दिल्ली दरबार 1877 व 1903 व 1911 Points to remember for exam UPPCS Lower and Upper

दिल्ली दरबार,  इंगलैंड के महाराजा या महारानी के राजतिलक की शोभा में सजते थे। सन 1877 से 1911 के बीच तीन दरबार लगे थे। सन 1911 का दरबार एकमात्र ऐसा था, कि जिसमें सम्राट स्वयं, जॉर्ज पंचम पधारे थे।

1877 का दरबार

  • सन 1877 का दरबार, 1 जनवरी 1877 को महारानी विक्टोरिया को भारत की साम्राज्ञी घोषित और राजतिलक करने हेतु लगा था।
  • 1877 का दरबार, मुख्यतः एक आधिकारिक घटना मात्र थी.
  • इस दरबार का मुख्य बिन्दु था- ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी से अधिकांश सत्ता परिवर्तन  ब्रिटिश सरकार को होना था।

1903 का दरबार

  • एडवर्ड सप्तम एवं महारानी एलेक्जैंड्रा को भारत के सम्राट एवं सम्राज्ञी घोषित करने हेतु लगा था।
  • लॉर्ड कर्ज़न द्वारा दो पूरे सप्ताहों के कार्यक्रम आयोजित करवाये गये थे।
  •  इस धूम धाम का मुकाबला ना तो 1877 का, ना ही 1911 का दरबार कर पाया।

1911 का दरबार (दिल्ली का कोरोनेशन पार्क)

  • दिसंबर में महाराजा जॉर्ज पंचम एवं महारानी मैरी के भारत के सम्राट एवं सम्राज्ञी बनने पर राजतिलक समारोह हुआ था।
  • व्यवहारिक रूप से प्रत्येक शासक राजकुमार, महाराजा एवं नवाब तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति, सभापतियों को अपना आदर व्यक्त करने पहुंचे। सम्राट्गण अपनी शाही राजतिलक वेशभूषा में आये थे।
  • सम्राट ने आठ मेहराबों युक्त भारत का इम्पीरियल मुकुट पहना, जिसमें छः हजार एक सौ सत्तर उत्कृष्ट तराशे हीरे, जिनके साथ नीलम, पन्ना और माणिक्य जड़े थे। साथ ही एक शनील और मिनिवर टोपी भी थी, जिन सब का भार 965 ग्राम था।
  • पटियाला की महारानी की ओर से गले का खूबसूरत हार भेंट किया गया था।
  • यह भारत की सभी स्त्रियों की ओर से महारानी की पहली भारत यात्रा के स्मारक स्वरूप था।

दिल्ली दरबार 1911 में लगभग 26,800 पदक दिये गये, जो कि अधिकांशतः ब्रिटिश रेजिमेंट के अधिकारी एवं सैनिकों को दिये गये थे। भारतीय रजवाड़ों के शासकों और उच्च पदस्थ अधिकारियों को भी एक छोटी संख्या में स्वर्ण पदक दिये गये थे।

 

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