बौद्ध साहित्य की सूची ( Ancient History Short Notes)

त्रिपिटक ( विनयपिटक,अभिधम्मपिटक,सुत्तपिटक)

त्रिपिटक बौद्ध धर्म के भगवान बुद्ध के उपदेश तीन साहित्य खंडों में संकलित हैं। इन्हें ‘त्रिपिटक’ कहते हैं। ये तीन  हैं-

विनयपिटक  (विनयपिटक में पांच ग्रंथ सम्मिलित हैं। इसमें बुद्ध के विभिन्न घटनाओं और अवसरों पर दिए उपदेश संकलित हैं। इसमें बौद्ध श्रमणों तथा भिक्षुओं के संघ के विनय, अर्थात अनुशासन-आचार सम्बन्धी नियम दिये गये हैं।)

सुत्तपिटक (सुत्तपिटक में भी पांच भाग हैं और इसमें भिक्षुओं, श्रावकों आदि के आचरण से संबंधित बातों का उल्लेख है।)

अभिधम्मपिटक  (अभिधम्मपिटक के सात भाग हैं और उसमें चित्त, नैतिक धर्म और निर्वाण का उल्लेख है।)

ललितविस्तर

वैपुल्यसूत्रों में यह एक अन्यतम और पवित्रतम महायानसूत्र माना जाता है।इसमें सम्पूर्ण बुद्धचरित का वर्णन है।बुद्ध ने पृथ्वी पर जो-जो क्रीड़ा (ललित) की, उनका वर्णन होने के कारण इसे ‘ललितविस्तर’ कहते हैं। इसे ‘महाव्यूह’ भी कहा जाता है

महावंश

इस ग्रन्थ में मगध के राजाओं की क्रमबद्ध सूची मिलती है।महावंश ग्रन्थ की रचना पालि भाषा में की गई है।बौद्ध धर्म और श्रीलंका (सिंहलद्वीप) का इतिहास इसमें वर्णित है।श्रीलंका का प्राचीन इतिहास दर्शाते समय स्थान-स्थान पर भारत तथा उसके इतिहास का उल्लेख किया गया है।
वास्तव में सम्राट अशोक तथा श्रीलंका में बौद्ध धर्म के प्रचार के बारे में विस्तृत सूचना महावंश से ही प्राप्त की गयी है।

दीपवंश

दीपवंश ग्रन्थ से इस बात की पुष्टि होती है कि, मौर्य सम्राट अशोक की ओर से भारत के बाहर धर्म-प्रचारक भेजे जाते थे।इसमें अशोक के द्वारा भेजे गए धर्म प्रचारकों के नाम भी मिलते हैं।इस प्रकार इस ग्रन्थ में अशोक के धर्म विजय के प्रयासों पर बहुत अच्छा प्रकाश डाला गया है।
ऐतिहासिक तथ्यों की दृष्टि से यह ग्रन्थ बहुत ही महत्त्वपूर्ण है।

मिलिन्दपन्ह,

इस ग्रंथ में यूनानी नरेश मिनेण्डर (मिलिन्द) एवं बौद्ध भिक्षु नागसेन के बीच बौद्ध मत पर वार्तालाप का वर्णन है।

परिवार ‎

खन्धक

बौद्ध धर्म के विनयपिटक के खन्धक ग्रंथ में मठ या संघ में निवासियों के जीवन के सन्दर्भ में विधि-निषेधों की विस्तृत व्याख्या की गयी है।
खन्धक के दो अन्य भाग- महावग्ग एवं चुल्लवग्ग हैं।महावग्ग में संघ के अत्यधिक महत्त्वपूर्ण विषयों का उल्लेख है।इसमें कुल 10 अध्याय हैं।
चुल्लवग्ग में 12 अध्याय हैं।

‎सुत्तविभंग

पातिमोक्ख

अंगुत्तरनिकाय

अंगुत्तरनिकाय महत्त्वपूर्ण बौद्ध ग्रंथ है। इसके लेखक महंत आनंद कौसलायन हैं। इस निकाय में छठी शताब्दी ई.पू. के सोलह महाजनपदों का उल्लेख मिलता हैं

खुद्दकनिकाय

‎संयुक्तनिकाय

मज्झिमनिकाय

‎दीघनिकाय

पातिभोक्ख

 

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