दैनिक समसामयिकी 15 November 2017

1.मोदी ने आसियान नेताओं का किया आह्वान और बोले अब आतंक के खात्मे का वक्त
• प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को आसियान सदस्य देशों के नेताओं को संबोधित करते हुए कहा है कि हमारे समक्ष एकजुट होकर आतंकवाद को खत्म करने के बारे में सोचने का समय आ गया है।
• उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में संयुक्त प्रयासों का आह्वान करते हुए कहा कि भारत को इसके चलते बहुत अधिक नुकसान उठाना पड़ा है। मोदी ने कहा कि भारत क्षेत्र के लिए नियम आधारित सुरक्षा व्यवस्था ढांचे के लिए भारत आसियान को अपना समर्थन जारी रखेगा।
• मोदी ने कहा, हमें आतंकवाद के कारण नुकसान उठाना पड़ा है। हमारे समक्ष एकजुट होकर आतंकवाद को खत्म करने के बारे में सोचने का समय आ गया है। उन्होंने कहा, आसियान के 50 वर्ष गौरव, उल्लास और आगे की ओर सोचना का मौका है।
• उन्होंने कहा, भारत आसियान को अपने एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत प्रमुखता से रखता है।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, आसियान के साथ हमारे संबंध पुराने हैं और हम सहयोग को और मजबूत करना चाहते हैं। उन्होंने आसियान नेताओं से कहा, हम क्षेत्र में कानून आधारित सुरक्षा व्यवस्था के लिए आसियान को अपना समर्थन जारी रखेंगे।
• आसियान के साथ व्यापार संबंधों को मजबूत बनाने का समर्थन करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, भारत और आसियान देशों के बीच समुद्री संपर्क हजारों वर्ष पूर्व स्थापित हुआ। इससे हमारा पूर्व में व्यापार संबंध रहा। हमें इसे और मजबूत बनाने के लिए साथ मिलकर काम करना है।
• थाईलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया, मलयेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, म्यांमार, कंबोडिया, लाओस और ब्रुनेई इस दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संघ (आसियान) के सदस्य देश हैं।

2. और पुख्ता हुई चार देशों के गठबंधन की कूटनीति
• फिलीपींस की राजधानी मनीला में आसियान और ईस्ट एशिया सम्मेलन के दूसरे दिन भी अमेरिका, भारत, जापान और आस्ट्रेलिया के बीच गठित नए गठबंधन की कूटनीति हावी रही।
• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को जापान के प्रधानमंत्री शिंजो एबी और आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल के साथ अलग- अलग मुलाकात कर गठबंधन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर बात की। प्रधानमंत्री मोदी की वियतनाम और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्रियों और ब्रुनेई के सुल्तान से भी अलग-अलग मुलाकात हुई जो हिन्द -प्रशांत महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को देखते हुए बेहद महत्वपूर्ण है।
• चार देशों के बीच बने इस गठबंधन को लेकर इन देशों के विदेश मंत्रलयों के अधिकारियों की पहली बैठक पिछले रविवार को मनीला में ही हुई है। लेकिन, उसके दो दिनों के भीतर ही इन चारों देशों के सरकारों के प्रमुखों की अलग-अलग आपस में मुलाकात हो चुकी है। सोमवार को अगर प्रधानमंत्री मोदी की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मुलाकात हुई तो उसी दिन ट्रंप की एबी और टर्नबुल से भी अलग-अलग बैठक हुई।
• मंगलवार को मोदी की एबी और टर्नबुल के साथ द्विपक्षीय मुलाकात हुई। कूटनीतिक जानकारों के मुताबिक, चारों देशों के प्रमुखों ने जानबूझकर साझा बैठक नहीं की। साझा बैठक होने से चीन को थोड़ा ज्यादा कड़वा संदेश चला जाता। लेकिन, द्विपक्षीय स्तर पर होने वाली इन बैठकों में भी जिस तरह से हिन्द और प्रशांत महासागर क्षेत्र में सुरक्षा के मुद्दे को आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया गया है, वह संदेश देने के लिए काफी है।
• माना जा रहा है कि जल्द ही चारों देश अपने विदेश, रक्षा व वित्त मंत्रियों की अलग-अलग बैठक की घोषणा करेंगे। उसके बाद ही राष्ट्र प्रमुखों की संयुक्त बैठक प्रस्तावित की जाएगी। वैसे यह बात अब पक्की लग रही है कि भारत-अमेरिका-जापान के बीच होने वाले नौसैनिक अभ्यास में आस्ट्रेलिया को जल्द ही शामिल कर लिया जाएगा।
• संभवत: अगले वर्ष जो सैन्य अभ्यास होगा उसमें आस्ट्रेलिया शामिल होगा। तीन देशों का पिछला सैन्य अभ्यास कुछ महीने पहले बंगाल की खाड़ी में हुआ था। जापान इस गठबंधन को लेकर सबसे ज्यादा उत्साहित है। वह इसे सिर्फ सैन्य या सुरक्षा तक सीमित नहीं रखना चाहता बल्कि वह इसका आर्थिक व निवेश के क्षेत्र में भी विस्तार करने का इच्छुक है।
• विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पूर्व) प्रीति सरन के मुताबिक, मोदी और एबी के बीच द्विपक्षीय हितों के साथ ही वैश्विक हितों को लेकर काफी अच्छी चर्चा हुई है। इसमें भारत और जापान की मदद से एशिया-अफ्रीका कॉरीडोर बनाने को लेकर भी विमर्श हुआ। इस बारे में पिछले दिनों जब एबी भारत आए थे तब यह सहमति बनी थी कि दोनों देश एशिया से लेकर अफ्रीका तक में रेल व सड़क नेटवर्क तैयार करेंगे और इसे कई औद्योगिकी पार्को से जोड़ा जाएगा।
• माना जाता है कि यह चीन की प्रस्तावित वन बेल्ट वन रोड (ओबोर) का मुकाबला करेगा। अमेरिका ने भी भारत और जापान की इस रणनीति का स्वागत किया है। आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के साथ मोदी की बातचीत में हिन्द -प्रशांत महासागर सुरक्षा मुद्दों के साथ आतंकवाद का मुद्दा सबसे अहम रहा।

3. गणतंत्र दिवस समारोह में होंगे 10 मुख्य अतिथि

• भारत के 69वें गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह में पहली बार एक की बजाए दस आसियान देशों के नेता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह नेता भारत एवं आसियान के बीच संवाद स्थापित होने के 25 साल पूरे होने के अवसर पर भारत आसियान विशेष स्मृति शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे।
• मोदी ने 15वें भारत आसियान शिखर सम्मेलन में कहा, भारत-आसियान संवाद साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ के समारोह की थीम ‘‘साझा मूल्य समान नियति’ बिल्कुल उपयुक्त है। हमने बहुत से कार्यक्रम मिलजुल कर आयोजित किये हैं।
• प्रधानमंत्री ने कहा, 25 जनवरी 2018 को नई दिल्ली में भारत-आसियान विशेष स्मृति शिखर सम्मेलन में आसियान नेताओं का स्वागत करने के लिए वह व्यक्तिगत रूप से उत्सुक है।
• उन्होंने कहा, 69वें गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथियों के रूप में आसियान देशों के नेताओं का स्वागत करने के लिए सवा सौ करोड़ भारतवासी इंतजार कर रहे हैं।

4. जस्टिस भंडारी के आइसीजे में दूसरे कार्यकाल में सुरक्षा परिषद का रोड़ा

• अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आइसीजे) में बतौर जज दूसरे कार्यकाल के लिए भारत के जस्टिस दलवीर भंडारी की दावेदारी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अटक गई। पांच दौर के चुनाव में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज भंडारी संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारी समर्थन पाने में सफल रहे लेकिन उन्हें सुरक्षा परिषद में बहुमत नहीं मिल पाया।
• सुरक्षा परिषद में ब्रिटेन के क्रिस्टोफर ग्रीनवुड को बढ़त मिली। आइसीजे जज चुने जाने के लिए दोनों जगहों पर बहुमत हासिल करना अनिवार्य है। 1हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की पांच सीटों के लिए पिछले गुरुवार को छह में से चार उम्मीदवारों को चुन लिया गया था। एक सीट के लिए महासभा और सुरक्षा परिषद में सोमवार को दोबारा मतदान हुआ।
• सुरक्षा परिषद के पांचों दौर के चुनाव में क्रिस्टोफर को नौ और भंडारी को पांच वोट मिले। जबकि महासभा में भंडारी को सभी दौर के चुनाव में स्पष्ट बहुमत हासिल हुआ। यहां भंडारी को 121 और क्रिस्टोफर को महज 68 मत मिले। इस स्थिति को देखते हुए महासभा और सुरक्षा परिषद ने चुनाव स्थगित करने का फैसला किया। इस बारे में अब बाद में निर्णय लिया जाएगा। अभी किसी तारीख की घोषणा नहीं की गई है।
• इससे पहले गुरुवार को हुए चुनाव में भी 70 वर्षीय भंडारी को महासभा में बहुमत मिल गया था लेकिन सुरक्षा परिषद में वह क्रिस्टोफर से पिछड़ गए थे। भंडारी 2012 में पहली बार आइसीजे के जज चुने गए थे। उनका कार्यकाल अगले साल फरवरी में समाप्त होने वाला है।
• थरूर ने ब्रिटेन की आलोचना की : कांग्रेस नेता और पूर्व राजनयिक शशि थरूर ने आइसीजे चुनाव को लेकर ब्रिटेन की आलोचना की है। उन्होंने ट्वीट किया कि ब्रिटेन संयुक्त राष्ट्र महासभा के बहुमत की इच्छा को बाधित करने का प्रयास कर रहा है।
• जाधव मामले से रहा जुड़ाव : भारत की विभिन्न अदालतों में 20 साल से ज्यादा समय तक कार्यरत रहे भंडारी सुप्रीम कोर्ट में जज बनने से पहले बांबे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस व दिल्ली हाई कोर्ट में जज रहे।
• भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव मामले में फैसला सुनाने वाली आइसीजे की 11 सदस्यीय पीठ में भंडारी भी थे। पाक की सैन्य अदालत ने जाधव को फांसी की सजा दी थी। आइसीजे ने इस पर अंतरिम रोक लगाने का फैसला दिया था।
• जीत के लिए बहुमत जरूरी : आइसीजे में 15 जज होते हैं। इनमें से एक तिहाई सीटों के लिए हर तीन साल पर चुनाव होता है। इन्हें नौ साल के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद में एक साथ चुनाव से चुना जाता है। चुने जाने के लिए 193 सदस्यीय महासभा में 97 और 15 सदस्यों वाली सुरक्षा परिषद में आठ मत पाना जरूरी है।

5. ‘‘न्यायपालिका की बदनामी को एसआईटी जांच का राग’

