भारत का संविधान : भाग 15: निर्वाचन(324-329A)

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भारत का संविधान : भाग 15: निर्वाचन, Constitution of India: PART 15 ELECTIONS

Important for Exams : 324, 324(2), 325, 61व संविधान संसोधन , 327,329क

324. संसद और प्रत्येक राज्य के विधान-मंडल के लिए कराए जाने वाले सभी निर्वाचनों के लिए तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों के लिए निर्वाचक-नामावली तैयार कराने का और उन सभी निर्वाचनों के संचालन का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण,एक आयोग में निहित होगा जो निर्वाचन आयोग कहा गया है|
324(2) निर्वाचन आयोग मुख्‍य निर्वाचन आयुक्त और उतने अन्य निर्वाचन आयुक्तों से, यदि कोई हों, जितने राष्ट्रपति समय-समय पर नियत करे, मिलकर बनेगा तथा मुख्‍य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति, संसद द्वारा इस निमित्त बनाई गई विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी।
324(5) मुख्‍य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर ही हटाया जाएगा, जिस रीति से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है
325. धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर किसी व्यक्ति का निर्वाचक-नामावली में सम्मिलित किए जाने के लिए अपात्र न होना|
326. लोक सभा और प्रत्येक राज्य की विधान सभा के लिए निर्वाचन वयस्क मताधिकार के आधार पर होंगे अर्थात्‌ प्रत्येक व्यक्ति, जो भारत का नागरिक है और ऐसी तारीख को, जो समुचित विधान-मंडल द्वारा बनाई गई किसी विधि द्वारा या उसके अधीन इस निमित्त नियत की जाए, कम से कम अठारह वर्ष की आयु का हो ( संविधान 61वा  संशोधन) अधिनियम, 1988 की धारा 2 द्वारा 21 से 18 वर्ष किया गया ) ।
327. संसद समय-समय पर, निर्वाचक-नामावली तैयार कराना, निर्वाचन-क्षेत्रों का परिसीमन ,अन्य सभी आवश्यक विषय हैं, उपबंध कर सकेगी।
329. निर्वाचन संबंधी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप का वर्जन अनुच्छेद 327 या अनुच्छेद 328 के अधीन बनाई गई विधि की विधिमान्यता,  किसी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं की जाएगी;
329क. प्रधान मंत्री और अध्यक्ष के मामले में संसद के लिए निर्वाचनों के बारे में विशेष उपबंध