Uttar Pradesh Special- उत्तर प्रदेश के बारे में

1 अप्रेल १९३७ में संयुक्त प्रान्त से गठित हुआ तथा १९५० में इसे उत्तर प्रदेश नाम दिया गया| जनसंख्या के आधार पर उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा  राज्य है। लखनऊ प्रदेश की राजधानी है और इलाहाबाद न्यायिक राजधानी  तथा कानपुर व्यापारिक राजधानी है। प्रदेश के अन्य महत्त्वपूर्ण शहर हैं आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, कानपुर, बरेली, मेरठ, वाराणसी (बनारस), सुल्तानपुर, अमेठी, जौनपुर, गोरखपुर, गाज़ियाबाद, मुरादाबाद, सहारनपुर, फ़ैज़ाबाद। इसके पड़ोसी राज्य हैं उत्तराखंड(उत्तर -पूर्व), हिमाचल प्रदेश(उत्तर -पश्चिम), हरियाणा(पश्चिम), दिल्ली, राजस्थान(दक्षिण-पश्चिम), मध्य प्रदेश(दक्षिण), छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार। उत्तर प्रदेश की पूर्वोत्तर दिशा में नेपाल देश है।
उत्तर प्रदेश का क्षेत्रफल २,३६,२८६ वर्ग किलोमीटर है |प्रमुख धर्म है – हिन्दू , इस्लाम,इसाई,बुद्धिज़्म,जैनिज़्म
उत्तर प्रदेश का ज्ञात इतिहास लगभग 4000 वर्ष पुराना है, जब आर्यों ने अपना पहला कदम इस जगह पर रखा।  संसार के प्राचीनतम शहरों में एक माना जाने वाला वाराणसी शहर यहीं पर स्थित है। वाराणसी के पास स्थित सारनाथ का चौखन्डी स्तूप भगवान बुद्ध के प्रथम प्रवचन की याद दिलाता है।
उत्तरी भारत में 16 महाजनपद श्रेष्ठता की दौड़ में शामिल थे, इनमें से सात वर्तमान उत्तर प्रदेश की सीमा के अंतर्गत थे। बुद्ध ने अपना पहला उपदेश वाराणसी (बनारस) के निकट सारनाथ में दिया और एक धर्म की नींव रखी |

इस क्षेत्र में हालाँकि 1000-1030 ई. तक मुसलमानों का आक्रमण हो चुका था, किन्तु उत्तरी भारत में 12वीं शताब्दी के अन्तिम दशक के बाद ही मुस्लिम शासन स्थापित हुआ। लगभग 650 वर्षों तक अधिकांश भारत की तरह उत्तर प्रदेश पर भी किसी न किसी मुस्लिम वंश का शासन रहा, जिनका केन्द्र दिल्ली या उसके आसपास था। 1526 ई. में बाबर ने दिल्ली के सुलतान इब्राहीम लोदी को हराया और सर्वाधिक सफल मुस्लिम वंश, मुग़ल वंश की नींव रखी। मुस्लिम काल के भारत को ही अँग्रेज़ सोने की चिड़िया कहा करते थे।
सन 1857 में अंग्रेजी फौज के भारतीय सिपाहियों ने विद्रोह कर दिया। यह विद्रोह एक साल तक चला और अधिकतर उत्तर भारत में फ़ैल गया। इसे भारत का प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम कहा गया।  गोविंद वल्लभ पंत इस प्रदेश के प्रथम मुख्य मन्त्री बने। अक्टूबर १९६३ में सुचेता कृपलानी उत्तर प्रदेश एवम भारत की प्रथम महिला मुख्य मन्त्री बनीं|

उत्तर प्रदेश की संरचना

सम्भागोँ की संख्या- १८
जिलोँ की संख्या- ७५
तहसीलोँ की संख्या- ३३२
विश्वविद्यालयोँ की संख्या- ५५
विधानमण्डल- द्विसदनात्मक
विधान सभा सदस्योँ की संख्या- ४०३+१ (एंग्लोइँडियन) = ४०४
विधान परिषद सदस्योँ की संख्या- ९९+१ (एंग्लोइँडियन) = १००
लोकसभा सदस्योँ की संख्या- ८०
राज्यसभा सदस्योँ की संख्या- ३१
उच्च न्यायालय- इलाहाबाद (खण्डपीठ- लखनऊ)
भाषा- हिन्दी (उर्दू दूसरी राजभाषा)
राजकीय पक्षी- सारस या क्रौँच
राजकीय पेड़- अशोक
राजकीय पुष्प- पलाश
राजकीय चिन्ह- मछली एवँ तीर कमान
स्थापना दिवस- १ नवम्बर १९५६

भू-आकृति – उत्तर प्रदेश को दो विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों, गंगा के मध्यवर्ती मैदान और दक्षिणी उच्चभूमि में बाँटा जा सकता है। उत्तर प्रदेश के कुल क्षेत्रफल का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा गंगा के मैदान में है। मैदान अधिकांशत: गंगा व उसकी सहायक नदियों के द्वारा लाए गए जलोढ़ अवसादों से बने हैं। इस क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में उतार-चढ़ाव नहीं है, यद्यपि मैदान बहुत उपजाऊ है, लेकिन इनकी ऊँचाई में कुछ भिन्नता है, जो पश्चिमोत्तर में 305 मीटर और सुदूर पूर्व में 58 मीटर है। गंगा के मैदान की दक्षिणी उच्चभूमि अत्यधिक विच्छेदित और विषम विंध्य पर्वतमाला का एक भाग है, जो सामान्यत: दक्षिण-पूर्व की ओर उठती चली जाती है। यहाँ ऊँचाई कहीं-कहीं ही 305 से अधिक होती है।

उत्तर प्रदेश में अनेक नदियाँ है जिनमें गंगा, घाघरा, गोमती, यमुना, चम्बल, सोन आदि मुख्य है। प्रदेश के विभिन्न भागों में प्रवाहित होने वाली इन नदियों के उदगम स्थान भी भिन्न-भिन्न है, अतः इनके उदगम स्थलों के आधार पर इन्हें निम्नलिखित भागों में विभाजित किया जा सकता है।

उत्तर प्रदेश में झीलों का अभाव है। नहरों के वितरण एवं विस्तार की दृष्टि से उत्तर प्रदेश का अग्रणीय स्थान है। यहाँ की कुल सिंचित भूमि का लगभग 30 प्रतिशत भाग नहरों के द्वारा सिंचित होता है। यहाँ की नहरें भारत की प्राचीनतम नहरों में से एक हैं।उत्तर प्रदेश की जलवायु उष्णकटिबंधीय मानसूनी है। राज्य में औसत तापमान जनवरी में 12.50 से 17.50 से. रहता है, जबकि मई-जून में यह 27.50 से 32.50 से. के बीच रहता है।  मानसून की लगातार विफलता के परिणामस्वरूप सूखा पड़ता है व फ़सल का नुक़सान होता है। हस्तशिल्प, क़ालीन, पीतल की वस्तुएँ, जूते-चप्पल, चमड़े व खेल का सामान राज्य के निर्यात में प्रमुखता के साथ योगदान देते हैं।

कानपुर – यहाँ चमड़े का काम होता है| कानपुर में चमड़े का जूता पूरी दुनिया में मशहूर है|
भदोई व मिर्ज़ापुर-  क़ालीन दुनिया भर में सराहे जाते हैं।
पिलखुवा – हैण्ड ब्लाक प्रिंट की चादरें,
वाराणसी -रेशम व ज़री का काम
मुरादाबाद -पीतल की ख़ूबसूरत वस्तुएँ
लखनऊ -चिकनकारी,
नगीना -अबुनास  की लकड़ी का काम,
फ़िरोज़ाबाद- काँच की वस्तुएँ
सहारनपुर-नक्क़ाशीदार लकड़ी का काम

सार्वजनिक क्षेत्र के वाणिज्यिक बैंकों की संख्या उत्तर प्रदेश में ही सबसे अधिक है। उत्तर प्रदेश के लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्मित सड़कों की कुल लंबाई 1,18,946 किलोमीटर है। इसमें 3,869 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग, 9,097 किलोमीटर प्रांतीय राजमार्ग, 1,05,980 किलोमीटर अन्य ज़िला सड़कें और 72,931 किलोमीटर ग्रामीण सड़कें हैं। प्रदेश में लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, इलाहाबाद, आगरा, झांसी, बरेली, ग़ाज़ियाबाद, गोरखपुर, सहारनपुर और रायबरेली में हवाई अड्डे हैं।
राज्य की 80 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है।

इलाहाबाद में प्रत्येक बारहवें वर्ष में कुंभ मेला आयोजित किया जाता है।
इसके अतिरिक्त इलाहाबाद में प्रत्येक 6 साल बाद अर्द्ध कुंभ मेले का आयोजन भी किया जाता है।
इलाहाबाद में ही प्रत्येक वर्ष जनवरी माह में माघ मेला भी आयोजित किया जाता है, जहां बडी संख्या में लोग संगम में नहाते हैं।
अन्य मेलों में मथुरा, वृन्दावन में अनेक पर्वों के मेले और झूला मेले लगते हैं, जिनमें प्रभु की प्रतिमाओं को सोने एवं चाँदी के झूलों में रखकर झुलाया जाता है। ये झूला मेले लगभग एक पखवाडे तक चलते हैं।
कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंगा नदी में डुबकी लगाना पवित्र माना जाता है और इसके लिए गढ़मुक्तेश्वर, सोरों शूकरक्षेत्र का मार्गशीर्ष मेला, राजघाट, बिठूर, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी में बडी संख्या में लोग एकत्रित होते हैं।
आगरा ज़िले के बटेश्वर कस्बे में पशुओं का प्रसिद्ध मेला लगता है।
बाराबंकी ज़िले का देवा मेला मुस्लिम संत वारिस अली शाह के कारण काफ़ी प्रसिद्ध है।

ताजमहल, आगरा
प्राचीन तीर्थ स्थानों में वाराणसी, अयोध्या, विंध्याचल, चित्रकूट, प्रयाग, सोरों, मथुरा, वृन्दावन, देवा शरीफ, नैमिषारण्य आदि है।
फ़तेहपुर सीकरी में शेख़ सलीम चिश्ती की दरगाह
सारनाथ, श्रावस्ती, कुशीनगर, संकिसा / बसंतपुर (ज़िला एटा, उत्तर प्रदेश), कांपिल/ वर्तमान फ़र्रूख़ाबाद, पिपरावा और कौशांबी प्रमुख हैं।
कानपुर देहात जिले में पौराणिक वाणेश्वर महादेव मंदिर और ऐतिहासिक परहुल देवी मंदिर दर्शनीय हैं।
आगरा, सारनाथ, वाराणसी, लखनऊ, झांसी गोरखपुर, जौनपुर, कन्नौज, महोबा, देवगढ, बिठूर और विंध्याचल हिन्दू एवं मुस्लिम वास्तुशिल्प और संस्कृति के महत्त्वपूर्ण खजाने से भरा हैं।
उत्तर प्रदेश के गोंडा ज़िले में मत्स्येंद्रनाथ (पाटन) नामक प्रसिद्ध देवीपीठ है।
संतकबीर नगर के मगहर में संतकबीर की समाधि और सोफी निजामुददीन का मजार भी अगयां गाँव में है।मदरसा तनवीरूलइसलाम अमरडोभा भी इसी जिले में है।
अन्य महतवपूर्ण स्थान जैसे बेल्हा देवी, घुइसरनाथ धाम, चौहरजन देवी, बेल्खार् नाथ धाम इत्यादि।

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