• केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को नए उपभोक्ता संरक्षण विधेयक को मंजूरी दे दी। इसके प्रावधानों के तहत कंपनियों द्वारा भ्रामक विज्ञापन जारी करने और मिलावट करने पर जुर्माना और जेल की सजा हो सकेगी। यही नहीं, विधेयक में भ्रामक विज्ञापन करने वाले सेलिब्रिटी पर भी जुर्माने और तीन साल तक प्रतिबंध का प्रावधान किया गया है।
• विधेयक को संसद के वर्तमान सत्र में ही पेश किए जाने की संभावना है। विधेयक में भ्रामक विज्ञापन करने वाले सेलिब्रिटी पर पहली बार अपराध करने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और एक साल के प्रतिबंध का प्रावधान है। दूसरी बार अपराध में 50 लाख रुपये तक का जुर्माना और तीन साल तक के प्रतिबंध का प्रावधान किया गया है।
• कंपनियों के लिए कड़ी सजा : उत्पाद निर्माता और कंपनियों पर पहले अपराध में 10 लाख तक का जुर्माना और दो साल की जेल का प्रावधान किया गया है। इसके बाद के अपराधों पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना और पांच साल तक की जेल का प्रावधान है।
• मिलावट के मामलों में विधेयक में जुर्माने के साथ-साथ उम्रकैद की सजा का प्रावधान किया गया है।
• सूत्रों ने बताया कि नए विधेयक में वर्तमान कानूनों के दायरे को बढ़ाते हुए उन्हें और प्रभावी व उद्देश्यपरक बनाया गया है। इसमें उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) की स्थापना का भी प्रावधान है। साथ ही वैकल्पिक विवाद निवारण तंत्र के रूप में इसमें मुकदमे के बाद भी मध्यस्थता का प्रावधान किया गया है।
• पुराना विधेयक होगा वापस : मंत्रिमंडल ने उपभोक्ता संरक्षण विधेयक-2017 को मंजूरी देकर 2015 में पेश विधेयक को वापस लेने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। इससे पहले, अगस्त 2015 में केंद्र सरकार ने लोस में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-1986 की जगह लेने के लिए नया विधेयक पेश किया था।

3. पंचायतों को गरीबी मुक्त बनाने पर होगा जोर

• गुजरात विधानसभा चुनावों में ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा का प्रदर्शन अपेक्षानुरूप न रहने के बाद मोदी सरकार अब खेती और गांवों की दशा सुधारने के उपाय करने में जुट गई है। इसी दिशा में कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने बुधवार को कृषि आय बढ़ाने और पंचायतों को गरीबी मुक्त बनाने के उपायों पर मंथन किया। परिषद का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में इसके लिए अभी से जरूरी उपाय करने होंगे।
• सूत्रों के मुताबिक, विवेक देबरॉय की अध्यक्षता में हुई प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की बैठक में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के समक्ष चुनौतियों और उन्हें हल करने के लिए उपलब्ध विकल्पों पर चर्चा की गई।
• नीति आयोग के सदस्य और जाने-माने कृषि विशेषज्ञ डॉ. रमेश चंद ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने और कृषि व संबद्ध क्षेत्रों में आय तथा रोजगारोन्मुखी विकास के लिए रणनीतिक विकल्पों पर प्रजेंटेशन दिया।
• परिषद की बैठक में कृषि क्षेत्र की स्थिति पर चर्चा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चालू वर्ष में खेती की विकास दर पिछले साल के मुकाबले सुस्त पड़ गई है।
• सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है, इसलिए कृषि क्षेत्र की वृद्धि में गिरावट चिंताजनक है। यही वजह है कि अब ऐसे उपाय तलाशे जा रहे हैं जिससे न सिर्फ कृषि की विकास दर को बढ़ाया जाए बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को रोजगार मिले।
• माना जा रहा है कि परिषद कृषि की स्थिति बेहतर बनाने के लिए सरकार को सुझाव दे सकती है जिन पर आगामी आम बजट में अमल हो सकता है।
• आर्थिक सलाहकार परिषद की बैठक में ग्रामीण विकास मंत्रलय के सचिव अमरजीत सिन्हा ने अंत्योदय मिशन के जरिये पंचायतों को गरीबी मुक्त बनाने पर भी प्रजेंटेशन दिया। सूत्रों ने कहा, सरकार की कोशिश है कि चरणबद्ध तरीके से अलग-अलग राज्यों में पंचायतों को गरीबी मुक्त बनाया जाए।
• इसके लिए अंत्योदय मिशन का इस्तेमाल करने पर चर्चा की गई। इसके अलावा परिषद की बैठक में व्यापार संबंधी मुद्दों पर भी चर्चा की गई। बैठक में परिषद के सदस्य डॉ. राथिन राय, सुरजीत भल्ला और अन्य सदस्य भी मौजूद रहे।

4. संगठित अपराधों पर योगी सरकार का कोड़ा, यूपीकोका विधेयक 2017 पेश
• उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक 2017 (यूपीकोका) के विधानसभा पटल पर रखे जाने के साथ ही इसके भविष्य पर आकलन शुरू हो गया है। 2007 में मायावती सरकार ने इस कानून को लागू करने की पहल की थी, लेकिन तब यूपीए सरकार रोड़ा बन गई थी। अब योगी सरकार उत्तर प्रदेश से संगठित अपराध समाप्त करने के लिए इसे हथियार बनाने जा रही है।
• इस कानून का सबसे अहम पक्ष यह है कि यदि आरोपी पहले आजीवन कारावास से दंडित किया गया है तो यूपीकोका में दूसरे अपराध के लिए उसे मृत्युदंड (फांसी) या आजीवन कारावास और न्यूनतम 25 लाख रुपये की सजा होगी।
• विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को यह विधेयक पेश किया। इसे विशेष रूप से इस सत्र में लाया गया है। पेशेवर अपराधियों पर अंकुश के लिए इस कानून में काफी सख्त कदम हैं। मसलन, पहले से दोषसिद्ध अपराधियों के अपराधों के लिए दंड के कड़े प्रावधान हैं।
• यदि पहले पांच वर्ष या उससे अधिक अवधि के लिए किंतु दस वर्ष से कम कारावास के लिए दंडित किया गया है तो आजीवन कारावास और न्यूनतम 25 लाख रुपये का अर्थदंड लगेगा।
• यदि पहले पांच वर्ष से कम अवधि के लिए दंडित किया गया है तो दोबारा आरोप तय होने पर पांच वर्ष से लेकर दस वर्ष तक का दंड और न्यूनतम 15 लाख रुपये का अर्थदंड लगेगा।
• मीडिया ट्रायल पर लगेगी रोक : यूपीकोका में मीडिया ट्रायल पर रोक का भी प्रावधान होगा। इसके तहत किसी सूचना को बिना विधिक प्राधिकार के देना या प्रकाशित करना, जिससे संगठित अपराध सिंडीकेट की सहायता संभावित हो और संगठित अपराध सिंडीकेट से प्राप्त किसी दस्तावेज या सामग्री को आगे भेजना अथवा उसका प्रकाशन या वितरण अपराध की श्रेणी में होगा। वहीं इस कानून के तहत किसी भी गवाह की पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी। गवाह को पूरी सुरक्षा भी दी जाएगी।
• यूपीकोका पर विपक्ष लामबंद : उधर प्रदेश में भाजपा सरकार की ओर से लाए जा रहे यूपीकोका के खिलाफ पूरा विपक्ष लामबंद है। बसपा प्रमुख मायावती ने जहां इसके दुरुपयोग की आशंका जताई है, वहीं सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे तानाशाही फैसले की संज्ञा दी है। कांग्रेस और रालोद ने भी इसके विरोध की बात कही है।

5. बैंक ऑफ इंडिया और यूबीआइ की निगरानी बढ़ाई रिजर्व बैंक ने
• भारतीय रिजर्व बैंक ने फंसे कर्ज यानी एनपीए को नियंत्रित करने में नाकामी के लिए बैंक ऑफ इंडिया (बीओआइ) और युनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया (यूबीआइ) पर सख्ती बढ़ा दी है। उसने तत्कालिक सुधारात्मक उपायों (पीसीए) के तहत बीओआइ पर नया कर्ज देने और लाभांश वितरण करने पर बंदिशें लगा दी है। आरबीआइ ने यूबीआइ पर पीसीए के तहत कड़ाई और बढ़ा दी है।
• बीओआइ ने स्टॉक एक्सचेंजों को जानकारी दी है कि पीसीए उपायों के तहत अगले मार्च में समाप्त वित्त वर्ष के दौरान उसकी जोखिम आधारित निगरानी की जाएगी। लगातार दो वर्षो तक एनपीए ज्यादा रहने, अपर्याप्त पूंजी और नकारात्मक रिटर्न के चलते यह कार्रवाई की गई है।
• बैंक ने उम्मीद जताई है कि इससे उसके जोखिम प्रबंधन, एसेट क्वालिटी, लाभप्रदता और कार्यकुशलता में सुधार होगा। मार्च 2017 में समाप्त वित्त वर्ष के दौरान बैंक का कुल एनपीए बढ़कर 13.22 फीसद हो गया। जबकि इससे पिछले वर्ष में उसका एनपीए 13.07 फीसद था। हालांकि शुद्ध एनपीए 7.79 फीसद से घटकर 6.90 फीसद रह गया।
• यूबीआइ ने भी स्टॉक एक्सचेंजों को जानकारी दी है कि आरबीआइ ने उसके खिलाफ अतिरिक्त कड़ाई के लिए 19 दिसंबर को पत्र जारी किया है। आरबीआइ की कड़ाई का फोकस बैंक का मुनाफा सुधारना, पूंजी में वृद्धि, क्रेडिट पोर्टफोलियो में विविधता, तार्किक विस्तारीकरण और लागत नियंत्रण पर होगा।
• बैंक ने कहा है कि वह ग्राहकों से जमा लेने, कर्ज देने और ट्रेजरी कामकाज जैसी गतिविधियां पूर्ववत करता रहेगा। आरबीआइ आइडीबीआइ बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और यूको बैंक पर भी इसी तरह की कार्रवाई कर चुका है।

