भारत का संविधान-भाग 6- राज्य(152-237)

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भारत का संविधान  – भाग 6- राज्य , Constitution of India, Part 6 State

152. परिभाषा– इस भाग में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, ” राज्य”  (जम्मू-कश्मीर राज्य को छोड़कर)
153.प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा
154. राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होगी और वह इसका प्रयोग इस संविधान के अनुसार स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के द्वारा करेगा।
155. राज्य के राज्यपाल को राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा नियुक्त करेगा।
156.  राज्यपाल, राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करेगा।
157. कोई व्यक्ति राज्यपाल नियुक्त होने का पात्र तभी होगा जब वह भारत का नागरिक है और पैंतीस वर्ष की आयु पूरी कर चुका है।
159. राज्यपाल द्वारा शपथ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति या उसकी अनुपस्थिति में उस न्यायालय के उपलब्ध ज्येष्ठतम न्यायाधीश के समक्ष करेगा

161. किसी राज्य के राज्यपाल को  उस राज्य की कार्यपालिका विधि के विरुद्ध किसी अपराध के लिए दंड को क्षमा, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की अथवा दंडादेश में निलंबन, परिहार या लघुकरण की शक्ति होगी।
163. राज्यपाल को अपने कृत्यों का प्रयोग करने में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रि-परिषद होगी जिसका प्रधान, मुख्यमंत्री होगा।

163(3) इस प्रश्न की किसी न्यायालय में जाँच नहीं की जाएगी कि क्या मंत्रियों ने राज्यपाल को काई सलाह दी, और यदि दी तो क्या दी।
164 मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करेगा और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर करेगा तथा मंत्री, राज्यपाल के प्रसादपर्यंत अपने पद धारण करेंगे.
164(क) किसी राज्य की मंत्रि-परिषद में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या उस राज्य की विधानसभा के सदस्यों की कुल संख्या के पंद्रह प्रतिशत से अधिक नहीं (संख्या बारह से कम नहीं होगी)होगी.
164(2) मंत्रि-परिषद राज्य की विधानसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होगी।
165(1) राज्यपाल, किसी व्यक्ति को राज्य का महाधिवक्ता (उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्हित )नियुक्त करेगा।

165(3) महाधिवक्ता, राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करेगा और ऐसा पारिश्रमिक प्राप्त करेगा जो राज्यपाल अवधारित करे
166. किसी राज्य की सरकार की समस्त कार्यपालिका कार्रवाई राज्यपाल के नाम से की हुई कही जाएगी।
167.प्रत्येक राज्य के मुख्यमंत्री का यह कर्तव्य होगा कि वह राज्यपाल को , राजपाल द्वारा मांगे गए सूचना दे |
168 (1) प्रत्येक राज्य के लिए एक विधान-मंडल होगा जो राज्यपाल (2) किसी राज्य के विधान-मंडल के दो सदन हैं वहां एक का नाम विधान परिषद और दूसरे का नाम विधानसभा होगा और केवल एक सदन है वहां उसका नाम विधानसभा होगा।

170. विधानसभाओं की संरचना,प्रत्येक राज्य की विधानसभा उस राज्य में प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने हुए पाँच सौ से अनधिक और साठ से अन्यून सदस्यों से मिलकर बनेगी। (>60 and <500)
172.प्रत्येक राज्य की प्रत्येक विधानसभा, यदि पहले ही विघटित नहीं कर दी जाती है तो, अपने प्रथम अधिवेशन  के लिए नियत तारीख से पाँच वर्ष तक बनी रहेगी.
173. राज्य के विधान-मंडल की सदस्यता के लिए अर्हता(क) वह भारत का नागरिक है (ख)  कम से कम पच्चीस वर्ष की आयु का और विधान परिषद के  लिए कम से कम तीस वर्ष की आयु.
174. राज्यपाल, समय-समय पर, राज्य के विधान-मंडल के सदन या प्रत्येक सदन को, अधिवेशन  के लिए आहूत करेगा
174(2) राज्यपाल (क) सदन का या किसी सदन का सत्रावसान कर सकेगा(ख) विधानसभा का विघटन कर सकेगा।
176(1) राज्यपाल, विधानसभा के लिए प्रत्येक साधारण निर्वाचन के पश्चात्‌ प्रथम सत्र के आरंभ में और प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के आरंभ मेंट विधानसभा में या विधान परिषद वाले राज्य की दशा में एक साथ समवेत दोनों सदनों में अभिभाषण करेगा
178. विधानसभा का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
182.विधान परिषद वाले प्रत्येक राज्य की विधान परिषद, यथाशीघ्र, अपने दो सदस्यों को अपना सभापति और उपसभापति चुनेगी
183. सभापति और उपसभापति का पद रिक्त होना
212. न्यायालयों द्वारा विधान-मंडल की कार्यवाहियों की जाँच न किया जाना
214. प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय होगा।
215. उच्च न्यायालयों का अभिलेख न्यायालय होना
216. प्रत्येक उच्च न्यायालय मुख्‍य न्यायमूर्ति और ऐसे अन्य न्यायाधीशों से मिलकर बनेगा जिन्हें राष्ट्रपति समय-समय पर नियुक्त करना आवश्यक समझे।
220. स्थायी न्यायाधीश रहने के पश्चात्‌ विधि-व्यवसाय पर निर्बंधन
221. न्यायाधीशों के वेतन आदि
222. किसी न्यायाधीश का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय को अंतरण
228. कुछ मामलों का उच्च न्यायालय को अंतरण–यदि उच्च न्यायालय का यह समाधान हो जाता है कि उसके अधीनस्थ किसी न्यायालय में लंबित किसी मामले में इस संविधान के निर्वचन के बारे में विधि का कोई सारवान्‌ प्रश्न अंतर्वलित है जिसका अवधारण मामले के निपटारे के लिए आवश्यक है तो वह उस मामले को अपने पास मंगा लेगा (राम जन्म भूमि केस )
229. उच्च न्यायालयों के अधिकारी और सेवक तथा व्यय तथा नियुक्तियाँ उस न्यायालय का मुख्य न्यायमूर्ति करेगा
231. दो या अधिक राज्यों के लिए एक ही उच्च न्यायालय की स्थापना
233. जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति