GSAT- 19 के बारे में

भारत ने अंतरिक्ष प्रौद्यौगिकी के क्षेत्र में एक नया इतिहास 5 जून 2017 को तब रचा जब देश के सबसे भारी-भरकम रॉकेट जीएसएलवी मार्क-तीन डी-1 (GSLV MK-III D-1) अपने साथ एक भारी-भरकम उपग्रह को लेकर सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर दिया गया। 3136 किलो वजन का देश का अब तक का यह सबसे भारी उपग्रह जीसैट-19 (GSAT-19)
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक बड़ा ऐतिहासिक मुकाम उस समय हासिल किया जब उसने भारी क्षमता वाले प्रक्षेपण यान की श्रृंखला के पहले रॉकेट जीएसएलवी मार्क-तीन डी-1 (GSLV MK-III D-1) को 5 जून 2017 को आन्ध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर दिया। इस रॉकेट के साथ देश के अब तक के सबसे भारी उपग्रह जीसैट-19 (GSAT-19) को भेजा गया जिसका वजन 3,136 किलोग्राम है।
यह प्रक्षेपण अपने नियत समय सायं 5:28 बजे किया गया तथा इसके माध्यम से जीसैट-19 को अपनी तय कक्षा में स्थापित कर दिया गया। इस सफल प्रक्षेपण ने भारत को भविष्य 4 टन भार तक के उपग्रहों को प्रक्षेपित करने की क्षमता प्रदान कर दी। उल्लेखनीय है कि इसरो (ISRO) अभी तक भारी उपग्रहों को प्रक्षेपित करने के लिए विदेशी एजेंसियों का सहारा लेता रहा है तथा इनमें से प्रमुख है यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) जिसके फ्रेंच गुयाना (French Guiana) स्थित प्रक्षेपण केन्द्र से तमाम ऐसे प्रक्षेपण किए गए हैं।
इस प्रक्षेपण की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसके लिए एक पूर्णतया स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन (cryogenic engine) का इस्तेमाल किया गया जोकि तीसरे चरण में फायर हुआ तथा तय योजना के अनुसार बंद होकर उपग्रह को अपनी अपेक्षित कक्षा में स्थापित करने में सफल हुआ। इससे पहले के GSLV के यानों में भी स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन इस्तेमाल होते थे लेकिन ये सभी रूसी डिज़ाइन पर आधारित होते थे।

(साभार : अमित सिंह, अमित सिंह एक युवा इंजिनियर और प्रतियोगी परीक्षाओ के विशेषज्ञ है )

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