शाहजहाँ , Shahjahan (1592-1666)

शाहजहाँ , Shahjahan (1592-1666)

शाह जहाँ पांचवे मुग़ल शहंशाह था। शाह जहाँ अपनी न्यायप्रियता और वैभवविलास के कारण अपने काल में बड़े लोकप्रिय रहे। किन्तु इतिहास में उनका नाम केवल इस कारण नहीं लिया जाता। शाहजहाँ का नाम एक ऐसे आशिक के तौर पर लिया जाता है जिसने अपनी बेग़म मुमताज़ बेगम के लिये विश्व की सबसे ख़ूबसूरत इमारत ताज महल बनाने का यत्न किया।सम्राट जहाँगीर के मौत के बाद, छोटी उम्र में ही उन्हें मुगल सिंहासन के उत्तराधिकारी के रूप में चुन लिया गया था। 1627 में अपने पिता की मृत्यु होने के बाद वह गद्दी पर बैठे। उनके शासनकाल को मुग़ल शासन का स्वर्ण युग और भारतीय सभ्यता का सबसे समृद्ध काल बुलाया गया है।

पत्नियाँ – कन्दाहरी बेग़म,अकबराबादी महल,मुमताज महल,हसीना बेगम,मुति बेगम,कुदसियाँ बेगम,फतेहपुरी महल,सरहिंदी बेगम,श्रीमती मनभाविथी
पुत्र/ पुत्री – पुरहुनार बेगम,जहांआरा बेगम,दारा शिकोह,शाह शुजा,रोशनारा बेगम,औरंग़ज़ेब,मुराद बख्श,गौहरा बेगम

शाहजहाँ के समय में हुए विद्रोह

बुन्देलखण्ड का विद्रोह (1628-1636ई.) – वीरसिंह बुन्देला के पुत्र जुझार सिंह ने
ख़ानेजहाँ लोदी का विद्रोह (1628-1631 ई.)- पीर ख़ाँ ऊर्फ ख़ानेजहाँ लोदी

शाहजहाँ के कुछ कार्य

  • शाहजहाँ ने सिजदा और पायबोस प्रथा को समाप्त किया।
  • इलाही संवत के स्थान पर हिजरी संवत का प्रयोग आरम्भ किया।
  • गोहत्या पर से प्रतिबन्ध उठा लिया। हिन्दुओं को मुस्लिम दास रखने पर पाबन्दी लगा दी।
  • अपने शासन के सातवें वर्ष तक आदेश जारी किया, जिसके अनुसार अगर कोई हिन्दू स्वेच्छा से मुसलमान बन जाय, तो उसे अपने पिता की सम्पत्ति से हिस्सा प्राप्त होगा।
  • हिन्दुओं को मुसलमान बनाने के लिए एक पृथक विभाग खोला।
  • पुर्तग़ालियों से युद्ध का ख़तरा होने पर उसने आगरा के गिरिजाघर को तुड़वा दिया।
  • मुग़लकालीन स्थापत्य एवं वास्तुकला की दृष्टि से शाहजहाँ ने अनेकों भव्य इमारतों का निर्माण करवाया था, जिस कारण से उसका शासनकाल मध्यकालीन भारत के इतिहास का ‘स्वर्ण काल’ कहा जाता है।

    Shahab ud-din Muhammad, Sahib-i-Qiran-i-Sani, Shah Jahan I Padshah Ghazi Zillu’llah [Firdaus-Ashiyani]) ruled India from 1628 until 1658.
    From ‘Khurram’ to Shah Jahan: The blue-eyed of the Mughal Royals, the young ‘Khurram’ impressed his father the Emperor Jahangir with his intense military successes of 1617 against the Lodi in the Deccan, which effectively secured the southern border of the empire.The grateful father rewarded him with the prestigious title ‘Shah Jahan Bahadur ‘, which implicitly sealed his inheritance. The name Shah Jahan comes from Persian meaning “King of the World.”His early years saw him receive a cultured, broad education and distinguish himself in the martial arts and as a commander of his father’s armies in numerous campaigns, where he became responsible for most of the territorial gains of his father’s reign. Khurrum also demonstrated a precocious talent for building, impressing his father at the age of 16 when he built his own quarters within Babur’s Kabul fort and redesigned several buildings within Agra fort.He was the fifth Mughal ruler after Babur, Humayun, Akbar, and Jahangir. While young, he was a favourite of Akbar. Like Akbar, he was eager to expand his empire. Even while very young, he could be pointed out to be the successor to the Mughal throne after the death of Jahangir. He succeeded to the throne upon his father’s death in 1627. He is considered to be one of the greatest Mughals and his reign has been called the Golden Age of Mughals.
    Shah Jahan erected many splendid monuments, the most famous of which is the Taj Mahal at Agra. The Pearl Mosque at Agra, the palace and great mosque at Delhi. The celebrated Peacock Throne, said to be worth millions of dollars by modern estimates. He was the founder of Shahjahanabad, now known as ‘Old Delhi’. Other creations of Shah Jahan also include the Diwan-i-Am and Diwan-i-Khas within the Red Fort in Delhi.