दैनिक समसामयिकी This WEEK (11-14 August 2017)

1.भूटान ने चीन को दिखाया आइना, बोला डोकलाम हमारा, चीन का नहीं
• डोकलाम पर जारी विवाद के बीच भूटान ने पहली बार अपना पक्ष रखते हुए चीन को आइना दिखाया है। भूटान के सरकारी सूत्रों का कहना है कि डोकलाम भूटान का हिस्सा है, चीन का इससे लेना देना नहीं है।
• इससे भारत का पक्ष मजबूत हुआ है कि चीन हठधर्मी कर रहा है।
• भूटान के सरकारी सूत्रों ने डोकलाम विवाद पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘हमने डोकलाम मुद्दे पर चीन को मैसेज भेज दिया है। हमने कहा है कि चीन हमारे इलाके में सड़क बनाने की कोशिश कर रहा है। ये दोनों देशों के बीच 1988 और 1998 में हुए समझौतों का वॉयलेशन है।’
• इस बीच पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (चीनी सेना) ने कहा है कि इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। पीएलए ने क्या कहा : मीडिया से बातचीत में पीएलए के सीनियर कर्नल झोउ बो ने कहा- चीन की जनता, सरकार और सेना डोकलाम मामले में भारत के खतरनाक रवैये से खफा है।
• चीन इस मामले में अब तक शब्दों का भी संभलकर इस्तेमाल कर रहा है। -बो ने कहा- हम उम्मीद करते हैं कि आगे सब कुछ बेहतर होगा। लेकिन, ये भी तय है कि हम कोई समझौता नहीं करेंगे। दोनों देशों की जनता की भलाई इसी में है कि भारत वहां से बिना किसी शर्त के अपनी सेना को वापस बुला ले।
• कश्मीर में दखल का इशारा : झाओ ने भारत को फिर धमकी दी। कहा- मुद्दे का हल यही है कि भारत अपनी सेना हटाए नहीं तो चीन को भी ताकत का इस्तेमाल करना होगा। सच्चाई सिर्फ इतनी है कि भारत ने चीन के इलाके में घुसपैठ की कोशिश की है।
• हम ये कहना चाहते हैं कि जब भूटान ने भारत से सैन्य मदद नहीं मांगी थी तो भारतीय फौज वहां क्यों गई?- झाओ ने कहा- पाकिस्तान हमारा दोस्त है। सोचिए, अगर चीन पाकिस्तान के कहने पर बॉर्डर क्रॉस करता है तो भारत को कैसा लगेगा?
2. अमेरिका की विदेश नीति में भारत प्रमुख तरजीही देश
• एक पूर्व अमेरिकी राजदूत ने कहा है कि ट्रंप प्रशासन भारत को अमेरिकी विदेश नीति में प्रमुख तरजीही देश मानता है क्योंकि अमेरिका और भारत के बीच के रिश्ते दोनों देशों के सामूहिक भविष्य के लिए वास्तव में जरूरी हैं।
• भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत र्रिचड राहुल वर्मा ने कहा, रिश्तों का समग्र प्रगति पथ अच्छा है। वर्मा ने कहा, मैं समझता हूं कि ट्रंप प्रशासन में भारत को अमेरिकी विदेश नीति का एक प्रमुख तरजीही देश माना जाता है। उन्होंने कहा, संबंधों का समग्र मार्ग सुखद रहा है।
• वर्मा ने कहा, मैं समझता हूं कि यह इस सदी में अमेरिका के लिए अकेले सर्वाधिक अहम रिश्ता है और हमें यह नहीं मानना चाहिए कि चूंकि चीजें ठीक चल रही हैं , हम चीजों को खुद से चलने दे सकते हैं।
• इस तरह के रिश्ते हैं जो हमारे सामूहिक भविष्य के लिए वास्तव में जरूरी हैं और इसमें ढेर सारा समय और ढेर सारी उर्जा लगेगी। उन्होंने कहा, वह पसंद करेंगे कि दोनों देश रक्षा क्षेत्र में निवेश के संदर्भ में अपने रिश्ते विकसित करें।
• पूंजी सलाहकार समूह द एशिया ग्रुप के उपाध्यक्ष वर्मा ने कहा, जैसा कि आप जानते हैं कि ओबामा प्रशासन के पिछले दो या तीन वर्षो में हमने (संबंधों में) काफी प्रगति की है और इसका श्रेय मोदी और (पूर्व) राष्ट्रपति ओबामा को जाता है।
3. चीन पर होगी नजर, म्यांमार जाएंगे प्रधानमंत्री मोदी
• पड़ोसी देश भूटान में चीन की बढ़ती ताकत को चुनौती देने के बाद भारत अब एक अन्य पड़ोसी देश म्यांमार में अपने कूटनीतिक दांव को लेकर ज्यादा गंभीर हो गया है। कुछ ही दिन पहले म्यांमार के सेना प्रमुख का जोरदार स्वागत करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सितंबर के पहले हफ्ते में म्यांमार जा रहे हैं।
• वैसे मोदी वहां आसियान बैठक में हिस्सा लेंगे, लेकिन उनकी यह यात्र भारत की लुक ईस्ट नीति के तहत एक अहम कदम भी साबित होगा।
• भारत ने पिछले दो वर्षो के दौरान म्यांमार में चीन के असर को काटने में काफी सफलता हासिल की है, लेकिन मोदी जिस तरह से भारी भरकम एजेंडे के साथ वहां जा रहे हैं वह आने वाले दिनों में म्यांमार व भारत के द्विपक्षीय रिश्तों को नया मुकाम दे सकता है।
• मोदी ने अभी कुछ ही दिन पहले कहा था कि भारत की लुक ईस्ट नीति के लिहाज से म्यांमार काफी अहम है। उन्होंने म्यांमार के साथ द्विपक्षीय रिश्ते प्रगाढ़ करने को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताई थी। उसके कुछ ही दिन बाद मोदी म्यांमार जा रहे हैं जिससे पता चलता है कि वह अपनी बात को लेकर गंभीर हैं।
• सूत्रों के मुताबिक इस यात्र के दौरान मोदी के एजेंडे में भारत के पूवरेत्तर राज्यों को म्यांमार और थाईलैंड से जोड़ना सबसे अहम है।
• वैसे चीन म्यांमार में कारोबार से लेकर सैन्य सहयोग तक के मामले में भारत से काफी आगे है, लेकिन अब वहां की नई सरकार कुछ बदलाव के संकेत देने लगी है। पिछले महीने जब म्यांमार के कमांडर इन चीफ भारत आए थे तब उन्होंने सैन्य सहयोग पर चर्चा की थी।
• मोदी की यह यात्र इस बारे में सहयोग को ठोस रूप देने का काम करेगी। म्यांमार की नई सरकार ने पिछले दो वर्षो के दौरान भारत के साथ सहयोग को लेकर बेहद सकारात्मक रवैया दिखाया है। म्यांमार ने पूर्वोत्तर के आतंकियों का सफाया करने से लेकर सड़क व रेल नेटवर्क बनाने के भारतीय प्रस्ताव को खुलकर समर्थन दिया है।
• मेकांग-भारत इकॉनोमिक कॉरीडोर प्रस्ताव का भी वह पूरा समर्थन करता है। लोकतंत्र मजबूत होने के साथ ही वहां भारत की पैठ बनने के पूरे आसार हैं। जानकारों के मुताबिक म्यांमार में ऐसी विचारधारा वाले लोगों की संख्या बढ़ी है जो चीन पर निर्भरता के सख्त खिलाफ हैं।
• भारत के इस पड़ोसी देश के पास गैस का बहुत बड़ा भंडार है, लेकिन अभी तक उसका दोहन चीन करता रहा है।
4. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, क्या मामला बड़ी पीठ को भेजा जाना चाहिए
• किसी भी आपराधिक मामले में दोषी साबित हो चुके राजनेता के चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या इस मामले को बड़ी संवैधानिक पीठ के पास भेजा जाना चाहिए? अदालत ने कहा कि पांच साल या उससे ज्यादा की सजा पाने वाले नेताओं पर प्रतिबंध का मामला पहले ही पांच सदस्यीय संविधान बेंच के पास भेजा जा चुका है। यह वाकई में उससे कहीं ज्यादा बड़ा मसला है।
• जस्टिस रंजन गोगोई व नवीन सिन्हा की पीठ के सवाल पर याचिकाकर्ता के वकील ने विरोध किया। उनका कहना था कि दो सदस्यीय बेंच इसका निपटारा करने में सक्षम है। याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय की तरफ से पेश अधिवक्ता ने कहा कि मौजूदा समय में संसद में 30 से 40 फीसद सदस्य आपराधिक मामलों में लिप्त हैं। वो कभी भी ऐसा कानून पारित नहीं होने देंगे जिससे उनके लिए संकट पैदा हो।
• इस मामले में अदालत ही ठोस कार्रवाई कर सकने में सक्षम है। उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही आदेश जारी कर चुका है कि दागदार नेताओं के बारे में जनता को जागरूक करने के लिए एक व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
• उनका कहना था कि रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट (आरपीए) को खत्म करना जरूरी है, क्योंकि इससे दागी नेताओं को केवल छह साल तक चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है।
• सांसद व विधायक भी नौकरशाह की तरह से जनसेवक हैं। जब नौकरशाह को दागी होने पर नौकरी से बर्खास्त किया जा सकता है तो नेता को क्यों नहीं।
• अधिवक्ता वेणुगोपाल का कहना था कि संविधान में इसके लिए प्रावधान नहीं किया गया था, क्योंकि ब्रिटिश शासन काल में आजादी की लड़ाई लड़ने वाले भारतीयों पर केस दर्ज किए जाते थे, लेकिन आज हालात बिलकुल अलग हैं। उनका कहना था कि केवल तनख्वाह बढ़ाने के लिए राजनीतिक दल पार्टी लाइन से इतर जाते हैं। इस मामले में सभी एक जैसे हैं। यही वजह है कि वोरा कमेटी की सिफारिशों को लागू भी नहीं किया जा सका।
• गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार के साथ चुनाव आयोग से राय मांगी थी। केंद्र ने जहां याचिका को खारिज करने की बात कही थी वहीं आयोग का रवैया अगर-मगर का रहा।
• हालांकि सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद आयोग ने कहा था कि ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित होनी चाहिए। याचिका में यह भी मांग की गई है कि चुनाव लड़ने की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता व अधिकतम आयु सीमा भी तय की जानी चाहिए। सुनवाई 23 अगस्त को भी जारी रहेगी।
5. अनुच्छेद 35ए पर महबूबा को केंद्र से नहीं मिला ठोस आश्वासन
• संविधान के अनुच्छेद 35 ए की समीक्षा के खिलाफ सक्रिय जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। महबूबा चाहती हैं कि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में 35ए को चुनौती देने वाली याचिका का विरोध करे।
• वैसे महबूबा मुफ्ती को इस पर राजनाथ सिंह से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिल पाया है। जल्द ही वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर इस मुद्दे पर अपनी चिंता से अवगत कराएंगी। 1उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार महबूबा मुफ्ती ने राजनाथ सिंह को बताया कि सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 35ए को चुनौती दिए जाने से कश्मीर की आम जनता में बेचैनी है।
• उन्हें डर सता रहा है कि इस अनुच्छेद को निरस्त होने से कश्मीर की स्वायत्तता पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और इससे पहले से ही विरोध प्रदर्शनों को ङोल रहे कश्मीर के हालात बेकाबू हो सकते हैं। उनका कहना था कि केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका का पुरजोर विरोध करना चाहिए। सूत्रों की मानें तो राजनाथ सिंह से उन्हें कोई ठोस आश्वासन नहीं मिल पाया।
• राजनाथ सिंह का कहना था कि ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर सरकार पूरी तरह से विचार विमर्श के बाद ही फैसला लेगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि वह उनकी चिंताओं से सरकार को उच्च स्तर पर अवगत करा देंगे।
• गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में संविधान के अनुच्छेद 35ए को चुनौती दी गई है और इसे निरस्त करने की मांग की गई है। अदालत ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए जम्मू-कश्मीर सरकार और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर अपना-अपना पक्ष रखने को कहा है।
• इस धारा के निरस्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार की राज्य की नागरिकता तय करने का अधिकार समाप्त हो जाएगा। अभी तक गैर कश्मीरी भारतीय को वहां की नागरिकता मिलने पर प्रतिबंध है और वे वहां जमीन भी नहीं खरीद सकते हैं।
• अनुच्छेद 35ए को चुनौती दिए के खिलाफ महबूबा मुफ्ती कश्मीर में भी राजनीतिक एकता बनाने की कोशिश में जुटी हैं। इस सिलसिले में उन्होंने बुधवार को अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी फारूक अब्दुल्ला से भी मुलाकात की थी। वहीं दिल्ली रवाना होने के पहले महबूबा ने राजपाल एनएन वोहरा से मिलकर भी इस मुद्दे पर चर्चा की थी।
6. दो साल बाद 26 लाख करोड़ का होगा आम बजट
• सरकार अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए सार्वजनिक व्यय में खासी वृद्धि जारी रखेगी। वित्त मंत्रलय का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2019-20 में सरकार का कुल व्यय यानी आम बजट करीब 26 लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा।
• खास बात यह है कि इस आम बजट में रक्षा क्षेत्र का आवंटन अच्छा खासा होगा क्योंकि अगले दो वर्षो में रक्षा क्षेत्र के पूंजीगत व्यय में करीब 22 प्रतिशत की वृद्धि होगी।
• केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अजरुन राम मेघवाल ने बृहस्पतिवार को मध्यावधि व्यय फ्रेमवर्क वक्तव्य लोकसभा में रखा जिसमें ये अनुमान व्यक्त किए गए हैं। हालांकि व्यय के ये अनुमान विकास दर के जिन आंकड़ों को आधार मानकर तय किया गया है वे अधिक उत्साहजनक नहीं है।
• इसे देखने पर पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर (बाजार मूल्य पर) जहां 11.75 प्रतिशत रहने का अनुमान है जबकि अगले दो वित्त वर्ष में यह 12.3 प्रतिशत के स्तर पर स्थिर रहने की उम्मीद है।
• वित्त मंत्रलय के इस दस्तावेज के अनुसार वित्त वर्ष 2019-20 में सरकार का कुल व्यय 25.95 लाख करोड़ रुपये होगा जबकि चालू वित्त वर्ष में यह 21.46 लाख करोड़ रुपये है।
• वित्त वर्ष 2009-10 में पहली बार देश के आम बजट का आकार दस लाख करोड़ रुपये को पार किया था। उल्लेखनीय है कि देश आजाद होने के बाद पहले आम बजट का आकार मात्र 197.39 करोड़ रुपये था।
• वित्त वर्ष 2019-20 में सरकार के कुल व्यय में पूंजीगत व्यय का आंकड़ा भी बढ़कर 3.90 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा जो कि चालू वित्त वर्ष में 3.09 लाख करोड़ रुपये है।
• सरकार फिलहाल अपने पूंजीगत व्यय का एक चौथाई से अधिक रक्षा क्षेत्र पर खर्च करती है। माना जा रहा है कि वर्ष 2019-20 में रक्षा क्षेत्र का पूंजीगत आवंटन 22 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बढ़कर 1,04,973 करोड़ रुपये हो जाएगा। इसका मतलब है कि अगले दो वर्षो में रक्षा क्षेत्र के पूंजीगत व्यय में खासी वृद्धि होगी।
• यह वृद्धि ऐसे समय हो रही है जब भारत और चीन के मध्य सीमा संबंधी मुद्दों को लेकर तनाव की स्थिति है। रेलवे, सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग के पूंजीगत आवंटन में भी खासी वृद्धि के आसार हैं।
7. पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में परमाणु हथियारों के लिए बनाया अंडरग्राउंड स्टोरेज
• अमेरिका के इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी ने कहा है कि पाकिस्तान ने बलूचिस्तान प्रांत के सुदूर पहाड़ी इलाके में परमाणु हथियार रखने के लिए अंडरग्राउंड स्टोरेज बनाया है। संस्थान ने कहा है कि अंडरग्राउंड कॉम्प्लेक्स की सैटेलाइट इमेज और अनुसंधान के आधार पर वह इस नतीजे पर पहुंचा है।
• इस स्टोरेज में बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु आयुध रखे जा सकते हैं। संस्थान के मुताबिक सार्वजनिक तौर पर यह बताया नहीं गया है कि कॉम्प्लेक्स किस मकसद से बना हुआ है।
• रिपोर्ट में कहा गया है कि यह जगह परमाणु हथियारों के भंडारण के लिए आदर्श है। यह देश के बीचोंबीच है और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं सहित भारत से पर्याप्त दूरी पर है।
8. जैव ईधन शोध पर दो अरब डालर खर्च होंगे
• पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धम्रेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार जल्द ही नई जैव ईधन नीति बनाने वाली है। इसके तहत सार्वजनिक तेल विपणन कंपनियां इससे जुड़े अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) पर दो अरब डालर खर्च करेंगी।
• प्रधान ने यहां विश्व जैव ईधन दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि अनुसंधान एवं विकास पर निवेश तीनों सार्वजनिक तेल विपणन कंपनियों इंडियन आयल कापरेरेशन, भारत पेट्रोलियम और ¨हदुस्तान पेट्रोलियम के माध्यम से किया जाएगा।
• उन्होंने कहा कि सरकार नई जैव ईंधन नीति लाने वाली है जिसे जल्द ही मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए रखा जाएगा। इससे इस क्षेत्र में निवेश, सरकार की भूमिका, इसके लिए दिये जाने वाले प्रोत्साहन आदि के प्रारूप तय होंगे।उन्होंने बताया कि अनुसंधान एवं विकास में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा रक्षा विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।
• उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड और विदर्भ के इलाके के साथ झारखंड की ऐसी बंजर जमीन जहां पारंपरिक फसलों की खेती संभव नहीं है। उनका उपयोग जैव डीजल देने वाली फसलें उगाने के लिए किया जा सकता है। वैज्ञानिक ऐसी फसलों की किस्में तैयार करेंगे जो बंजर जमीन पर भी आसानी से उगाई जा सकें।
• मंत्री ने कहा कि मौजूदा समय में देश की जरूरत का 80 प्रतिशत जीवाश्म ईंधन आयात किया जाता है जिस पर छह लाख करोड़ रूपये से ज्यादा मूल्य की विदेशी मुद्रा खर्च हो जाती है।
9. देश की सुरक्षा पर होगा ज्यादा खर्च
• सरकार देश की सुरक्षा पर होने वाले खर्च में वर्ष 2019-20 में 22 फीसद तक की बढ़ोतरी का अनुमान जताया है। इस अवधि में सरकार का कुल खर्च बढ़कर 26 लाख करोड़ रपए पर पहुंच जाने का अनुमान है।
• चालू वित्त वर्ष में इसके 21.46 लाख करोड़ रूपये रहने का अनुमान है।
• संसद में पेश मध्यावधि व्यय ढांचा विवरण 2017-18 में अनुमान लगाया गया है कि सरकार का पूंजीगत खर्च 2019-20 तक 25 प्रतिशत बढ़कर 3.9 लाख करोड़ रूपये के स्तर पर पहुंच जाएगा और इस दौरान केवल रक्षा बजट के पूंजीगत खर्च में 22 प्रतिशत का इजाफा होगा।
• रपट के अनुसार सरकार का कुल व्यय 2017-18 के 21.46 लाख करोड़ रूपये से 2018-19 में 23.4 लाख करोड़ रूपये और 2019-20 में 25.95 लाख करोड़ रूपये पर पहुंच जाने का अनुमान है।
• चालू वित्त वर्ष में पूंजीगत खर्च 3.09 लाख करोड़ रूपये रहने का अनुमान लगाया गया है और राजस्व खर्च 18.36 लाख करोड़ रूपये रहने का अनुमान है।
• इस तरह कुल खर्च 21.46 लाख करोड़ रूपये रहने का अनुमान है।
• सरकार के कुल पूंजीगत खर्च में रक्षा क्षेत्र के पूंजीगत खर्च का हिस्सा 30 प्रतिशत का है।
• चालू वित्त वर्ष में रक्षा क्षेत्र पर पूंजीगत खर्च 91,580 करोड़ रूपये रहने का अनुमान है, जो अगले वित्त वर्ष में 1,01,137 करोड़ रूपये और 2019-20 में 1,11,706 करोड़ रूपये पर पहुंच जाएगा।
• वित्तीय उत्तर दायित्व एवं बजट प्रबंधन कानून के प्रावधानों के तहत प्रस्तुत इस मध्यावधिक रपट में अनुमान लगाया गया है कि उर्वरक सब्सिडी पर खर्च चालू वित्त वर्ष से 2019-20 तक 70,000 करोड़ रूपये के स्तर पर स्थिर रहेगा।
• खाद्य सब्सिडी बिल 2018-19 में बढ़कर 1.75 लाख करोड़ रूपये और 2019-20 में दो लाख करोड़ रूपये पर पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। वहीं पेट्रोलियम सब्सिडी 2018-19 में घटकर 18,000 करोड़ रूपये और 2019-20 में 10,000 करोड़ रूपयेs पर आने का अनुमान है।
10. दक्षिण पूर्वी एशिया में 70 हजार वर्ष पूर्व हुआ था आधुनिक मनुष्यों का आगमन
• वैज्ञानिकों का कहना है कि आधुनिक मनुष्य अफ्रीका से करीब 70 हजार वर्ष पूर्व दक्षिणपूर्व एशिया पहुंचे थे। पहले आकलन था कि वह बहुत बाद में अफ्रीका से बाहर निकले थे।
• ऑस्ट्रेलिया की ‘‘मैक्वेरी यूनिवर्सिटी’ के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए अध्ययन के अनुसार मानव करीब 60 हजार से 65 हजार वर्ष पहले ऑस्ट्रेलिया से होकर गुजरे थे।
• इंडोनेशिया के पश्चिम सुमात्रा में गुफा लिदा अजर की डेटिंग से आधुनिक मनुष्यों के वर्षा वन का प्रयोग करने के प्रथम साक्ष्य मिलते हैं। ऑस्ट्रेलिया में ‘‘क्वींसलैंड विविद्यालय’ के गिल्बर्ट प्राइस ने कहा, वर्षा वन जीवन-यापन के लिए आसान स्थान नहीं है, विशेषकर सवाना के माहौल में रहे नरवानरों के लिए, इसलिए प्रतीत होता है कि वे लोग बुद्धिमता, योजना और तकनीकी के अनुरूप खुद को ढालने के दिशा में औसत से बेहतर थे।
• परिणामस्वरूप गुफा के पर्लेखन, नमूनों के पुर्नविश्लेषण और एक नए डेटिंग प्रोग्राम से यह पुष्टि हो गई है कि वहां मिले दांत करीब 73 हजार वर्ष पूर्व आधुनिक मनुष्यों, मानव-जाति के हैं।
• यह अध्ययन ‘‘नेचर पत्रिका’ में प्रकाशित हुआ था।
स्रोत : अज्ञात

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