PCS Mains ब्रह्मांडीय किरणों ने खोजा पिरामिड में गलियारा, खोज जारी

आभार-मुकुल व्यास

मिस्र में गिजा का महान पिरामिड प्राचीन विश्व के सात आश्चर्यों में सबसे पुराना और सबसे ज्यादा रहस्यपूर्ण है। अब पुरातत्वशास्त्रियों ने इस पिरामिड के अंदर एक छिपा हुआ गलियारा खोजकर इसके रहस्य को और बढ़ा दिया है। 19वीं सदी के बाद पिरामिड के अंदर पहली बार ऐसी बड़ी संरचना का पता चला है। नया गलियारा करीब 30 मीटर लंबा है और यह ग्रैंड गैलरी के ठीक ऊपर है। ग्रैंड गैलरी रानी के कक्ष को राजा के कक्ष से जोड़ती है। यह अभी स्पस्ट नहीं है कि यह खाली जगह कोई कक्ष या गलियारा है अथवा इसे ग्रैंड गैलरी के ऊपर भार को काम करने के उद्देश्य से निर्मित किया गया था।

वैज्ञानिकों ने नई संरचना की खोज खास सेंसरों की मदद से की है। इन सेंसरों की मदद से म्यूऑन कणों का पता लगाया जाता है। ये कण पृथ्वी पर उस समय बरसते हैं जब ब्रह्मांडीय किरणें पृथ्वी के ऊपर वायुमंडल में अणुओं पर प्रहार करती हैं। म्यूऑन कण लगभग प्रकाश की गति से आगे बढ़ते हैं और सामने किसी वस्तु के आने पर एक्स-रे जैसा व्यवहार करते हैं। उपयुक्त उपकरणों की मदद से रिसर्चर म्यूऑन कणों के जरिए पिरामिडों और अन्य प्राचीन इमारतों के भीतर अज्ञात संरचनाओं का पता लगाते हैं।

मिस्र के महान पिरामिड को खुफू का पिरामिड और पिरामिड ऑफ केओप्स भी कहते हैं। इसका निर्माण फराओ खुफू ने चौथे राजवंश के दौरान किया था। खुफू ने 2509 से 2483 ईसा पूर्व में शासन किया था। गिजा के पठार पर बना यह पिरामिड करीब 140 मीटर ऊंचा है। पिछली खोजों के दौरान इसमें तीन कक्षों का पता चला था जिनमें रानी का कक्ष और राजा का कक्ष शामिल हैं। इन कक्षों में जो कुछ भी खजाना था, वह बहुत पहले लूट लिया गया था। इस पिरामिड का निर्माण कैसे हुआ, इसका कोई विश्वसनीय विवरण उपलब्ध नहीं है। हालांकि इजिप्टोलिस्ट्स ने इसके निर्माण के बारे में कई थियरी पेश की हैं। ग्रीक इतिहासकार हेरोडोटस के वर्णन के अनुसार, पिरामिड निर्माण के लिए आसपास की खदानों से बड़े पत्थर लाए गए थे। इनमें से कुछ पत्थरों को नील नदी से नावों के जरिए निर्माण-स्थल पर पहुंचाया गया था। इसके निर्माण में हजारों श्रमिकों को लगाया गया, जिन्हें खाने के लिए प्याज, लहसुन और मूलियां दी जाती थीं।

पिरामिड के भीतर नई संरचना का पता लगाने के लिए जापान की नागोया यूनिवर्सिटी और केईके हाई एनर्जी फिजिक्स प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों ने रानी के कक्ष के आसपास म्यूऑन डिटेक्ट करनेवाली फटॉग्रफिक प्लेट्स और इलेक्ट्रॉनिक म्यूऑन डिटेक्टर की स्थापना की। उसी समय फ्रांस के ऊर्जा रिसर्च संगठन सीइए ने पिरामिड के बाहर ‘म्यूऑन टेलिस्कोप’ तैनात किए। ये तीनों तकनीकें बता सकती हैं कि म्यूऑन कण किस दिशा से आ रहे हैं। सभी रिसर्चरों के नतीजों में पिरामिड में एक नए गलियारे की मौजूदगी का संकेत मिला।

म्यूऑन विश्लेषण से वैज्ञानिक प्राचीन इमारतों में छेद किए बगैर अंदर तक देख सकते हैं। इस तकनीक से बहुमूल्य इमारतों को नुकसान नहीं होता। लेकिन इस तकनीक से कम रिजोलुशन वाली तस्वीरें मिलती हैं जिनके आधार पर रिसर्चरों के लिए यह पता लगाना मुश्किल है कि नई संरचना ग्रैंड गैलरी के ऊपर है या उसके समानांतर। यह बात भी यकीनी तौर पर नहीं कही जा सकती कि यह एक ही गलियारा है या छोटे-छोटे कक्षों की श्रृंखला है। फिलहाल रिसर्चरों का इरादा नए गलियारे में ड्रिलिंग करने का नहीं है। वे एक सूक्ष्म फ्लाइंग रोबॉट विकसित कर रहे हैं जिसे मिस्री अधिकारियों की अनुमति मिलने पर पिरामिड के अंदर भेजा जाएगा।

गिजा के पिरामिड के बारे में कई सवाल अनुत्तरित हैं। हमें आज भी यह नहीं मालूम कि करीब 5000 वर्ष पहले ये इमारतें किस तकनीक से बनाई गई थीं और इन्हें बनाने का वास्तविक उद्देश्य क्या था। नई वैज्ञानिक तकनीकों की मदद से शायद हम पिरामिडों में छिपे रहस्यों को उजागर करने में कामयाब हो जाएं।

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