सूफी , सूफीवाद के बारे में ,Target UPPSC 2018

  • अबू नस्र अल सिराज की पुस्तक के आधार पर माना जाता है कि, सूफ़ी शब्द की उत्पत्ति अरबी शब्द ‘सूफ़’ (ऊन) से हुई,
  • जिसे प्रारम्भिक सूफ़ी लोग पहना करते थे। ‘
  • सफ़ा’ से भी उत्पत्ति मानी जाती है। सफ़ा का अर्थ ‘पवित्रता’ या ‘विशुद्धता’ से है।
  • इस प्रकार आचार-व्यवहार से पवित्र लोग सूफ़ी कहे जाते थे।
  • एक और धारणा के अनुसार हजरत मुहम्मद साहब द्वारा मदीना में निर्मित मस्जिद के बाहर सफ़ा अर्थात् ‘मक्का की पहाड़ी’ पर कुछ लोगों ने शरण लेकर अपने को खुदा की अराधना में लीन कर लिया, इसलिए वे सूफ़ी कहलाये।
  • सूफ़ी चिन्तक इस्लाम का अनुसरण करते थे
  • वे कर्मकाण्ड का विरोध करते थे।
  • प्रारम्भिक सूफ़ियों में ‘रबिया’ (8वीं सदी) एवं ‘मंसूर हल्लाज’ (10 वीं सदी) का नाम महत्त्वपूर्ण है।
  • मंसूर हल्लाज ऐसे पहले सूफ़ी साधक थे, जो स्वयं को ‘अनलहक’ घोषित कर सूफ़ी विचारधारा के प्रतीक बने।
  • सूफ़ी संसार में सबसे पहले इब्नुल अरबी द्वारा दिये गये सिद्धान्त ‘वहदत-उल-वुजूद’ का उलेमाओं ने जमकर विरोध किया। वहदत-उल-वुजूद का अर्थ है – ईश्वर एक है
  • वहदत-उल-वुजूद एकेश्वरवाद का समनार्थी है।
  • भारत में इस आन्दोलनों का आरम्भ दिल्ली सल्तनत से पूर्व ही हो चुका था।

 

विभिन्न सम्प्रदाय तथा उनके संस्थापक

चिश्ती सम्प्रदाय——- ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती (12 वीं शताब्दी)
सुहरावर्दी सम्प्रदाय ———-शिहाबुद्दीन सुहरावर्दी (12वीं शताब्दी)
कादिरी सम्प्रदाय शेख़ ———-अब्दुल कादिर जिलानी (16वीं शताब्दी)
शत्तारी सम्प्रदाय——— शाह अब्दुल शत्तारी (15वीं शताब्दी)
फ़िरदौसी सम्प्रदाय——- बदरूद्दीन
नक़्शबन्दी सम्प्रदाय——– ख़्वाजा बाकी विल्लाह (16वीं शताब्दी)

 

सूफ़ी सन्त एवं उनकी उपाधियाँ
शेख़ निज़ामुद्दीन औलिया ———-महबूबे इलाही
शेख़ नासिरुद्दीन महमूद ———-चिराग-ए-दिल्ली
सैय्यद मुहम्मद गेसूदराज ———-बन्दा नवाज
शेख़ अहमद सरहिन्दी ———-मुजदिह आलिफसानी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *