भारत की कुछ युद्ध् संधियाँ , Yuddhh Sandhiyan , सहायक संधि

भारत की कुछ युद्ध् संधियाँ , Yuddhh Sandhiyan , सहायक संधि

अलीनगर की सन्धि – 9 फ़रवरी, 1757 ई.
अलीनगर की संधि, 9 फ़रवरी 1757 ई. को बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला और ईस्ट इंडिया कम्पनी के बीच हुई, जिसमें अंग्रेज़ों का प्रतिनिधित्व क्लाइव और वाटसन ने किया था।

इलाहाबाद की सन्धि – 1765 ई.
इलाहाबाद की सन्धि 1765 ई. में ईस्ट इण्डिया कम्पनी की ओर से रॉबर्ट क्लाइव और बादशाह शाहआलम द्वितीय के मध्य हुई थी।

मसुलीपट्टम की सन्धि – 23 फ़रवरी, 1768
मसुलीपट्टम की सन्धि 23 फ़रवरी, 1768 ई. में की गई थी।इस सन्धि के तहत भारत का हैदराबाद राज्य ब्रिटिश नियंत्रण में आ गया।

बनारस की सन्धि प्रथम – 1773 ई.
यह सन्धि अवध के नवाब शुजाउद्दौला तथा ईस्ट इंडिया कम्पनी के बीच में हुई।

बनारस की सन्धि द्वितीय – 1775 ई.
यह सन्धि राजा चेतसिंह और ईस्ट इंडिया कम्पनी के बीच में हुई थी।

सूरत की सन्धि – 1775 ई.
राघोवा (रघुनाथराव) और अंग्रेज़ों के बीच हुई। इस सन्धि के अनुसार अंग्रेज़ों ने राघोवा को सैनिक सहायता देना स्वीकार कर लिया।

पुरन्दर की सन्धि – 1776 ई.
मराठों तथा ईस्ट इंडिया कम्पनी के बीच हुई थी।

बड़गाँव की सन्धि – 1779 ई.
यह समझौता प्रथम मराठा युद्ध (1776-82 ई.) के दौरान भारत में ईस्ट इंडिया कम्पनी की सरकार की ओर से कर्नल करनाक और मराठों के मध्य हुआ।

सालबाई की सन्धि – 1782 ई.
ईस्ट इण्डिया कम्पनी और महादजी शिन्दे के बीच हुई थी।

बसीन की सन्धि – 31 दिसम्बर, 1802 ई.
‘बसीन की सन्धि’ 31 दिसम्बर, 1802 में, भारत में पूना (पुणे) के मराठा पेशवा बाजीराव द्वितीय और अंग्रेज़ों के मध्य हुई थी।

सुर्जी अर्जुनगाँव की सन्धि – 1803 ई.
अंग्रेज़ों और दौलतराव शिन्दे के बीच हुई थी।

अमृतसर की सन्धि – 25 अप्रैल, 1809 ई.
रणजीत सिंह और ईस्ट इंडिया कम्पनी के बीच हुई। उस समय लॉर्ड मिण्टो प्रथम, भारत का गवर्नर-जनरल था।

पूना की सन्धि – 1817 ई.
पेशवा बाजीराव द्वितीय और अंग्रेज़ों के मध्य हुई थी

उदयपुर की सन्धि – 1818 ई.
उदयपुर के राणा और अंग्रेज़ सरकार के बीच हुई।

सुगौली सन्धि – 4 मार्च, 1816 ई.
ईस्ट इंडिया कम्पनी और नेपाल के मध्य हुई थी

लाहौर की सन्धि – 9 मार्च, 1846 ई.
अंग्रेज़ों और सिक्खों के मध्य 9 मार्च, 1846 ई. को हुई थी।

सहायक संधियाँ

हैदराबाद – 1798 तथा 1800
मैसूर    –     1799
तंजोर     –     1799
अवध     –     1801
पेशवा    –     1801
बराड़ के भोसले – 1803
सिन्धिया     –     1804
इनके अतिरिक्त जोधपुर, जयपुर, मच्छेड़ी बूंदी, तथा भरतपुर से भी सहायक संधियां की गई।
सहायक संधि प्रणाली जहाँ एक ओर अंग्रेजी साम्राज्य के लिए लाभदायक रही वही देशी राज्यों को इस प्रणाली ने अत्यधिक हानि पहुँचायी।