President of India : भारत के राष्ट्रपति

President of India : भारत के राष्ट्रपति

राष्ट्रपति वास्ताव् में संवैधानिक प्रमुख होता है, यह एक शक्ति के पद की तुलना में , सम्मान का पद है | राष्ट्रपति इकलौता ऐसा पद है जो सैन्य के तीनो अंगो का प्रमुख तथा विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका से सम्बध्ध्ह है |भारत में अब तक सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी (64 वर्ष) | राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में 50सदस्यों से अनुमोदन होना चाहिए | 1967 में सर्वाधिक 17 प्रत्याशी थे राष्ट्रपति पद के लिए | राष्ट्रपति चुनाव में जमानत राशी 1500 रूपए है | राष्ट्रपति निर्वाचन से सम्बंधित सभी वाद सर्वोच्च न्यायालय से ही होते है राष्ट्रपति के पद को शपथ ससर्वोच्च न्यायलय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा दिया जाता है | भारत में एक व्यक्ति कितनी बार राष्ट्रपति के पद चुना जा सकता है , इस बारे में कोई उल्लेख संविधान में नहीं है | USA में एक ही व्यक्ति मात्र 2 बार ही राष्ट्रपति के लिए चुना जा सकता है, सिर्फ FD रूसवेल्ट ही USA में ४ बार राष्ट्रपति चुने गए थे| राष्ट्रपति अपना त्याग पात्र उपराष्ट्रपति को सौंपता है, राष्ट्रपति की मृत्यु या इस्तीफे की वजह से रिक्त हुए पद का चुनाव 180 दिनों में हो जाना चाहिए |
वीटो शक्तियाँ

विधायिका की किसी कार्यवाही को विधि बनने से रोकने की शक्ति वीटॉ शक्ति कहलाती है संविधान राष्ट्रपति को तीन प्रकार के वीटो देता है।
(1) पूर्ण वीटो – निर्धारित प्रकिया से पास बिल जब राष्ट्रपति के पास आये (संविधान संशोधन बिल के अतिरिक्त)] तो वह् अपनी स्वीकृति या अस्वीकृति की घोषणा कर सकता है किंतु यदि अनु 368 के अंतर्गत कोई बिल आये तो वह अपनी अस्वीकृति नही दे सकता है
(2) निलम्बनकारी वीटो – संविधान संशोधन अथवा धन बिल के अतिरिक्त राष्ट्रपति को भेजा गया कोई भी बिल वह संसद को पुर्नविचार हेतु वापिस भेज सकता है किंतु संसद यदि इस बिल को वापिस पास कर के भेज दे तो उसके पास सिवाय इसके कोई विकल्प नही है उस बिल को स्वीकृति दे दे। इस वीटो को वह अपने विवेकाधिकार से प्रयोग लेगा। इस वीटो का प्रयोग अभी तक संसद सदस्यॉ के वेतन बिल भत्ते तथा पेंशन नियम संशोधन 1991 मे किया गया था। यह एक वित्तीय बिल था। राष्ट्रपति वेंकट रमण ने इस वीटो का प्रयोग इस आधार पर किया कि यह बिल लोकसभा मे बिना उनकी अनुमति के लाया गया था।
(3) पाकेट वीटो – संविधान राष्ट्रपति को स्वीकृति अस्वीकृति देने के लिये कोई समय सीमा नही देता है यदि राष्ट्रपति किसी बिल पे कोई निर्णय ना दे ([सामान्य विधेयक ) तो इसे पाकेट वीटो का कहलाता है | पेप्सू बिल 1956 तथा भारतीय डाक बिल 1984 मे राष्ट्रपति ने इस वीटो का प्रयोग किया था।
राष्ट्रपति के मात्र दो विवेकाधिकार है
1. त्रिशंकु लोकसभा की स्थिति में प्रधानमंत्री की नियुक्ति करना

2. त्रिशंकु लोकसभा की स्थिति में लोकसभा को भंग करना

भारत के राष्ट्रपति का उल्लेख अनुच्छेद 52 में  किया गया है ।यदि कार्यवाहक की संख्या हटा दी जाये तो भारत में अब तक 13वे राष्ट्रपति है श्री प्रणब मुखर्जी।अगर ओवरआल देखा जाये तो 15 अलग अलग व्यक्तियों ने राष्ट्रपति की शपथ ली है। हमारे पव्हले राष्ट्रपति थे डा राजेंद्र प्रसाद जिनको  26 जनवरी 1950 को राष्टपति पद पर मनोनीत किया गया था। अकेले राष्टपति जो दो बार चुने गए । यह 13  मई 1962 तक रहे।

1- डॉ॰ राजेंद्र प्रसाद (1884-1963) ने 26 जनवरी 1950 से 13 मई 1962 तक राष्ट्रपति के प्॰ डी को सुशोभित किया । मई 1952 के राष्ट्रपति के चुनाव में उन्होंने के टी शाह को हराया।1957 के राष्ट्रपति के चुनाव में इन्होंने चौधरी हरी राम को हराया।पटना में सदाकत आश्रम की स्थापना की। हिन्दू उत्तराधिकार के मुद्दे पर इनकी सरकार से मतभेद थे।

2–डॉ॰ सर्वपल्ली राधाकृष्णन(1888 –1975) दूसरे राष्ट्रपति 13 मई 1962 से 13 मई 1967 तक थे ।1962 के राष्ट्रपति चुनाव में इन्होंने चौधरी हरी राम को हराया। यह संविधन सभा के स्पीकर भी रह चुके है। राधाकृष्णन मुख्यतः दर्शनशास्त्री और लेखक थे। वे आन्ध्र विश्वविद्यालय और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति भी थे।”हिन्दू फिलॉसफी ” इनकी प्रसिद्ध रचना है।रूस में भारत के राजदूत रहे1949 से 1952। तीन प्रधानमंत्रियों तथा दो कार्यवाहक प्रधानमंत्रियों के काम किया(सर्वाधिक)।

3.ज़ाकिर हुसैन(1897 –1969)  तीसरे राष्ट्रपति थे जो 13 मई 1967 से 3 मई 1969 तक थे | उन्होंने 1967 के राष्ट्रपति के चुनाव में कोका सुब्बाराव को हराया | ज़ाकिर हुसैन अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति और पद्म विभूषण और भारत रत्न के भी प्राप्तकर्ता थे। राष्ट्रपति के रूप में सबसे छोटा कार्यकाल | पहले मुस्लिम राष्ट्रपति और पहले राष्ट्रपति जिनकी मृत्यु ऑफिस में हुई.
पहली बार किसी राष्ट्रपति के चुनाव को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी |अबू खान की बकरी उनकी प्रसिद्द रचना है |

वराहगिरि वेंकट गिरि (18941980) कार्यवाहक राष्ट्रपति 3 मई 1969-  20 जुलाई 1969 के बीच बने |राष्ट्रपति चुनाव में भाग लेने के लिए राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया |

मुहम्मद हिदायतुल्लाह (19051992) वी वी गिरी के इस्तीफे के बाद कार्यवाहक राष्ट्रपति बने | यह 20 जुलाई 1969 – 24 अगस्त 1969 तक रहे |  हिदायतुल्लाह भारत के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (ऐसा होने वाले एकमात्र व्यक्ति ) |  आर्डर ऑफ ब्रिटिश इंडिया के प्राप्तकर्ता थे

4.वराहगिरि वेंकट गिरि(1894–1980) – 1969 के चुनाव में जीते | 24 अगस्त 1969 से 24 अगस्त 1974 तक रहे | गिरि एकमात्र व्यक्ति थे जो कार्यवाहक राष्ट्रपति और राष्ट्रपति दोनों बने. वे भारत रत्न से सम्मानित हो चुके थे। एकमात्र राष्ट्रपति जिनके चुनाव में द्वितीय वरीयता से जीत दर्ज हुई | इम्होने नीलम संजीव रेड्डी को हराया | इनके जीत का मत प्रतिशत 50.2%  था | यह चुनाव अंतरात्मा की आवाज के नारों के लिए भी जाना जाता है | एक मात्र रराष्ट्रपति जो निर्दलीय जीते | इस चुनाव में कांग्रेस दो धड़ो में बट गया था , एक कांग्रेस रुल्लिंग दूसरा कांग्रेस आर्गेनाइजेशन | इसी चुनाव के बाद इंदिरा युग की शुरुआत हुई |

5.फ़ख़रुद्दीन अली अहमद (1905–1977) 1974 के चुनाव में बने | 24 अगस्त 1974 से  11 फ़रवरी 1977 तक रहे तथा अपने कार्यकाल के बीच मृत्यु हो गयी | इनके कार्यकाल में आपातकाल 1975 , 26 जून को लगायागया |फ़ख़रुद्दीन अली अहमद राष्ट्रपति बनने से पूर्व मंत्री थे। सर्वाधिक अध्यादेश इन्ही के समय जरी हुए |

