भारत का संविधान : भाग 19: प्रकीर्ण (361-367)

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भारत का संविधान : भाग 19: प्रकीर्ण ,Constitution of India, PART 19 MISCELLANEOUS

important for Exam 361,61,363,366

361. राष्ट्रपति और राज्यपालों और राजप्रमुखों द्वारा किए जाने के लिए तात्पर्यित किसी कार्य के लिए किसी न्यायालय को उत्तरदायी नहीं होगा : परन्तु अनुच्छेद 61 के अधीन आरोप के अन्वेषण के लिए संसद के किसी सदन द्वारा नियुक्त या अभिहित किसी न्यायालय, अधिकरण या निकाय द्वारा राष्ट्रपति के आचरण का पुनर्विलोकन किया जा सकेगा|
361(2) राष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल के विरुद्ध उसकी पदावधि के दौरान किसी न्यायालय में किसी भी प्रकार की दांडिक कार्यवाही संस्थित नहीं की जाएगी या चालू नहीं रखी जाएगी।
361(3) राष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल की पदावधि के दौरान उसकी गिरफ्तारी या कारावास के लिए किसी न्यायालय से कोई आदेशिका निकाली नहीं जाएगी।
361क. संसद् और राज्यों के विधान-मंडलों की कार्यवाहियों के प्रकाशन का संरक्षण , अगर संसद , विधान मंडल की , किन्ही कार्यवाहियों (सदन की गुप्त बैठक को छोड़कर)  के सारतः सही विवरण के किसी समाचारपत्र में प्रकाशन के संबंध में किसी न्यायालय में दोषी नहीं होगा यदि यह साबित न हो कि उस व्यक्ति ने प्रकाशन विद्वेषपूर्वक किया गया है |
362. देशी राज्यों के शासकों के अधिकार और विशेषाधिकार।
363क. देशी राज्यों के शासकों को दी गई मान्यता की समाप्ति और निजी थैलियों का अंत
364. महापत्तनों और विमानक्षेत्रों के बारे में विशेष उपबंध|
366. परिभाषाएँ –इस संविधान में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, निम्नलिखित पदों के निम्नलिखित अर्थ हैं, अर्थात्‌ : —
(1) ”कृषि-आय” से भारतीय आय-कर से संबंधित अधिनियमितियों के प्रयोजनों के लिए यथा परिभाषित कृषि-आय अभिप्रेत है ;
(2) ”आंग्ल-भारतीय” से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसका पिता या पितृ-परंपरा में कोई अन्य पुरूष जनक यूरोपीय उद्भव का है या था, किन्तु जो भारत के राज्यक्षेत्र में अधिवासी है और जो ऐसे राज्यक्षेत्र में ऐसे माता-पिता से जन्मा है या जन्मा था जो वहाँ साधारणतया निवासी रहे हैं और केवल अस्थायी प्रयोजनों के लिए वास नहीं कर रहे हैं |