अशोक के शिलालेख , Edicts of Ashok The Great

ashokshlalekh

अशोक के 14 शिलालेख( 14 परिक्छेद , पैराग्राफ ) विभिन्‍न लेखों का समूह है जो आठ भिन्‍न-भिन्‍न स्थानों से प्राप्त किए गये हैं-

(१) धौली– यह उड़ीसा के पुरी जिला में है।

(२) शाहबाज गढ़ी– यह पाकिस्तान (पेशावर) में है।

(३) मान सेहरा– यह पाकिस्तन के हजारा जिले में स्थित है।

(४) कालसी– यह वर्तमान उत्तराखण्ड (देहरादून) में है।

(५) जौगढ़– यह उड़ीसा के जौगढ़ में स्थित है।

(६) सोपरा– यह महराष्ट्र के थाणे जिले में है।

(७) एरागुडि– यह आन्ध्र प्रदेश के कुर्नूल जिले में स्थित है।

(८) गिरनार– यह काठियाबाड़ में जूनागढ़ के पास है।

 

अशोक के शिलालेख और उसके विषय

  • शिलालेख -1. इसमें पशु बलि की निंदा की गई।
  • शिलालेख-2. समाज कल्याण, मनुष्य व पशु चिकित्सा।
  • शिलालेख-3. अशोक के तीसरे शिलालेख से ज्ञात होता है कि उसके राज्य में प्रादेशिक, राजूक , युक्तों को हर 5 वें वर्ष धर्म प्रचार हेतु भेजा जाता था जिसे अनुसन्धान कहा जाता था। इसमें बचत, धार्मिक नियम और अल्प व्यय को धम्म का अंग बताया है।
  • शिलालेख-4. भेरिघोष की जगह धम्म घोष की धोषणा।
  • शिलालेख-5. धर्म महामत्रों की नियुक्ति (13 वें वर्ष )
  • शिलालेख-6. आत्म नियंत्रण की शिक्षा। .
  • शिलालेख-7.व 8. अशोक द्वारा तीर्थ यात्राओ का वर्णन। सातवाँ अभिलेख सबसे लम्बा है।
  • शिलालेख-9. सच्ची भेंट व सच्चे शिष्टाचार का वर्णन।
  • शिलालेख-10. राजा व उच्च अधिकारी हमेशा प्रजा के हित में सोचें।
  • शिलालेख-11. धम्म की व्याख्या। धर्म के वरदान को सर्वोत्तम बताया।
  • शिलालेख-12. स्त्री महामत्रों की नियुक्ति व सभी प्रकार के विचारो के सम्मान की बात कही। धार्मिक सहिष्णुता की निति।
  • शिलालेख-13. कलिंग युद्ध, अशोक का हृदय परिवर्तन, पड़ोसी राजाओ का वर्णन।
  • शिलालेख-14. धार्मिक जीवन जीने की प्रेरणा दी।

सम्राट अशोक के स्तम्भ लेखों की संख्या ७ है, ब्राह्मी लिपि , अलग-अलग स्थानों से प्राप्त हुआ है.

  1. प्रयाग स्तम्भ लेख – यह पहले कौशाम्बी में स्थित था. इस स्तम्भ लेख को अकबर इलाहाबाद के किले में स्थापित कराया.
  2. दिल्ली टोपरा – यह स्तम्भ लेख फिरोजशाह तुगलक के द्वारा टोपरा से दिल्ली लाया गया.
  3. दिल्ली मेरठ – पहले मेरठ में स्थित यह स्तम्भ लेख फिरोजशाह द्वारा दिल्ली लाया गया है.
  4. रामपुरवा – यह स्तम्भ लेख चम्पारण बिहार में स्थापित है. इसकी खोज १८७२ ई में कारलायल ने की.
  5. लौरिया अरेराज – चम्पारण में.
  6. लौरिया नंदनगढ़ – चम्पारण में इस स्तम्भ पर मोर का चित्र बना है.

कुछ अन्य तथ्य –

कौशाम्बी अभिलेख को रानी का अभिलेख कहा जाता है.
अशोक का सबसे छोटा स्तम्भ लेख रुम्मी देई है.
अशोक का ७वां अभिलेख सबसे लम्बा है.