ब्लैक होल में वैज्ञानिकों ने पुनः गुरुत्वाकर्षण तरंगें खोजीं

वैज्ञानिकों ने एक बार फिर से ब्लैक होल में गुरुत्वाकर्षण तरंगों अर्थात ग्रेवीटेशनल वेव्स की खोज की है। पृथ्वी से करीब एक अरब प्रकाश वर्ष दूर और सूर्य से क्रमश: 7 और 12 गुना अधिक भार वाले दो हल्के ब्लैक होल के आपस में मिलने से इन तरंगों की खोज हुई।

दोनों ब्लैक होल जब आपस मिले तो इनका द्रव्यमान सूर्य से 18 गुना ज्यादा था। वैज्ञानिकों के अनुसार ब्लैकहोलों के टकराने पर स्पेस और समय के संबंध का पता लगता है।

प्रमुख तथ्य:

लेजर इन्फ्रोमीटर ग्रेवीटेशनल वेव्स ऑब्जर्वेटरी यानी लिगो परियोजना और इटली स्थित वर्गो डिटेक्टर से जुड़े वैज्ञानिकों ने इस घटना का 8 जून को पता लगाया था। हालांकि दो अन्य खोजों को समझने के लिए आवश्यक समय की वजह से इसकी घोषणा में देरी हुई। GW170608 सबसे हल्का ब्लैक होल है। ऐसा पहली बार हुआ है जब गुरुत्वाकर्षण तरंगों के माध्यम से ब्लैक होल का पता लगाया गया है।

गौरतलब है कि महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने सौ साल पहले ग्रेवीटेशनल वेव्स की परिकल्पना की थी। पहली बार 14 सितंबर, 2015 को इन वेव्स की खोज हुई। तब इसे सदी की महान खोज कहा गया था।

2017 का भौतिक विज्ञान का पुरस्कार लिगो परियोजना को शुरू करने वाले वैज्ञानिकों राइनर वाइस, बैरी बैरिश और किप थोर्ने को मिला था। वैज्ञानिकों के मुताबिक गुरुत्वाकर्षण तरंगों के पता लगने से ब्रह्मांड के बारे में समझ का नया युग शुरू होगा।

गुरुत्वाकर्षण तरंगों की उत्पत्ति:

वैज्ञानिक मानते हैं कि कई खरब साल पहले जब इस सृष्टि की शुरुआत भी नहीं हुई थी, तो दो विशालकाय ब्लैक होल आपस में टकराए थे। उनकी टक्कर से बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकली थी। इतनी ऊर्जा कि हजारों सूर्य की ऊर्जा भी मिला दें, तो उसके सामने फीकी पड़ जाए। इसी के साथ ही कई तरंगें भी पैदा हुईं और पूरे ब्रह्मांड में फैल गईं।

इन्हीं तरंगों को गुरुत्वाकर्षण तरंग कहा जाता है और माना जाता है कि ये तरंगें आज भी भटक रही हैं, जो अक्सर हमसे और हमारी धरती से टकराती हैं, पर असर इतना कम होता है कि हम इन्हें महसूस नहीं कर पाते, इन्हें सिर्फ अति-संवेदनशील उपकरणों के जरिये ही पकड़ा जा सकता है।

माना जाता है कि गुरुत्वाकर्षण तरंगें क्योंकि सृष्टि के आरंभ से जुड़ी हैं, इसलिए हम सृष्टि की शुरुआत के बहुत से रहस्यों को समझ सकते हैं। कहा जाता है कि उस ‘डार्क मैटर’ को समझने की कुंजी भी गुरुत्वाकर्षण तरंगों में छिपी है, जो हमारे अस्तित्व का एक बड़ा हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें हम जान, समझ और देख नहीं पाए हैं।

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