• जजों के नाम पर रिश्वत लेने की जांच एसआईटी से कराने की मांग सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने वरिष्ठतम जज की फैसले की आलोचना की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका में दरार पैदा करने के लिए एक ही तरह की दो याचिकाएं दायर की गई ताकि मनपसंद बेंच सुनवाई कर सके।
• जस्टिस राजेश कुमार अग्रवाल, अरुण मिश्रा और अजय खानविलकर की बेंच ने कहा कि अपनी मनपसंद बेंच के सामने केस सूचीबद्ध कराने की हकरत अपने आप में अदालत की अवमानना है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने याची कामिनी जायसवाल और वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ किसी तरह की कार्यवाही शुरू नहीं की।
• सुप्रीम कोर्ट ने वकील कामिनी जायसवाल की याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि सीबीआई की प्राथमिकी किसी न्यायाधीश के खिलाफ नहीं है और किसी न्यायाधीश के खिलाफ इस तरह की शिकायत दर्ज करना भी संभव नहीं है।
• अदालत ने मामले में एक न्यायाधीश को सुनवाई से हटाने के लिए प्रयास करने पर भी प्रतिकूल टिप्पणी की और कहा कि यह उचित नहीं है। जायसवाल ने वरिष्ठ वकील शांति भूषण और प्रशांत भूषण के माध्यम से मामले में जस्टिस खानविलकर के हटने की मांग की थी। खानविलकर ने खुद को मामले से हटने से इंकार कर दिया था।
• अदालत ने कहा कि इस तरह की याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट जैसे प्रतिष्ठित संस्थान को नुकसान पहुंचाया गया है और इसकी ईमानदारी पर अनावश्यक संदेह पैदा किया गया है। याचिका में दावा किया गया था कि मेडिकल कॉलेजों से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए कथित तौर पर रिश्वत लेने के आरोप लगाए गए थे। इसमें उड़ीसा हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश इशरत मसरूर कुदुशी भी आरोपी हैं।
• सीबीआई ने उसे गिरफ्तार भी किया था। वह अन्य अभियुक्तों के साथ जमानत पर हैं। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने रिश्वत कांड की जांच एसआईटी से कराने का अनुरोध ठुकराते हुए कहा कि जस्टिस चेलमेश्वर ने सुप्रीम कोर्ट के पांच वरिष्ठतम न्यायाधीशों की संविधान पीठ का गठन करके गलत निर्णय दिया।
• संविधान पीठ का गठन न्यायिक आदेश के माध्यम से नहीं किया जा सकता। बेंच गठन करने का सर्वाधिकार सीजेआई के पास है। वहीं प्रशासनिक स्तर पर बेंच का गठन करते हैं और मामलों को सूचीबद्ध करने का आदेश दे सकते हैं।
• सुप्रीम कोर्ट ने अपने 38 पृष्ठ के फैसले में कहा कि सीजेआई तथा न्यायपालिका के खिलाफ निराधार आरोप लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

6. प्रोन्नति में एससी-एसटी को आरक्षण का मामला संविधान पीठ को
• एससी-एसटी को प्रोन्नति में आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट की दो न्यायाधीशों की पीठ ने विचार के लिए संविधान पीठ को भेज दिया है। जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस आर. भानुमति की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 145 (3) के तहत मामले को संविधान पीठ को सुनवाई के लिए भेजा है।
• कोर्ट ने आदेश दिया कि संविधान पीठ के गठन के लिए मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष पेश किया जाए। याचिकाकर्ता अंतरिम राहत की मांग भी संविधान पीठ से ही करेंगे।
• पांच पांच न्यायाधीशों की दो पीठों के दो मामलों ईवी चेन्नैया और एम नागराज के फैसलों में अंतर होने के कारण इस मामले को संविधान के अनुच्छेद 16(4)(ए) और 16 (4)(बी) तथा 335 की व्याख्या के लिए संविधानपीठ को भेजा गया है।
• मामला अनुच्छेद 145(3) के तहत भेजा गया है जो संवैधानिक प्रावधान की व्याख्या से जुड़े मामले पर संविधानपीठ के सुनवाई करने की बात कहता है। ये मामला बहुत महत्वपूर्ण है और इससे एससी एसटी को प्रोन्नति में आरक्षण के मामले में पिछले 11 वर्षो से चली आ रही व्यवस्था बदल सकती है।
• चूंकि पांच-पांच न्यायाधीशों की दो पीठों के अलग-अलग फैसले हैं। ऐसे में यह मामला सात न्यायाधीशों की पीठ को जा सकता है। पांच न्यायाधीशों ने ईवी चेन्नैया मामले में 2005 में आंध्र सरकार द्वारा एससी एसटी वर्ग में किये गए वर्गीकरण को असंवैधानिक ठहरा दिया था।
• कोर्ट ने कहा था कि एससी एसटी के मामले में राष्ट्रपति के आदेश से जारी सूची में कोई छेड़छाड़ नहीं हो सकती उसमें सिर्फ संसद ही कानून बना कर बदलाव कर सकती है। इसके बाद 2006 में पांच न्यायाधीशों ने एम नागराज के मामले में एससी एसटी को प्रोन्नति में आरक्षण के कानून पर विचार किया। इस फैसले में कोर्ट ने कानून को तो सही ठहराया था लेकिन कहा था कि प्रोन्नति में आरक्षण देने से पहले सरकार को पिछड़ेपन और पर्याप्त प्रतिनिधित्व न होने के आकड़े जुटाने होंगे।
• 2006 से यही फैसला कानून के तौर पर लागू था और इसी के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2012 में यूपी पावर कारपोरेशन के केस में उत्तर प्रदेश का प्रोन्नति में आरक्षण का कानून रद कर दिया था। इसी के आधार पर मध्य प्रदेश, त्रिपुरा, बिहार और चंडीगड़ प्रशासन के मामले में उच्च न्यायालयों ने एससी एसटी को दिया गया प्रोन्नति में आरक्षण रद कर दिया था।
• ये सारे मामले सुप्रीम कोर्ट में आये थे जिन्हें आज संविधानपीठ को भेजा गया है। प्रोन्नति में आरक्षण रद होने के खिलाफ कोर्ट पहुंची मध्य प्रदेश सरकार के वकील वी शेखर व मनोज गोरकेला, और एससी एसटी कर्मचारी संघ के वकील डॉक्टर केएस चौहान व इंद्रा जयसिंह ने नागराज के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की। उनका कहना था कि एससी एसटी के मामले में क्रीमीलेयर का फार्मूला लागू नहीं होगा इसलिए पिछड़ेपन के आंकड़े नहीं मांगे जा सकते।
• इन लोगों ने ईवी चेन्नया और इंद्रा साहनी के फैसले का हवाला दिया जबकि दूसरी तरफ से राजीव धवन और परिमल कुमार ने मांग का विरोध किया और कहा कि एम नागराज में दी गई व्यवस्था बिल्कुल ठीक है। बताते चलें कि महाराष्ट्र का प्रोन्नति में आरक्षण का मामला बुधवार को तीन न्यायाधीशों की पीठ के सामने सुनवाई पर लगा है। इस आदेश का उस मामले पर भी असर पड़ सकता है।

7. नेशनल पावर पोर्टल पर पाएं बिजली से जुड़ी सभी जानकारी

• अब बिजली से जुड़ी सभी जानकारी आपको एक ही पोर्टल पर मिलेगी। बिजली मंत्री आरके सिंह ने देश में बिजली के बारे में सभी प्रकार सूचना एक जगह प्राप्त करने और उसके प्रसार के लिए अलग मंच नेशनल पावर पोर्टल (एनपीपी) पेश किया।
• यहां जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार नेशनल पावर पोर्टल ‘‘एनपीपी डाट गाव डाट इन’ को केंद्रीय बिजली प्राधिकरण (सीईए), बिजली वित्त निगम, रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कारपोरेशन (आरईसी) तथा अन्य बड़ी कंपनियों के साथ एकीकृत किया गया है।
• एनपीपी डैश बोर्ड इस तरह से डिजाइन और विकसित किया गया है जिससे यह जीआईएस युक्त नेविगेशन और विजुअल चार्ट के माध्यम से राष्ट्रीय, राज्य, बिजली वितरण कंपनियों, शहर, फीडर स्तर पर क्षमता, उत्पादन, पारेषण, वितरण तथा राज्यों को योजना आधारित धन पोषण आदि के बारे में सूचना देगा।
• बयान में कहा गया है, यह देश में विद्युत क्षेत्र के लिए केंद्रीयकृत पण्राली है जो देश में बिजली उत्पादन से लेकर संप्रेषण और वितरण से संबंधित दैनिक, मासिक और वार्षिक आनलाइन आंकड़ा उपलब्ध कराएगी।

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