दैनिक समसामयिकी 19 December 2017

1.यूएन की राय : आठ फीसद से तेज रहेगी भारत की रफ्तार
• भारत की अर्थव्यवस्था में तेज विकास की व्यापक क्षमता है। अगर सरकार सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाते हुए पूरी क्षमता का उपयोग कर सकी, तो अगले दो दशक तक इस देश की विकास दर आठ फीसद के ऊपर बनी रह सकती है।
• संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में आर्थिक मामलों के अधिकारी सेबेस्टियन वरगेरा ने यह बात कही है। यूएन ने अपनी हालिया रिपोर्ट में 2018 में भारत की आर्थिक विकास दर 7.2 फीसद और 2019 में 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है।
• वरगेरा ने भारत की आर्थिक स्थिति को व्यापक पैमाने पर सकारात्मक और विकास के अनुकूल बताया है। उनका कहना है कि देश को क्षमता के पूर्ण दोहन के लिए सुधारों की दिशा में अगला कदम बढ़ाना होगा।
• वरगेरा के मुताबिक, ‘इस पर विचार करने की जरूरत है कि कैसे लंबी अवधि में विकास को बरकरार रखा जाए। हमारे आकलन से भारत अगले कुछ साल ही नहीं, बल्कि 20 साल तक आठ फीसद से ज्यादा की विकास दर की क्षमता रखता है। इसके लिए भारत को सुधारों की अगली श्रृंखला लानी होगी।
• उदाहरण के तौर पर निवेश का बढ़ावा देने और लोगों के जीवनस्तर को बेहतर करने के कदम उठाने होंगे।’ पिछले हफ्ते यूएन की वार्षिक रिपोर्ट में 2017 के लिए भारत की विकास दर 6.7 फीसद रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है।
• वरगेरा का कहना है कि आर्थिक स्थितियां अनुकूल होने के बावजूद अभी विकास दर पहले के अनुमानों से कम रह सकती है।
• संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी ने निवेश और इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को लेकर भारत सरकार के प्रयासों की तारीफ की है। उन्होंने कहा, ‘अल्प अवधि में विकास को बढ़ावा देना और मध्य अवधि में आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना बहुत महत्वपूर्ण है।
• पिछले कुछ साल में एक के बाद एक नियामकीय सुधारों ने भी विकास को गति देने में भूमिका निभाई है। नोटबंदी ने निश्चित रूप से 2017 के शुरुआती महीनों में असर दिखाया था। बाजार में लिक्विडिटी की परेशानी हुई थी, लेकिन यह अस्थायी था। जैसे-जैसे वक्त बीता, कई कदम उठाए गए। छोटे उद्यमियों को क्रेडिट सपोर्ट जैसे वित्तीय राहत के फैसले लिए गए। इससे नोटबंदी से लगे झटके से छोटे उद्यमियों को उबरने में मदद मिली।
• दूसरी ओर, नोटबंदी ने बैंकिंग सेक्टर को फायदा पहुंचाया। इससे टैक्स बेस बढ़ा। इसलिए हमारा मानना है कि मध्यावधि में यह कदम अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद साबित होगा।’ वरगेरा ने 2017 को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सुधारों का वर्ष बताया।
• दो साल बाद दिखेगी अर्थव्यवस्था में तेजी : प्रमुख ग्लोबल बैंक एचएसबीसी ने वित्त वर्ष 2019-20 में भारत की आर्थिक विकास दर 7.6 फीसद रहने का अनुमान जताया है। बैंक के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था दो तरह की सूरतों में आगे बढ़ रही है। पहली, शॉर्ट टर्म में नरमी व धीरे-धीरे रिकवरी तथा दूसरी, मीडियम टर्म में तेजी।
• अभी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद की उठापटक से कई अहम सेक्टर उबरने के प्रयास में लगे हैं। 2017-18 और 2018-19 में इसका असर दिखेगा। वहीं, 2019-20 और इसके बाद विकास दर में तेजी आएगी। मध्यावधि में अकेले जीएसटी ही जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की वृद्धि दर में 0.40 फीसद तक के इजाफे की वजह बनेगा।
• वित्त मंत्रलय ने जीएसटी लागू करने, वल्र्ड बैंक की ओर से भारत की ईज ऑफ डूइंग रैंकिंग में बढ़ोतरी और मूडीज की ओर से रेटिंग बढ़ाने को 2017 की बड़ी उपलब्धियों में गिना है।

2. सरकार ने 66 हजार करोड़ के अनुदान की पूरक मांगें पेश कीं
• राजस्व संग्रह की चुनौतियों को दरकिनार करते हुए केंद्र सरकार खर्च बढ़ाने की तैयारी कर रही है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2017-18 के लिए 66,113 करोड़ रुपये की अनुदान की पूरक मांगें सोमवार को लोकसभा में पेश कीं। यह दूसरा मौका है जब मौजूदा वित्त वर्ष में अनुदान की पूरक मांगें पेश की गई हैं।
• इनके जरिये सरकार ने गरीबों को बिजली कनेक्शन मुहैया कराने और यूरिया सब्सिडी के लिए धनराशि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा है।
• वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अनुदान की पूरक मांगें लोकसभा में रखीं। इनमें 1,033 करोड़ रुपये का आवंटन गरीबों को बिजली मुहैया कराने की सरकार की नई योजना सौभाग्य (प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना) के लिए किया गया है।
• इसी तरह मनरेगा के लिए 3,594.57 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन किया गया है। इसके अलावा 20,532.5 करोड़ का आवंटन यूरिया सब्सिडी, जीएसटी नेटवर्क के लिए 960 करोड़ रुपये और 15,908 करोड़ रुपये राष्ट्रीय राजमार्गो के लिए उपलब्ध कराए गए हैं।
• वित्त मंत्री ने नई सेवाओं के लिए 1.3 करोड़ रुपये टोकन राशि आवंटित भी की है। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के हिसाब से पेंशन में वृद्धि के लिए भी 5,905 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। साथ ही भारतीय खाद्य निगम यानी एफसीआइ के लिए अतिरिक्त सब्सिडी के रूप में 3,480 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
• कुल मिलाकर जितनी धनराशि की मांग पूरक अनुदान मांगों के रूप में की गई है, उसमें शुद्ध नकद खर्च मात्र 33,379.99 करोड़ रुपये है, जबकि 32,732.05 करोड़ रुपये विभिन्न मंत्रलयों की बचत से आएगा।
• अनुदान मांगों के जरिये सरकार अधिक राशि खर्च करने की तैयारी कर रही है। वहीं दूसरी ओर राजस्व संग्रह के मोर्चे पर चुनौतियों के चलते राजकोषीय घाटा (सभी तरह के राजस्व और व्यय का अंतर) भी काबू से बाहर होने का खतरा है।
• हालांकि अब तक केंद्र सरकार कहती रही है कि चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखा जाएगा। किसी भी अतिरिक्त खर्च के लिए सरकार पूरक अनुदान मांगें पेश करती है। इन अनुदान मांगों के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होती है।

3. अणुओं के बीच अंतर का पता लगा सकता है मानव स्पर्श
• मानव स्पर्श से सतहों के बीच अणुओं की सिर्फ एक परत के अंतर को भी आसानी से महसूस किया जा सकता है। यह जानकारी वैज्ञानिकों ने दी है। इस बारे में किए गए अध्ययन में भारतीय मूल के भी एक वैज्ञानिक शामिल थे।
• मनुष्य रोजाना कांच, धातु, लकड़ी और प्लास्टिक की सतहों के संपर्क में आता है और इसकी पहचान आसानी से कर लेता है। इसकी वजह इन सतहों की अलग-अलग बनावट और स्पर्श के दौरान अलग-अलग दर से गर्मी का निकलना है। शोधकर्ता यह अध्ययन भी करना चाहते हैं कि क्या सिर्फ ऊपरी सतह को बदल देने के बाद भी मनुष्य नीचे की सतह का पता कर सकते हैं या नहीं।
• अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डेरेन लिपोमी ने कहा कि यह मानव द्वारा दिखाई गई अब तक की सबसे बड़ी स्पर्श संवेदनशीलता है।
• कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के एक अन्य प्रोफेसर वीएस रामचंद्रन ने कहा कि इस अध्ययन के जरिये पहली बार यह पता चला है कि मानवीय स्पर्श किस हद तक संवेदनशील होता है। इससे स्पर्श मनोचिकित्सा के प्रति नए दृष्टिकोण का आगाज होगा।
• इसका मौलिक ज्ञान इलेक्ट्रानिक त्वचा, कृत्रिम अंगों को विकसित करने में उपयोगी होगा। इस अध्ययन का प्रकाशन मैटेरियल्स होराइजन्स में किया गया है।

4. येरूशलम के मुद्दे पर प्रस्ताव को अमेरिका ने वीटो किया
• येरूशलम को इजरायल की राजधानी घोषित करने के अमेरिका के फैसले को वापस लेने को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सोमवार को मतदान हुआ।
• अमेरिका ने इसे वीटो कर दिया, जिससे प्रस्ताव रद्द हो गया। बाकी सभी 14 सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया। मिस्र ने प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया था। इसमें येरूशलम को लेकर हाल के फैसले पर अफसोस जाहिर करते हुए इसे वापस लेने की मांग की गई थी। इसमें ऐसे फैसले को वापस लिए जाने और उसको अवैधानिक करार दिए जाने को भी कहा गया।
• अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दशकों पुरानी नीति को पलटते हुए इस महीने येरूशलम को इजरायल की राजधानी की मान्यता दे दी थी। इसका दुनिया भर में खासकर अरब और मुस्लिम देशों में जमकर विरोध हो रहा है।

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