बासप्पा दनप्पा जत्ती (19122002) 11 फ़रवरी 1977 से 25 जुलाई 1977 तक कार्यवाहक रहे |  इससे पहले वह मैसूर राज्य के मुख्यमंत्री थे।

6 नीलम संजीव रेड्डी (1913–1996)  25 जुलाई 1977  से 25 जुलाई 1982  तक राष्ट्रपति रहे | 1977 चुनाव के निर्विरोध चुने गए और पहले ऐसे व्यक्ति बने |नीलम संजीव रेड्डी आन्ध्र प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री थे। रेड्डी आन्ध्र प्रदेश से चुने गए एकमात्र सांसद थे। राष्ट्रपति बन्ने से पहले लोकसभा के स्पीकर थे|

7 ज्ञानी जैल सिंह (1916–1994) 1982 के राष्ट्रपति चुनाव में H R Khanna को हराया | 25 जुलाई 1982 25 जुलाई 1987 तक रहे | सिख धर्म के प्रख्यात ज्ञानी | जैल सिंह मार्च 1972 में पंजाब राज्य के मुख्यमंत्री बने और 1980 में गृहमंत्री बने .ऑपरेशन ब्लू स्टार को उन्होंने मंजूरी दी राजीव गाँधी को नियुक्त करने में उन्होंने विवेकाधिकार का प्रयोग किया | 1986 में डाकघर विधेयक में पॉकेट वीटो का प्रयोग किया

मुहम्मद हिदायतुल्लाह (19051992) 1982 में कुछ दिनों के लिए ज्ञानी जैल सिंह की अनुपस्थिति  में कार्यवाहक रहे  

8.रामास्वामी वेंकटरमण (1910–2009)  25 जुलाई 1987 से 25 जुलाई 1992 तक रहे और  1987 चुनाव वी आर कृष्णा अय्येर को हराकर राष्ट्रपति बने |, वेंकटरमण भारतीय स्वतंत्रता संग्राम आन्दोलन में जेल भी गए। जेल से छुटने के बाद वे कांग्रेस पार्टी के सांसद रहे. इसके अलावा वे भारत के वित्त एवं औद्योगिक मंत्री और रक्षा मंत्री भी रहे.79 वर्ष की उम्र में राष्ट्रपति बनने वाले वरिष्ठतम |

9.शंकरदयाल शर्मा (1918–1999)  25 जुलाई 1992 से  25 जुलाई 1997 तक रहे और 1992 के चुनाव  के. आर. नारायणन 1992 चुनाव
शर्मा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और भारत के संचार मंत्री रह चुके थे। इसके अलावा वे आन्ध्र प्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र के राज्यपाल भी थे।

10.के. आर. नारायणन(1920–2005) , 1997 के चुनाव में , टी एन शेशन को हराया |  25 जुलाई 1997  से 25 जुलाई 2002 तक रहे | पहले राष्ट्रपति जो अनुसूचित जाती से थे | भारतीय विदेश सेवा से थे | उन्होंने बिहार और गुजरात में राष्ट्रपति शासन की अर्जी को ख़ारिज कर दिया था |  वे जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के कुलपति भी रह चुके हैं .

11.ऐ. पी. जे. अब्दुल कलाम (1931-2015) , 2002 के चुनाव में लक्ष्मी सहगल को हराया | 25 जुलाई 2002  से 25 जुलाई 2007  तक रहे | भारत के सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपति थे | उन्हें राष्ट्रपति बब्ने से पहले ही भारत रत्न मिल चुका था | IGMBT में 1983 में प्रोजेक्ट इंचार्ज बनाये गए थे | पोखरण 2 के सूत्रधार थे | विज़न 20-20 , विंग्स ऑफ़फायर , IGNITE mind, प्रमुख पुस्तके थी | उन्हें भारत का मिसाइल मैन भी कहा जाता है।

12.प्रतिभा पाटिल (जन्म 1934) , 2007 के चुनाव में भैरो सिंह शेखावत को हराकर , 25 जुलाई 2007 से 25 जुलाई 2012 तक रही | भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति | वह राजस्थान की प्रथम महिला राज्यपाल भी थी |

13.प्रणब मुखर्जी(जन्म 1935) , पी ऐ संगमा को हराकर  25 जुलाई 2012  को राष्ट्रपति बने | प्रणब मुखर्जी भारत सरकार में वित्त मंत्री, विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री और योजना आयोग के उपाध्यक्ष रह चुके है।

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