भारत का संविधान, भाग 11, संघ और राज्य के बीच सम्बन्ध(245-263)

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भारत का संविधान, भाग 11, संघ और राज्य के बीच सम्बन्ध, Constitution of India ,Part 11,RELATIONS BETWEEN THE UNION AND THE STATES

245. संसद भारत के संपूर्ण राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए विधि बना सकेगी और किसी राज्य का विधान-मंडल संपूर्ण राज्य या उसके किसी भाग के लिए विधि बना सकेगा।
246. संसद द्वारा और राज्यों के विधान-मंडलों द्वारा बनाई गई विधियों की विषय-वस्तु, संसद को सातवीं अनुसूची की सूची 1 में (संघ सूची) किसी भी विषय में विधि बनाने की शक्ति है।राज्य के विधान-मंडल को भी, सातवीं अनुसूची की सूची 3 में (समवर्ती सूची) विषय में विधि बनाने की शक्ति है।
247. कुछ अतिरिक्त न्यायालयों की स्थापना का उपबंध करने की संसद की शक्ति
248. संसद को किसी ऐसे विषय के संबंध में, जो समवर्ती सूची या राज्य सूची में प्रगणित नहीं है, विधि बनाने की अनन्य शक्ति है।
249. यदि राज्य सभा ने उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई सदस्यों द्वारा समर्थित संकल्प द्वारा घोषित किया है कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या समीचीन है कि संसद राज्य सूची में प्रगणित ऐसे विषय के संबंध में, जो उस संकल्प में विनिर्दिष्ट है, विधि बनाए तो जब तक वह संकल्प प्रवृत्त है, संसद के लिए उस विषय के संबंध में भारत के संपूर्ण राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए विधि बनाना विधिपूर्ण होगा।
250. संसद को, जब तक आपात की उद्‌घोषणा प्रवर्तन में है, राज्य सूची में प्रगणित किसी भी विषय के संबंध में भारत के संपूर्ण राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए विधि बनाने की शक्ति होगी।
258. कुछ दशाओं में राज्यों को शक्ति प्रदान करने आदि की संघ की शक्ति, राष्ट्रपति, किसी राज्य की सरकार की सहमति से ऐसे किसी विषय से संबंधित कृत्य, जिन पर संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार है, सशर्त या बिना शर्त सौंप सकेगा।

262. संसद, विधि द्वारा, किसी अंतरराज्यिक नदी या नदी-दून के या उसमें जल के प्रयोग, वितरण या नियंत्रण के संबंध में किसी विवाद या परिवाद के न्यायनिर्णयन के लिए उपबंध कर सकेगी। और यदि संसद चाहे तो किसी भी न्यायालय को इस बाबत अधिकारिता को रोक सकती है 

263. अंतरराज्य परिषद के संबंध में