6. योजनाओं के लिए आवंटित पूरी रकम खर्च न होने पर कैग फिक्रमंद
• देश के शीर्ष लेखा परीक्षक कैग ने विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए आवंटित राशि में से काफी राशि बिना खर्च के रह जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इस तरह की योजनाओं के लिए बजट तैयार करने की प्रक्रि या को नए सिरे से व्यवस्थित करने की जरूरत है।
• भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की संसद में पेश रिपोर्ट में इस बात पर गौर किया गया है कि विभिन्न योजनाओं के लिए आवंटित राशि में से संबद्ध मंत्रालयों ने काफी राशि लौटाई है जो कि खर्च नहीं हो पाई।
• इस तरह की योजनाओं में निर्भया कोष, मेक इन इंडिया, राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष, वरिष्ठ नागिरक कल्याण कोष और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम जैसी कई योजनाएं हैं जिनके लिए आवंटित राशि पूरी तरह खर्च नहीं हो पाई और उसे लौटा दिया गया। यह रिपोर्ट सरकार के 2016-17 खातों के विश्लेषण पर आधारित है।
• रिपोर्ट सरकार के विनियोग खातों और उनकी लेखापरीक्षा निष्कर्षो को लेकर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कैग ने इस पर गौर किया कि विभिन्न मंत्रालयों, विभागों के अनुदान, विनियोग के 12 विभिन्न मामलों में 1,90,270 करोड़ रुपये का जरूरत से ज्यादा आवंटन किया गया। यह आवंटन वर्ष 2016-17 के विनियोग अधिनियम में आवंटित राशि से अधिक किया गया।
• रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए आवंटित राशि में से काफी अधिक राशि (100 करोड़ रुपये से अधिक) को लौटाया गया। विभिन्न प्रकार के अनुदानों, विनियोग के तहत दी गई इस प्रकार की 2,28,640 करोड़ रुपये की राशि, इसमें वर्ष के दौरान अतिरिक्त अनुदान भी लिया गया जो कि अंतत: इस्तेमाल नहीं हुआ और वित्त वर्ष के आखिरी दिन उसे लौटा दिया गया।
• कैग ने कहा है कि इस विसंगति को दूर करने के लिए शुरुआत में ही बजट तैयार करने की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से व्यवस्थित करने की जरूरत है। इसके साथ ही बजट क्रियान्वयन की निगरानी पण्राली को भी मजबूत किया जाना चाहिए।
• रिपोर्ट के अनुसार निर्भया योजना के तहत महिला और बाल विकास मंत्रालय को आवंटित 286.27 करोड़ रुपये की राशि में से केवल 41.09 करोड़ रुपये ही वितरित किए गए। इसमें 245.18 करोड़ रपए बिना खर्च के ही रह गए। कई अन्य योजनाओं में भी पूरी राशि खर्च नहीं हो पाई।

7. भारत में बांग्लादेशी प्रवासियों की संख्या में 8 लाख की कमी आई
• भारत में रह रहे बांग्लदेशी प्रवासियों की संख्या में सन 2000 के बाद से 8 लाख की कमी आई हैं और अब यह संख्या 31 लाख पर पहुंच गई हैं।
• संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।सोमवार को यहां जारी की गई 2017 अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन रिपोर्ट के अनुसार, सन् 2000 में भारत में रहने वाले बांग्लदेशी प्रवासियों की संख्या 39 लाख थी।
• इसमें कहा गया कि भारत में रहने वाले सभी देशों के प्रवासियों की संख्या 52 लाख हैं। इसमें सन् 2000 से 12.2 लाख की गिरावट आई हैं। संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग (यूएनडीईएसए) के प्रवासी प्रभाग के प्रमुख बेला होवी ने कहा, रिपोर्ट में इस्तेमाल किए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय प्रवासियों की परिभाषा व्यापक है।
• इसमें शरणार्थी एवं आर्थिक प्रवासी और आधिकारिक एवं अनाधिकारिक रूप से विदेश में बसने वाले प्रवासियों समेत दूसरे देश में रहने वाला हर व्यक्ति शामिल है। रिपोर्ट में मौजूद यूएनडीईएसए की जनसंख्या प्रभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 1990 में भारत में बांग्लादेश से आए 43.75 लाख लोग रहते थे। रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में अभी भारत के 35,250 लोग रहते हैं।
• सन् 2000 में यह संख्या 22,811 थी जिसमें तब से लेकर 12,439 की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, सन् 2000 से भारत में रहने वाले पाकिस्तान से आए लोगों की संख्या में 258,000 की कमी आई है। भारत में अभी 10.95 लाख पाकिस्तानी प्रवासी रहते है, सन् 2000 में यह संख्या 13.53 लाख थी।
• रिपोर्ट में यह भी बताया गया इस अवधि के दौरान पाकिस्तान में भारत से आए प्रवासियों की संख्या में भी 288,000 की कमी आई है। अभी पाकिस्तान में रहने वाले भारतीय प्रवासियों की संख्या 18.73 लाख है जबकि स000 में यह संख्या 21.61 लाख थी।

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