भारत में मानसून, Monsoon in India

भारत में मानसून

वायु हमेशा उच्च दबाव वाले क्षेत्र से —->>  कम दबाव वाले क्षेत्र की ओर
मौसम (अल्पकालिक वायुमंडलीय दशा)  और जलवायु(दीर्घकालिक वायुमंडलीय दशा ) किसी स्थान की दिन-प्रतिदिन की वायुमंडलीय दशा को मौसम ()कहते हैं और मौसम के ही दीर्घकालिक औसत को जलवायु कहा जाता है | मौसम व जलवायु दोनों के तत्व समान ही होते हैं, जैसे-तापमान, वायुदाब, आर्द्रता आदि | ‘तापमान’ तापमान से तात्पर्य वायु में निहित ऊष्मा की मात्रा से है और इसी के कारण मौसम ठंडा या गर्म महसूस होता है। ‘वायुदाब’ वायु में निहित वजन से पृथ्वी की सतह पर पड़ने वाले दबाव को वायुदाब कहते हैं। समुद्र स्तर पर वायुदाब सबसे अधिक होता है और उंचाई के साथ इसमें कमी आती जाती है।निम्न वायुदाब वाले क्षेत्र वे हैं जहां तापमान अधिक होता है और हवा गर्म होकर उपर की ओर उठने लगती है। उच्च वायुदाब वाले क्षेत्र वे हैं जहां तापमान कम होता है और हवा ठंडी होकर नीचे की ओर बैठने लगती है।  ‘पवन’ पवन उच्च दबाव वाले क्षेत्र से कम दबाव वाले क्षेत्रों की ओर बहने वाली गतिशील हवा को पवन कहते है

पवनें तीन प्रकार की होती हैं–

  • स्थायी पवन (व्यापारिक पवनें, पछुआ पवनें और ध्रुवीय पवनें, पूरे वर्ष एक ही दिशा)
  • मौसमी पवन (दिशाएं अलग– अलग मौसमों में अलग– अलग होती हैं)
  • स्थानीय पवन ( दिन के कुछ समय या वर्ष की खास अवधि के दौरान ही चलती हैं। उदाहरण- लू )|

भारत में मानसून की अवधि चार महीने यानी 1 जून से 30 सितम्बर तक मानी जाती है। भविष्यवाणियाँ 16 अप्रैल से 25 मई के दौरान की जाती हैं.  एशिया और यूरोप का विशाल भूभाग, जिसका एक हिस्सा भारत भी है, ग्रीष्मकाल में गरम होने लगता है। इसके कारण उसके ऊपर की हवा गरम होकर उठने और बाहर की ओर बहने लगती है।  दक्षिण पश्चिमी मानसून भारत के दक्षिणी भाग में जून 1 को पहुँचता है। साधारणतः मानसून केरल के तटों पर जून महीने के प्रथम पाँच दिनों में प्रकट होता है। अरब सागर से आने वाली पवन उत्तर की ओर बढ़ते हुए 10 जून तक मुम्बई पहुँच जाती हैमानसून कोलकाता शहर में मुम्बई से कुछ दिन पहले (लगभग जून 7 को) पहुँच जाता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, पूर्वी राजस्थान आदि बचे हुए प्रदेश 1 जुलाई तक बारिश का अनुभव करते हैं।
भारत में वर्षा का वितरण पर्वत श्रेणियों की स्थिति पर काफी हद तक निर्भर है। यदि सभी पर्वत न हो तो तो वर्षा की मात्रा बहुत घट जाएगी। मुम्बई, पश्चिमी घाट के ओर स्थित है, में लगभग 187.5 सेंटीमीटर वर्षा होती है, जबकि पुणे, जो कि पश्चिमी घाट के पवनाभिमुख भाग से करीब है , फिर भी बारिश  मात्र 50 सेंटीमीटर वर्षा होती है|

कोपेन के वर्गीकरण के अनुसार भारत में निम्नलिखित छह प्रकार के जलवायु प्रदेश पाए जाते हैं:

  •   अल्पाइन (अल्पाइन जलवायु उस ऊँचाई की जलवायु को कहते हैं जो वृक्ष रेखा के ऊपर हो। किसी जगह की जलवायु अल्पाइन है तभी कहा जा सकता है जब वहाँ किसी भी महीने का औसत तापमान १०° सेल्सियस से ऊपर नहीं होता है)
  •   आर्द्र उपोष्ण
  •   उष्ण कटिबंधीय नम और शुष्क (ऊष्णकटिबंध (Tropics) दुनिया का वह कटिबंध है जो भूमध्य रेखा से अक्षांश २३°२६’१६” उत्तर में कर्क रेखा और अक्षांश २३°२६’१६” दक्षिण में मकर रेखा तक सीमित है)
  •   उष्ण कटिबंधीय नम
  •   अर्धशुष्क
  •   शुष्क मरुस्थलीय

मानसून से अभिप्राय है- ‘वे हवाएँ, जिनकी दिशा ऋतु के अनुसार बदल जाती है।’ हिन्द महासागर एवं अरब सागर की ओर से भारत के दक्षिण-पश्चिम तट पर आनी वाली वे विशेष हवाएँ, जो भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि में भारी वर्षा करातीं हैं। मानसून भारतीय कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है, इसके साथ ही भारत के लोक जीवन से भी गहरे जुड़ा है। यह गर्मी की तपिश से निजात दिलाता है और लोगों में उत्साह व खुशी का संचार करता है। भारत में मानसून हिन्द महासागर व अरब सागर की ओर से हिमालय की ओर आने वाली हवाओं पर निर्भर करता है। जब ये हवाएँ भारत के दक्षिण-पश्चिम तट पर पश्चिमी घाट से टकराती हैं तो भारत तथा आस-पास के देशों में भारी वर्षा होती है। ये हवाएँ दक्षिण एशिया में जून से सितम्बर तक सक्रिय रहती हैं। वैसे किसी भी क्षेत्र का मानसून उसकी जलवायु पर निर्भर करता है।